आपको कोई दु:ख तकलीफ होती है तो हमको भी दु:ख तकलीफ होती है - सन्त बाबा उमाकान्त महाराज

आपको कोई दु:ख तकलीफ होती है तो हमको भी दु:ख तकलीफ होती है - सन्त बाबा उमाकान्त महाराज
आपको कोई दु:ख तकलीफ होती है तो हमको भी दु:ख तकलीफ होती है - सन्त बाबा उमाकान्त महाराज

आपको कोई दु:ख तकलीफ होती है तो हमको भी दु:ख तकलीफ होती है - सन्त बाबा उमाकान्त महाराज

अगर सोच लो कि हमको सेवा भजन में समय ज्यादा निकालना है तो इसी गृहस्थी में से समय निकल आएगा

नए लोगों को पुराने की अपेक्षा कम मेहनत करनी पड़ेगी


उज्जैन (म.प्र.) : निजधामवासी बाबा जयगुरुदेव जी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी, नामदान रूपी अमोलक धन देने के इस समय धरती पर एकमात्र अधिकारी, भक्तों के दुःख से दुखी होने वाले, प्रभु पर विश्वास जमाने वाले, इस समय के महापुरुष, पूरे समरथ सन्त सतगुरु, उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त महाराज ने 26 अप्रैल 2023 प्रातः अमरेली ( गुजरात) में बताया कि गुरु महाराज के जाने के बाद बहुत देशों में गुरु महाराज का फोटो लगवा दिया गया है। कई देशों में तो मैं खुद नाम दान दे करके आया। कुछ और देशों में गुरु महाराज के नामदानी रहे। वह और लोगों को लेकर आए, यहां से नामदान दिला करके ले गए। तो अब तो गुरु महाराज की दया से गुरु महाराज का यह बगीचा बहुत हरा-भरा, बड़ा हो रहा है। आपके, सब लोगों के सहयोग से गुरु महाराज का नाम और काम खूब फैल रहा है। अब जो लोग सहयोग नहीं कर पा रहे हो तो वह सब लोग भी अगर लग जाओ तो अभी तो और भी बढ़ जाए, सोने में सुगंध हो जाए। अपने-अपने स्तर से सब लोग कर सकते हैं। जो जितना कर सकते हो, गुरु का नाम-काम बढ़ाने में लग जाओ। बाकी तो गुरु महाराज के आने के बाद से ही हम यह संकल्प बना लिए हैं कि सेवा करना है। चालीसों साल गुरु महाराज ने अपने पास रख कर के जो इल्म दिया, जो सिखाया, जो जिस तरह से शरीर को सेट किया है, हम तो इसको (गुरु के मिशन को बढ़ाने में) लगाने में लगे हुए हैं।

आपकी दु:ख तकलीफ से हमें भी दु:ख तकलीफ होती है

कोई पूछता है दुकान खोल लें? खोल लो लेकिन (काम) सीख कर खोलो। कोई कहता है घर बना ले? बना लो लेकिन पुराना घर मत खरीदो। पुराना झगड़े-झंझट वाला काम मत करो। पुराने झगड़े-झंझट की जमीन मत खरीदो। लड़के पढ़ ले, लड़कियां पढ जाए, समय से शादी-ब्याह कर दो। लड़कों को काम में लगा दो। नौकरी करवा दो। अच्छी नौकरी मिल जाएगी फिर उसमें चले जाएंगे। खाली न बैठे। यह सब बताता रहता हूं क्योंकि किसी को कोई दु:ख, तकलीफ होता है तो हमको भी दु:ख तकलीफ होता है। क्योंकि हम तो जुड़ रहे हैं। आप भले ही कहोगे यह-वहां रहते हैं लेकिन आत्मा तो जुड़ रही है। आत्मा से सम्बंध हो रहा है, इसलिए हमको भी दु:ख तकलीफ होता है। आप बर्दाश्त नहीं कर पाते हो तो मुंह से भी बोलते हो। इसलिए सब बात बताता हूं।

