एक दौर था जब ग्रामीण अपने क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग को प्रवेश करने से पहले ही भगा दिया करते थे,अब यही ग्रामीण स्वास्थ्य कर्मियों का बेसब्री से इंतजार करते हैं




सुकमा -एक समय ऐसा भी था जब सुकमा जिला का अधिकतर क्षेत्र नक्सल प्रभावित था,इन क्षेत्रों में नक्सलियों का दहशत हुआ करता था यहां बाहरी लोगो का आना जाना वर्जित था ऐसे दौर में गांवों में स्वास्थ्य अमला जब गांव वालो के इलाज के लिए जाते थे तब ग्रामीण अपने गांव में प्रवेश करने से पहले ही स्वास्थ्य विभाग की टीम को वापस लौटा देते थे. इन ग्रामीणों को स्वास्थ्य टीम से कोई वास्ता नहीं होता था क्योंकि ये सब ग्रामीण नक्सल विचाराधारा से प्रभावित थे। लेकिन समय के साथ साथ ग्रामीणों की विचारो में अब बदलाव नजर आने लगा है सुकमा जिले की तस्वीर अब बदल रही है. अब ग्रामीणों और स्वास्थ्य टीम के बीच आपसी तालमेल बनने लगे है अंदरूनी क्षेत्रों में बसे ग्रामीण और स्वास्थ्य कर्मियों के बीच विश्वास बढ़ने लगा है और ग्रामीणों का डर भी कम होने लगा है।
यही वजह है की अब अति नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के जगरगुंडा स्वास्थ्य केंद्र की टीम ने स्वास्थ्य शिविर लगाया है. इसका सकारात्मक परिणाम भी मिलने लगा है कि ग्रामीण भी अपना इलाज कराने इन शिविरों में पहुंचते हैं. जिससे ग्रामीणों को फायदा मिल रहा है.
जगरगुंडा के दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीम दे रही है दस्तक
जगरगुंडा स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आने वाले उर्सांगल,पुवर्ति, गोंदपल्ली, पोरोकाकडी,कोंडासावली , चिमलिपेंटा,जैसे दुर्गम और अति संवेदनशील क्षेत्र पहुंचकर कैम्प लगाना किसी चुनौती से कम नहीं है.इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग का पहुंचना जिले के लिए एक मिसाल है
नक्सल समस्या और अन्य समस्याओं के होने के बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग अंदरूनी क्षेत्रों में सेवा दे रही है लेकिन इनके कार्य के लिए न ही कभी इनका हौसला अफजाई किया जाता है ना ही किसी से कोई सम्मान मिलता है
चिमलिपेंटा में कार्यरत नर्स गायत्री समरथ से जब हमने बात की तो उन्होने जानकारी देते हुए बताया की पुवर्ती जाते समय काफी दिक्कतों का समाना करना पड़ा,इस दौरान हमारी टीम के लिए ये सफर काफी चुनौती पूर्ण था ट्रैक्टरों से बने रास्तों पर हम एंबुलेंस से सफर तय कर पुवर्ती पहुंचे,कई जगह रास्तों पर पेड़ गिर हुए थे उन्हें साफ करते हुए
नदी नाले के रास्तों से होकर शिविर स्थल तक पहुंचे वहीं 3 पहाड़ियों को पैदल पार कर हमारा दल स्वास्थ्य शिविर लगाने पोरोकाकड़ी गांव पहुंची थी. इन क्षेत्रों तक पहुंचने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा नक्सली समस्या भी बनी रहती है.
इन विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
चारो ओर घने जंगलों से घिरे रास्तों पर गिरे पेड़ो को अपने साथ लिए औजारों से साफ करते हुए और नदी नालों को पर करते हुए जान जोखिम में डालकर सुकमा जिले का जगरगुंडा स्वास्थ्य केंद्र का स्वास्थ्य अमला नक्सल प्रभावित उर्सांगल, पुवर्ती, गोंदपल्ली, चिमलिपेंटा, कोंडासावली, पोरोकाकडी पहुंचा. जहां पुरुष-महिलाओं और बच्चों का प्राथमिक उपचार किया गया और कोविड टीकाकरण भी किया गया. एक दौर था जब ग्रामीणों स्वास्थ्य अमला को ग्राम में प्रवेश करने से पहले ही भगा दिया करते थे लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंचकर उनके मन में बसी भ्रांतियों को दूर कर रही है. जिसका असर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के ग्रामीणों पर दिख रहा है. यही वजह है कि आदिवासी ग्रामीण टीकाकरण सहित अन्य इलाज के लिए तैयार हो रहे हैं.
शिविर के दौरान ग्रामीणों को इलाज उपरांत विटामिन ए, आयरन सिरप, कॉविड वैक्सीनेशन के साथ अन्य बीमारी का उपचार कर दवाई दी गई।
जगरगुंडा स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत 6 उप स्वास्थ्य केंद्र में एक एक हेल्थ वर्कर नियुक्त है जिसके कारण फील्ड वर्करो फील्ड में काफी समस्या हो रही है
मनोहर पोडियामी आर एच ओ व सुपरवाइजर जगरगुंडा से भी हमने बात की तो उन्होंने बताया की जगरगुंडा स्वास्थ्य केंद्र को मिलाकर कुल 6 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं सभी उप स्वास्थ्य केंद्रों में सिंगल वर्कर है अंदरूनी क्षेत्रों में अकेले जाना खतरे से खाली नही होता है इसलिए हम 6 वर्कर एक टीम बनाकर कार्य करते हैं। बाकी हर स्वास्थ्य केंद्र में दो लोग है हमारे यहां एक एक होने के कारण कार्य करने में काफी दिखते हो रही इस समस्या के बारे में मैंने बीएमओ कोंटा को लिखित आवेदन दे कर अवगत कराया है लेकिन अबतक कोई ठोस कदम उठाए नही गए हैं। जल्द से जल्द जगरगुंडा के अंतर्गत आने वाले सभी स्वास्थ्य केंद्रों मे हेल्थ वर्कर नियुक्ति करे।