देश में क्रीमी लेयर को लेकर मचा हैं घमासान आख़िर क्या हैं ये और क्या लाभ और क्या हानि लोगों को दिख रही इसमें जानें पूरा मामला पढ़े पूरी ख़बर

देश में क्रीमी लेयर को लेकर मचा हैं घमासान आख़िर क्या हैं ये और क्या लाभ और क्या हानि लोगों को दिख रही इसमें जानें पूरा मामला पढ़े पूरी ख़बर
देश में क्रीमी लेयर को लेकर मचा हैं घमासान आख़िर क्या हैं ये और क्या लाभ और क्या हानि लोगों को दिख रही इसमें जानें पूरा मामला पढ़े पूरी ख़बर

पूरे देश में क्रीमी लेयर को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई हैं और भारत बंद का ऐलान भी किया गया हालाकि कहीं असर दिखा और कहीं नहीं पर इसको लेकर विपक्ष हमलावर हैं,कुछ जानकार कहते हैं की इससे देश में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को सहायता होगी देश में आर्थिक समानता आयेगी जिससे देश की भी और लोगों की उन्नति होगी!

क्या हैं क्रीमी लेयर ?

क्रीमी लेयर,अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है जो अपेक्षाकृत अमीर और बेहतर शिक्षित होते हैं. क्रीमी लेयर के तहत आने वाले लोगों को सरकार की शैक्षिक,रोजगार, और अन्य योजनाओं के लिए पात्र नहीं माना जाता.साथ ही,उन्हें रिजर्वेशन का लाभ भी नहीं मिलता.क्रीमी लेयर का निर्धारण करते समय,सालाना आय की सीमा को आधार माना जाता है.इस समय,यह सीमा 8 लाख रुपये है, लेकिन यह समय-समय पर बदलती रहती है.पिछली बार इसे साल 2017 में संशोधित किया गया था.क्रीमी लेयर के तहत आने वाले लोगों के बारे में कुछ और बातें:जिन बच्चों के माता-पिता सरकारी नौकरी में हों और उनका पद व रैंक प्रथम श्रेणी के अधिकारी का हो, वे भी क्रीमी लेयर में आते हैं.अगर माता या पिता 40 साल से कम उम्र में प्रमोशन के ज़रिए ग्रुप ए के अधिकारी बने हों, तो उनके बच्चे भी क्रीमी लेयर में आते हैं.आर्मी में कर्नल या उससे ऊंची रैंक वाले अधिकारी और नेवी व एयरफ़ोर्स में समान रैंक वाले अफ़सरों के बच्चे भी क्रीमी लेयर में आते हैं.क्रीमी लेयर का निर्धारण करते समय, वेतन या कृषि भूमि से होने वाली आय को शामिल नहीं किया जाता हालाकि भारी विरोध को देखते हुए इसे वापस ले लिया गया हैं ?