नए लोगों को पुराने की अपेक्षा कम मेहनत करनी पड़ेगी

अंतर में जब गुरु महाराज का दर्शन हो जाएगा, वही आपको सब बता देंगे। तब फिर यहां भी आओ, ना आओ। वही जब कहेंगे, चले जाना, सुने आना तब तो आपको विश्वास हो जाएगा। लेकिन आपको गुरु पर विश्वास करके ध्यान लगाना पड़ेगा। और यह जो प्रेमी नए लोग नाम दान ले रहे हैं, आप लोग विश्वास करो। आपको ज्यादा मेहनत पहले (वालों) की अपेक्षा नहीं करनी पड़ेगी। पहले वाले को ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। आपको ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। आप अगर थोड़ी देर भी करोगे तो गुरु की दया से आपको ज्यादा फल मिलेगा। तो आप नये लोग नाम दान ले लो और पुराने लोग दोहरा लो।

भजन और सेवा में ज्यादा से ज्यादा समय लगे

महाराज ने 18 मई 2023 प्रातः उज्जैन आश्रम में बताया कि अच्छा कर्म, परमार्थ अच्छे भाव से किया तो इसका ज्यादा लाभ मिलता है। बराबर सेवा की भावना बनाए रखने की जरूरत है। सभी सेवादार को यही सोचते रहना है कि भजन और सेवा में हमारा ज्यादा से ज्यादा समय लगे। जब तक सतयुग, अच्छा समय नहीं आ जाएगा, लोगों में सुधार नहीं हो जाएगा, प्रकृति खुश होकर के लोगों की झोली जब तक नहीं भर देगी तब तक यह काम चलता रहेगा। प्रेमियों जब तक हम और आप कर पाएंगे करेंगे और नहीं कोई दूसरा आएगा, करेगा। अगर आप लोग इस बात को सोच लो कि हमको सेवा भजन में समय ज्यादा निकालना है तो इसी गृहस्थी में से समय निकल जाएगा। जो घर की जिम्मेदारी लिए हुए बैठा रहता है और कहता है मेरे बगैर नहीं चलेगा तो परिवार के लोग जिम्मेदारी नहीं लेते हैं। कहते हैं यह देख, कर रहे हैं। यह बूढ़े बुजुर्ग हैं तो इनको देखने दो। और जब वो कहीं चला जाता है तो वही सारी जिम्मेदारी परिवार के लोग ले लेते हैं। बुड्ढा जब तक रहता है, देखता रहता है, जब दुनिया से चला जाता है तो घर वाले क्या काम को नहीं संभालते हैं? संभाल लेते हैं। यह तो एक भ्रम और भूल है कि मैं नहीं करूंगा तो नहीं होगा। सब होता, चलता रहता है।

बैलगाड़ी और कुत्ते की कहानी से समझाया आपकी गृहस्थी प्रभु चला रहे हैं, परमार्थ में लगो

बैलगाड़ी जा रही थी। उसके नीचे छाया थी। रास्ते में कुत्ता भी जा रहा था। तो बैलगाड़ी के नीचे छाया में कुत्ता भी चला गया। बैलगाड़ी के साथ चलता रहा। थोड़ी देर के बाद कुत्ते ने सोचा, देखो बैलगाड़ी तो मैं खींच रहा हूं, बैलगाड़ी मेरे ऊपर है तो मैं खींच, चला रहा हूं। तो आगे बढ़ा थोड़ा तेजी से कि हम चलावे इसको। जब आगे बढ़ा तो बैल की पूछ लग गई। कुत्ते के मुंह पर अब लगा चोट। भगा, दूर खड़ा हो गया। देख रहा है कि बैलगाड़ी अभी भी चल रही है। मैं बाहर खड़ा हूं तो भी बैलगाड़ी आगे जा रही है। इसका मतलब यह है बैलगाड़ी कुत्ते के बगैर नहीं रुकी। तो गृहस्थी की गाड़ी खींचने वाला कौन है? वह प्रभु, वही सबका दाता है, वही है कर्ता सबका, वही चलाने वाला है। और उस पर विश्वास करके ज्यादा से ज्यादा समय प्रेमियों संगत के काम में देना, लोगों के परोपकार में समय को निकालने की कोशिश करना। ऐसा परोपकार काम किया जाता है जिसमें अपना कोई स्वार्थ न हो। परोपकार का मतलब दूसरे का उपकार। उपकार मतलब उनके लिए जो कर दिया उसके (बदले में) उनसे कुछ पाने की इच्छा नहीं रही, वही परोपकार होता है तो बराबर परोपकार में लगे रहना।