जो आपके पास है, वो आप गुरु को समर्पित कर दो और जो उनके पास है वो ले लो, माला माल हो जाओगे...

जो आपके पास है, वो आप गुरु को समर्पित कर दो और जो उनके पास है वो ले लो, माला माल हो जाओगे...
जो आपके पास है, वो आप गुरु को समर्पित कर दो और जो उनके पास है वो ले लो, माला माल हो जाओगे...

जो आपके पास है, वो आप गुरु को समर्पित कर दो और जो उनके पास है वो ले लो, माला माल हो जाओगे

संकल्प बनाओ कि अब हम अपने कर्मों को सेवा, भजन के द्वारा काट करके फिर यहां आएंगे

उज्जैन (म.प्र.) : दुःख तकलीफों की जड़ कर्मों को ही काट देने के सरल उपाय बता कर जीवन को सुखी बनाने का उपाय बताने वाले, वक़्त के पूरे समर्थ सन्त सतगुरु, दुःखहर्ता, उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त महाराज ने अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि मुख्य रूप से समझो, कर्म, सेवा के द्वारा कटते है। सेवा के लिए जो भी जैसे आदेश हो जाए, उससे कर्म कटते है, भजन से कर्म कटते है। इसलिए ये प्रचार प्रसार कराया जा रहा है, लोगों को नशे से दूर रहने, शाकाहारी चरित्रवान बनाने के लिए, जो हाथ जोड़ कर प्रार्थना किया जा रहा है कि हाथ जोड़ कर विनय हमारी, तजो नशा बनो शाकाहारी, छोड़ो व्यभिचार बनो ब्रह्मचारी, सतयुग लाने की करो तैयारी।

जो आपके पास है, वो आप गुरु को दे दो और जो उनके पास है वो ले लो, माला माल हो जाओगे

सेवा के द्वारा कर्म कटते हैं तो सेवा के लिए बता दिया गया। प्रचार करो, लोगों को शाकाहारी, नशा मुक्त, ब्रह्म में विचरण करने वाला, आने वाले सतयुग को देखने लायक बनाओ। अब मुंह से तो कुछ बोलना पड़ेगा, कुछ चलना पड़ेगा, कहना पड़ेगा, दो बात सुनना भी पड़ेगा। अब उसी से आप समझो, (अगर आप ये सोचो कि) हमारा अपमान हो जाएगा, हमारा शरीर है, पैदल जाने में, मुंह से बोलने में हमारे को तकलीफ होगी तो कहां से गुरु खुश होंगे? कहां से आपका हाथ पकड़ेंगे? तो सेत (आसानी) में कोई चीज मिलती है? पसीना बहाना पड़ता है। देखो लोग काँटों पर सोते रहते थे, तपस्या करते रहते थे। बैसाख, जेठ के महीने में दोपहर बारह बजे बैठ करके अपने चारों तरफ आग जलाते थे और मटके में आग रख करके सिर पर रख करके पंचाग्नि देते थे, शरीर को तपाते थे। लेकिन अब तो तपाना नहीं है। अब इतना भी नही कर सकते हो? भक्ति में अपनी खाल खिंचवा दिया, खाल खीच लिया तबरेज की, मीरा ने जहर पी लिया और आप तो खाली पसीना बहा रहे हो। आपकी खाल खीची जाने को अभी हो जायेगा तो एक भी नहीं रुकोगे। कैसे गुरु भक्ति आएगी? कैसे परिपक्ता आएगी? सेत में कोई चीज मिलती है? ये सेत वाली चीज नहीं है। अरे जो आपके पास है, वो आप गुरु को दे दो, समर्पित कर दो और जो उनके पास है, वो ले लो तो माला माल हो जाओगे।
 
छोटा बनकर प्रचार करो

जब उतनी देर के लिए अपने को कुछ नहीं समझोगे, न अपने मान सम्मान की इच्छा रखोगे, न अपने धन-दौलत का अभिमान करोगे, न अपने पढ़ाई-लिखाई का अहंकार रखोगे, न अपने पद-पोस्ट का अहंकार रखोगे, एक छोटा आदमी बन करके, एक प्रचारक बनकर के जब किसी को समझाओगे बताओगे, जब हाथ जोड़कर कहोगे "हाथ जोड़कर विनय हमारी, तजो नशा बनो शाकाहारी" तब वो इसी से पिघल जाएगा। आपकी बात को सुनने लगेगा, आपकी बात वो कहते-कहते मान जाएगा।
 
संकल्प बनाओ कि अब हम अपने कर्मों को सेवा, भजन के द्वारा काट कर फिर यहां आएंगे

सब लोग अपने-अपने तरीके से बराबर प्रचार करो। बराबर प्रचार, सेवा, भजन होना चाहिए जिससे आपके कर्म कटें, गुरु को आप अच्छे लगने लग जाओ। जैसे शरीर से कोई साफ सुथरा होता है तो बैठा लेता है, बात करता है। और अगर गंदा आदमी आ जाए, लैट्रिन पेशाब लगा हुआ तो आदमी से, जानवरों से भी लोग घृणा करने लग जाते हैं। मारते हैं कुत्ते को, अगर कहीं नाली में लोट करके आया हो। तो कोई वो अच्छा लगता है? लेकिन वही कुत्ता अगर साफ सुथरा रहता है तो उसको लोग प्यार करने लगते हैं, सिर पर हाथ फेरने लग जाते हैं। ऐसे ही गुरु भी चाहते हैं की साफ सुथरे जीव हमारे पास आवें। वो कर्मों की गंदगी को वही सेवा के द्वारा धो करके तब हमारे पास आवे, के वो भी अच्छे लगे। जैसे जो काम आप करते हो, रंगाई पुताई करते हो वो तो हाथ-पैर में रगड़ जाता है, बदन में लग जाता है, उसी गंदगी को आप देखते हो लेकिन ये जो हाथ-पैर से गलत काम बैठते हो, उन कर्मों को तो आप देख नहीं पाते हो। वो गंदगी अंदर में जमा हो जाती है। उसको साफ करना जरूरी होता है। तो गुरु तो उसको देखते हैं, अंतर के हाल को देखते हैं, जीवात्माओं को देखते है कि वो कैसा है। तो उनको तो वही प्यारा लगता, वही भाता है, जो निर्मल होता है। कहा है- "निर्मल मन जन सो मोहि पावा। मोहि कपट छल छिद्र न भावा॥" निर्मलता ही उनको प्रभु को पसंद होती है। तो निर्मल हो करके आओ। अब यहां संकल्प बनाओ, त्यौहार में संकल्प बनाओ कि हम अपने कर्मों को सेवा, भजन के द्वारा काट करके फिर यहां आएंगे।