बाल विवाह के खिलाफ मशाल लेकर अलख जगाने उतरीं महिलाएं

बाल विवाह के खिलाफ मशाल लेकर अलख जगाने उतरीं महिलाएं
बाल विवाह के खिलाफ मशाल लेकर अलख जगाने उतरीं महिलाएं

भीलवाड़ा। पूरे देश में चल रहे “बाल विवाह मुक्त भारत” अभियान के तहत बाल विवाह मुक्त भारत दिवस के मौके पर नवाचार संस्थान शाखा भीलवाडा द्वारा राजस्थान के भीलवाड़ा  में 150 गांव में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया। इन कार्यक्रमों मे 15000 महिलाओं, बच्चों और आम लोगों ने शपथ ली कि वे न तो बाल विवाह का समर्थन करेंगे और न इसे बर्दाश्त करेंगे। बड़े पैमाने पर हुए इन कार्यक्रमों मे शिक्षा विभाग, महिला जनप्रतिनिधि  रेलवे विभाग, स्कूल, हॉस्टल, गांव में महिलाओं सहित लोगों ने हिस्सा लिया और इसे सफल बनाने में योगदान दिया। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- 5 (एनएचएफएस-2019-21 ) के आंकड़ों के अनुसार पूरे देश में 20 से 24 आयुवर्ग के बीच की 23.3 प्रतिशत युवतियों का विवाह 18 वर्ष की होने से पहले ही हो गया था जबकि भीलवाड़ा  में 38 प्रतिशत लड़कियों का विवाह‌ 18 वर्ष की होने से पहले हो गया था। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान देश के 300 से भी ज्यादा जिलों में चलाया जा रहा है। भारत से 2030 तक बाल विवाह के समग्र खात्मे के लक्ष्य के साथ पूरी तरह से महिलाओं के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान से देश के 160 गैर सरकारी संगठन जुड़े हुए हैं। सोलह अक्टूबर को इस अभियान के एक साल पूरे हुए। इस अर्से में पूरे देश में हजारों बाल विवाह रुकवाए गए और लाखों लोगों ने अपने गांवों और बस्तियों में बाल विवाह का चलन खत्म करने की शपथ ली। गांवों में पूरे दिन इस अभियान के समर्थन में उतरे लोगों की चहल पहल रही और इस दौरान स्कूलों में सपथ कार्यकर्म, नुक्कड़ नाटक,रेलवे स्टेशन पर रैली गांव में शहर में रैली जैसे तमाम कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सूरज ढलने के बाद हजारों लोगों ने हाथों में मशाल लेकर मार्च भी किया‌ और लोगों को जागरूक करते हुए संदेश दिया कि नए भारत में बाल विवाह की कोई जगह नहीं है। इस मार्च में स्कूली बच्चों, ग्रामीणों, धार्मिक नेताओं सहित समाज के सभी वर्गों और समुदायों के लोगों ने हिस्सा लिया। इस मार्च का मकसद गांवों और कस्बों में लोगों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूक करना‌ था। इस दौरान विवाह समारोहों में अपनी सेवाएं देने वालों जैसे कि शादियों में खाना बनाने वाले हलवाइयों, टेंट-कुर्सी लगाने वालों, फूल माला बेचने‌ व‌ सजावट करने‌ वालों,  पंडित और मौलवी जैसे पुरोहित वर्ग को जागरूक करने पर विशेष ध्यान दिया गया। बाल विवाह की पीड़ा से गुजरने के बाद अब इसके खात्मे के लिए अलख जगा रहीं भीलवाड़ा की सुमन दाधीच ने कहाबाल विवाह एक अभिशाप है और हम इसे मिलकर खत्म करेगे। नवाचार संस्थान के सचिव अरुण कुमावत ने कहा, “बाल विवाह वो अपराध है जिसने सदियों से हमारे समाज को जकड़ रखा है। लेकिन नागरिक समाज और राजस्थान सरकार द्वारा राज्य को बाल विवाह मुक्त बनाने के प्रति दिखाई गई प्रतिबद्धता और प्रयास जल्द ही  एक ऐसे माहौल और तंत्र का मार्ग प्रशस्त करेंगे जहां बच्चों के लिए ज्यादा सुरक्षित और निरापद वातावरण होगा। इन दोनों द्वारा साथ मिल कर उठाए गए कदमों और लागू किए गए कानूनों के साथ समाज व समुदाय की भागीदारी 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत सुनिश्चित करेंगी।” नवाचार संस्थान शाखा भीलवाडा की तरफ से आज के कार्यक्रम को सफल बनाने में जितेन्द्र सिंह तोमर, भगवत चारण, अल्का ओझा, सीमा पुरोहित, हिमाचल शर्मा, मीना दाधीच, लीना पारिक, रीना कुम्हार, कालू राम प्रजापत, कन्हैया लाल, कमलेश, गोपाल आदि कार्यकर्ताओ का सहयोग रहा।