ऐसा कोई काम मत करना, जिससे किसी की जान जाए - सन्त बाबा उमाकान्त महाराज




ऐसा कोई काम मत करना, जिससे किसी की जान जाए -सन्त बाबा उमाकान्त महाराज
सतगुरु को बाहरी चीजों से मोह नहीं होता है
जयपुर : निजधामवासी बाबा जयगुरुदेव के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी जानशीन, स्वामी अब डोर हिला कर जिनके पास भेज रहे हैं, जिनके माध्यम से ही अब स्वामी जी अपनी बात कह रहे हैं, और जो स्वामी का दर्शन करने कराने की बात बार-बार कह रहे हैं ताकि पक्का विश्वास हो जाए ऐसे इस समय के युगपुरुष, पूरे समरथ सन्त सतगुरु, दुःखहर्ता, उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त महाराज ने 4 मार्च 2019 प्रातः लखनऊ (उ.प्र.) में दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि धरती का यह विधान है कि एक बार जो मनुष्य शरीर में आया, छोड़ कर के चला गया, वो दुबारा उस शरीर में नहीं आता है। कभी भी नहीं आया। उस शरीर में, जिसमें हमारे-आपके गुरु महाराज थे, वह नहीं आएंगे तो आप जल्दी विश्वास नहीं करोगे क्योंकि आपने अंतर में उनके रूप को नहीं देखा, नहीं पहचाना है। बाहर से ही आप पहचानते रहे। तो दूसरे शरीर में वो रहेंगे तो आप कैसे पहचान पाओगे। इसीलिए जल्दी विश्वास नहीं करोगे। तब वह क्या करते हैं? वहां से (जीवों की) डोर को ऐसे हिलाते हैं और अंदर में प्रेरणा मिलती है और उसके पास भेज देते हैं जिसको अधिकार देकर जाते हैं, जिनको जानशीन उतराधिकारी कहा गया। और जब उसकी (जानशीन की) बातों में से होकर बातें जब कानों में पड़ती है तो उसका असर हो जाता है, संभाल हो जाती है। इसलिए जो जानशीन होते हैं, उनको (अपने अपनाए) हुए जीवों की संभाल की जिम्मेदारी दिया जाता है।
यहां की पीढ़ियां पूरे सन्तों की रही
महाराज ने 9 मार्च 2020 सायं उज्जैन में बताया कि जब इधर सन्तों का प्रादुर्भाव हुआ तो सन्तों ने इस काम को किया। अब यह जरूर रहा कि पूरे सन्तों की गद्दी, स्थान पर कई लोग हुए। सबको तो नहीं कहा जा सकता है कि पूरे थे। वह तो जो उन्होने दया दिया, उस दया को लेकर उसको बचाए, बनाए रखा, सन्त परंपरा को खत्म नहीं होने दिया। लेकिन सबके लिए तो नहीं कहा जा सकता है कि पूरे थे। हमारे गुरु महाराज (बाबा जयगुरुदेव जी), गुरु महाराज के गुरु महाराज (घूरेलाल जी महाराज) इधर की जो पीढ़िया रही, यह पूरे सन्तों की रही हैं क्योंकि इधर अत्याचार, पापाचार ज्यादा बढ़ा, कलयुग का प्रभाव ज्यादा बढ़ा तो उस मालिक को पूरे सन्तों को पूरी ताकत देना पड़ा।
अंदर के बंधन को सन्त और साधक ही देख सकते हैं
