अच्छा काम करने वाले के साथ बहुत से लोग लग जाते हैं

अच्छा काम करने वाले के साथ बहुत से लोग लग जाते हैं
अच्छा काम करने वाले के साथ बहुत से लोग लग जाते हैं

अच्छा काम करने वाले के साथ बहुत से लोग लग जाते हैं

मेहनत करने वाले को सब प्रेम करते हैं

गुरु आदेश का पालन लगन मेहनत से करने वाला ही ये कर सकता है


उज्जैन (म.प्र.)। निजधामवासी बाबा जयगुरुदेव के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी, नामदान देने के एकमात्र अधिकारी, अपने गुरु के मिशन को पूरा करने में दिन-रात लगे, इस वक़्त के पूरे समरथ सन्त सतगुरु, परम दयालु, त्रिकालदर्शी, दुःखहर्ता, उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त महाराज ने 3 अक्टूबर 2021 सांय उज्जैन आश्रम में दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि गुरु महाराज (बाबा जयगुरुदेव) के भंडारे का हर महीने का यह कार्यक्रम चालू हो गया है। कुछ न कुछ उस दिन जरूर बनाओ, खाओ। नहीं है तो कम से कम दो ही आदमी को खिला दो, बांट दो, बुलाकर के खिला दो। भंडारा का यह कार्यक्रम आप लोग चलाओ। गुरु महाराज उस दिन याद रहेंगे, लोग खायेंगे, बताओगे हमारे गुरु महाराज ऐसे थे। उन्होंने कृष्ण पक्ष त्रियोदशी को शरीर छोड़ा था। ये भंडारे का, गुरु महाराज का प्रसाद है। यह तो बराबर चलता रहेगा। त्रियोदशी पर कहीं भी रहूँ, समय परिस्थिति अनुकूल रहने, काल के बनाए हुए इस शरीर को बाधा नहीं रहने पर मैं सतसंग, नाम दान दे देता हूं।

मेहनत करने वाले को सब प्रेम करते हैं

महाराज ने 30 अगस्त 2021 प्रातः दईजर आश्रम जोधपुर (राजस्थान) में बताया कि मेहनत करने वाला सबको प्यारा लगता है। घर में जो बच्चा ज्यादा मेहनत करता, दौड़-धूप करता है, बाप उसी को घर का मालिक बना देता है। कहते हैं- काम प्यारा है, चाम (चमड़ी) प्यारा नहीं है। तो कोई कितना भी सुंदर सुडौल हो लेकिन घर में लड़का बैठा रहता हो, कुछ काम न करता हो, उसे कोई प्यार नहीं करता है। और मेहनती बच्चा चाहे काला कलुटा, कुरूपी हो, उसे सब प्यार करते हैं। 

अच्छा काम करने वाले के साथ बहुत से लोग लग जाते हैं

महाराज ने 8 अगस्त 2021 सायं सीकर (राजस्थान) में बताया कि ध्यान भजन की एक पूजा की जगह बन जाए और आपके ध्यान भजन की शक्ति ताकत आसपास भी फैल जाए इसीलिए आप लोग अपनी टीम बना लो। संगत को भी चलाने के लिए जगह-जगह पर टीम बना लो। एक व्यवस्था, एक रूपरेखा बना लो। एक आदमी हिम्मत करता है तो अच्छा काम करने वाले के साथ बहुत से लोग जुड़ जाते हैं, सहयोगी बन जाते हैं।

आदेश का पालन लगन मेहनत से करता है यह कर सकता है

महाराज ने 13 फरवरी 2021 प्रातः पेंड्री आश्रम, दुर्ग (छत्तीसगढ़) में बताया कि जब हम शुरू में गुरु महाराज (बाबा जयगुरुदेव) के पास पहुंचे थे तो हर काम को गुरु महाराज जी नहीं सिखाते बताते थे। वहां तो, सन्तों के पास रहना बड़ा मुश्किल होता है, तलवार की धार पर चलने की तरह से रहता है। शुरू में तो रह ही नहीं सकते थे। कोई तौर-तरीका नहीं मालूम था, समझते नहीं थे कि करना क्या है, कैसे करना है? लोगों का साथ करवाया, दया तो गुरु महाराज की ही रही, लोगों से सीखा। गुरु महाराज ने देखा कि आदेश का पालन करता है, जो इसको काम मिलता है, लगन मेहनत से करता है, यह कर सकता है तो अपने नजदीक बुला लिया। और फिर जैसे तोता को पढ़ाया जाता है, जैसे अपने बच्चे को कोई सिखाता है, प्यार से, फटकार से, किसी लायक अपने बच्चों को बनाता है, उस तरह से गुरु महाराज ने (मुझे भी) बनाया। कितनी ही बार गुरु महाराज ने डांट-फटकार लगाई। अंदर से यही इच्छा हुई कि बहुत दिक्कत परेशानी है और चलो, निकल चलो, इससे अच्छा तो समाज ही है जो छोड़ कर के आए थे, लेकिन गुरु महाराज ने छोड़ा नहीं। कहा गया है- गुरु कुम्हार शिष्य कुंभ है, गढ़ी-गढ़ी काढ़े खोट, अंतर हाथ सराय दे बाहर मारे चोट। कुम्हार घड़ा बनाता है तो घड़े को बढ़िया सुंदर सुडौल बनाने के लिए थपकी मारता है। लेकिन अंदर हाथ लगाए रहता है कि घड़ा टूट न जाए। तो समरथ गुरु भी इसी तरह से होते हैं। शिष्य को टूटने नहीं देते हैं और बढ़िया तैयार करते हैं। आज आपके सामने बोलने, कहने लायक बना, यह गुरु महाराज की दया कृपा है, हमारे अंदर कुछ भी नहीं है। अब भी गुरु महाराज की दया से ही सब काम चल रहा है। हमने तो केवल एक ही निशाना बनाया कि जो भी आदेश मिले, पूरा पालन किया जाए और उसी में कामयाबी मिली। जहां भी हम मन मुखता लाए, अपने मन के हिसाब से जहां भी किया, वहीं फेल रहे। और यही उपदेश हम लोगों को भी देते रहते हैं कि मन मुखता लाने की जरूरत नहीं है। लाभ और मान क्यों चाहे, पड़ेगा फिर तुझे देना। किसी भी चीज का लाभ, मान चाहोगे तो मान चला जाएगा। लाभ चाहोगे तो लाभ चला जाएगा। किसी भी तरह का लाभ, चाहे घर मकान धन जायदाद का हो, जिस चीज का मान सम्मान का हो तो उसको भरना, देना पड़ेगा। देखो कितना छल करके लोग पद पोस्ट ले लेते हैं, कुर्सी पर आ जाते हैं लेकिन जिस तरह से आते हैं उसी तरह का कोई दूसरा अगर तैयार हो जाता है तो उनका चला जाता है। इसलिए यह परमार्थी रास्ता है। इसमें लाभ और मान की इच्छा ही नहीं रखनी चाहिये। इसमें अपने आप लाभ तो मिलेगा ही मान भी मिलता है।