छत्तीसगढ़ में अजब-गजब मामला: 40 साल से बिना कुछ खाए जिंदा है ये महिला,वजह जानकर हों जायेगें हैरान, जानिए इस महिला की कहानी...

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के बरदिया गांव में रहने वाली पल्ली देवी सिर्फ चाय के सहारे 40 सालों से जिंदा हैं। पल्ली देवी न सिर्फ जिंदा हैं, बल्कि पूरी तरह स्वस्थ भी हैं।

छत्तीसगढ़ में अजब-गजब मामला:  40 साल से बिना कुछ खाए जिंदा है ये महिला,वजह जानकर हों जायेगें हैरान, जानिए इस महिला की कहानी...
छत्तीसगढ़ में अजब-गजब मामला: 40 साल से बिना कुछ खाए जिंदा है ये महिला,वजह जानकर हों जायेगें हैरान, जानिए इस महिला की कहानी...

कोरिया : छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के बरदिया गांव में रहने वाली पल्ली देवी सिर्फ चाय के सहारे 40 सालों से जिंदा हैं। पल्ली देवी न सिर्फ जिंदा हैं, बल्कि पूरी तरह स्वस्थ भी हैं।

महिला को भगवान शिव की भक्त बताते हैं स्थानीय लोग महिला को चाय वाली चाची के नाम से जानते हैं। लोग बताते हैं की 1985 से महिला निराहार रहकर भक्ति करती है।

बाद पति के घर को छोड़कर मायके आने के बाद फिर कभी ससुराल नहीं गई. पल्ली देवी बताती है कि शादी के बाद जैसे ही मांग में सिंदूर लगा तब से उन्होंने अन्न और जल त्याग दिया। वर्षों से भगवान शिव की पूजा करते हुए आज तक अन्न का एक दाना तक नहीं छुआ। वर्तमान में पूजा के बाद रात में सिर्फ एक बार वह लाल चाय ही पीती हैं।

वहीं पल्ली देवी का कहना है कि उन्हें अंतर प्रेरणा होती है. अंतर्मन में भगवान उनसे बातें करते हैं। शुरुआती दिनों में वह दूध की चाय पीती थी लेकिन कुछ साल बाद ही उन्होंने लाल चाय पीना शुरू कर दिया। आज करीब 40 साल बीत गए हैं लेकिन उन्हें भोजन करने की इच्छा नहीं होती। वह सिर्फ अपने भगवान के साथ ही रहना चाहतीहैं। वह भगवान शिव की अनन्य भक्त हैं।

चाय वाली चाची की हुई थी शादी, वापस नहीं गई ससुराल :

 

पल्ली देवी उर्फ़ चाय वाली चाची के परिवार वालों की माने तो, इन्होने 35 वर्षों से एक भी अन्न और जल का बिना सहारा लिए, सिर्फ चाय पीकर अब तक अपने आप को जिन्दा रखा है । जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर बरदिया नाम का एक गाँव है, जहाँ पल्ली देवी अपने पिता के घर पर रहती है । यह 45 साल की चाय वाली चाची के पिता रतिराम है, जो बताते है की जब वह 6वीं कक्षा में थी, तब से ही इसने भोजन करना छोड़ दिया था, जो तब से अब तक लगातार जारी है और चाय पीकर ही अपना जीवन व्यतीत कर रही है । वहीं भाई का कहना है की जब से हमने होश संभाला है, तब से ही इन्होने अन्न-जल का त्याग कर दिया है और हमने इन्हें इसी हल में ही देखा है । दिन ढलने के बाद चाय पीती है और इसी के सहारे रहती है । पल्ली देवी की साल 1985 में शादी हो गई थी, लेकिन पहली बार मायके आने के बाद वह दुबारा अपने ससुराल नहीं गई ।

पल्ली देवी कहती है की शादी के बाद जैसी ही मांग में सिंदूर लगा तब से मैंने अन्न-जल को त्याग दिया और पति के घर को छोड़कर वापस आपने मायके आकर रहने लगी और अपने ईष्ट देव शिव की पूजा-आराधना में ला गई, तब से लेकर आज तक करीब 35 साल से मैंने अनाज का एक भी दाना खाने के लिए छुआ नहीं है, सिर्फ ‘लाल चाय’ पीती हु, वो भी सिर्फ शाम को पल्ली देवी कहती है की शिव का आशीर्वाद है, इसलिए आज 35 वर्षों से बिना खाना खाए और पानी पिए मैं जीवित हूँ ।

गाँव के लोगो की आस्था भी पल्ली देवी से जुडी हुई है –

‘ग्रामीणों का कहना है की जब हम लोगो को कोई परेशानी होती है तो हम लोग पल्ली देवी के पास ही जाते है, हम लोगों की आस्था का केंद्र इनसे सीधे तौर पर जुड़ चूका है ।’