महाराज ने 3 अगस्त 2020 प्रातः उज्जैन आश्रम में बताया कि अंतर के बंधन को आप इन बाहरी आंखों से नहीं देख सकते हो। उसको दो ही लोग देखते हैं। साधक और सन्त। बाकी आम लोग उसको नहीं देख सकते हैं। लेकिन सुन, समझ सकते हो। तो देखो, यह बाहर के बंधन जो आपको बाहरी आंखों से दिखाई पड़ते हैं, ये मोटे बंधन है। और अंदर में जो बंधन है, स्थूल शरीर छोड़ने के बाद जो अंदर में दिखाई पड़ते हैं वह झीना बंधन है। झीना यानी पतला। तो कुछ ऐसी भी चीज है जिसको आप इन बाहरी आंखों से नहीं देख सकते हो। इस जमीन के नीचे, इस वातावरण में कुछ ऐसे कीड़े-मकोड़े, चीजें हैं जिनको आप इन बाहरी आंखों से नहीं देख पाते हो। इसी तरह से वह बंधन इतना झीना, पतला है जिसमें यह जीवात्मा यानी शरीर को चलाने वाली शक्ति बंधी हुई है तो उसको आप इन बाहरी आंखों से नहीं देख सकते हो। लेकिन दिव्य दृष्टि से देख सकते हो। दिव्य दृष्टि, थर्ड आई जब तक नहीं खुलेगी तब तक उस बंधन को नहीं देख सकते हो। लेकिन मोटे बंधन को आप देख समझ सकते हो क्योंकि उसमें आप बंधे हुए हो। कोई-कोई एहसास भी कर रहा है। तो मोटे बंधन कौन से हैं? यह शरीर का, धन, पुत्र, परिवार, मान-प्रतिष्ठा का बंधन आदि बाहरी आंखों से देखने वाले, इस शरीर से महसूस करने वाले बाहरी बंधन है।
सतगुरु को बाहरी चीजों से मोह नहीं होता हैं
महाराज ने 8 जुलाई 2017 प्रातः जयपुर (राजस्थान) में बताया कि छोटी चीज में मत फंसो नहीं तो बड़ी चीज तुम्हारे हाथ से निकल जाएगी। इसलिए तुम हमेशा बड़ी चीज की इच्छा रखना। तो गुरु के पास चलना चाहिए। गुरु को कपड़े लत्तों, मोटर गाड़ी, हाथी घोड़ा आदि से कोई मोह नहीं होता है। यह तो दुनियादारों को होता है। दुनियादार ही गाड़ी-घोड़े पर चलने वालों का सम्मान, सलाम, प्रणाम करते हैं, ऊंची कुर्सी देते हैं हैं। इसलिए आदमी सोचता है कि हमारे पास बढ़िया गाड़ी हो, हम मर्सिडीज पर, पचास लाख-एक करोड़ रूपये की गाड़ी पर चलें। जहां पहुंचेंगे, वहां गाड़ी को लोग सलाम करेंगे। पुलिस वाले भी जब बढ़िया गाड़ी देखते हैं तो कहते हैं बड़ा आदमी, बड़ा नेता, बडा अधिकारी, बड़ा सेठ होगा, इसको सलाम कर लेंगे तो खुश हो जाएगा। अब उसी को लोग देखते हैं।
ऐसा कोई काम मत करना, जिससे किसी की जान जाए
महाराज ने 10 जून 2023 सांय लखनऊ (उ.प्र.) में बताया कि बुरे कर्म मत करना। ऐसा कोई काम मत करना कि जिससे किसी का दिल दुखे, किसी की जान जाए। अब जो पैसे वाले लोग हैं, वह कहते हैं कि हम जान से नहीं मारते हैं, हम तो मांस को खरीद करके लाते, खाते हैं। लेकिन अगर आप मांस खाना बंद कर दोगे तो जीव हत्या बंद हो जाएगी। जब उसने कहा- बिस्मिल्लाह ए रहमान ए रहीम। रहमान को अगर पाना है तो उसकी रूह पर रहम करो। जो रुहों पर रहम करेगा, वही खुदा का प्यारा है। जैसे अपनी उंगली कटती है तो दर्द होता है, अपने लड़के को कोई मारता है तो आपको दर्द तकलीफ होता है ऐसे ही जब मुर्गा के, बकरे के बच्चे को काटोगे तो उसको भी तकलीफ होगी। तो यह दिल दुखाना बहुत बड़ा पाप का काम होता है। दिल कभी भी नहीं दुखाना चाहिए। जीवों की रक्षा करो। सब में उस परमात्मा प्रभु की अंश (जीवात्मा) है इसलिए सब पर दया करो। दया धर्म तन बसे शरीरा, ताकर रक्षा करे रघुवीरा। सब लोगों (महापुरुषों) ने दया करना बताया। गुरु नानक जी ने कहा- सब मानुष को नाम जपायो, अकमिस खान तिन्हें तजवायो। जे रक्त लगे कपड़े, जामा होत पलीत। जो रक्त पीवे मानुषा तिन क्यों निर्मल चित्त। मांसाहार छोड़ो, शाकाहारी बनो।