तीन पीढ़ी एक साथ मनाते आरे है दिवाली - कोचर परिवार
Three generations are celebrating Diwali together Kochhar family




Three generations are celebrating Diwali together Kochhar family
(दुर्ग ) डेस्क : 40 साल से एक ही छत के नीचे मना रहे होली और दिवाली एकता की मिसाल है कोचर परिवार। हर त्योहार में होती है पकवानो में राजस्थान की ख़ुशबू आज भी चूल्हे में बनते है पकवान सेठ चम्पालाल जी कोचर सन1950 में व्यापार की दृष्टि से जोधपुर के फलोदि शहर के पास से आए थे पाटन के पास पंदर गाँव में उन्होंने अपना व्यापार चालू किया। चार बेटे और एक बेटी को पढ़ाया और व्यापार को आगे बढ़ाया समय आगे बढ़ता गया।
कोचर परिवार अपने पूरे परिवार के साथ
आधुनिक समाज में यह धारणा आम बात है कि छोटा परिवार सुखी परिवार है। लेकिन दुर्ग के कोचर परिवार के सदस्य पिछले 40 साल से एक ही छत के नीचे मना रहे दिवाली एक साथ दिवाली मानकर इस धारणा को नकारते हुए संयुक्त परिवार ख़ुशहाल परिवार के नारे को सार्थक किया तीन पीढ़ी के संयुक्त परिवार एक साथ दिवाली मानाते आ रहे है । कोचर परिवार में दिवाली का आनंद चारों ओर दिखाई पड़ता है।आधुनिकता के दौर पे अपने संस्कार को पिरोए रखा है।
सेठ चंपा लाल जी कोचर और पानी बाई कोचर
बच्चों को मिलता है संस्कार :-
कोचर परिवार की बहु भावना कोचर का कहना है एकल परिवार में सुख और संस्कार तलाशना बेमानी सा लगने लगा है। संस्कार तो बचपन से बुजुर्गों से दादा - दादी से मिलती है ।लेकिन एकल परिवार में बजुर्गे ही नज़र नही आ रहे है । फिर समाज में कैसे संस्कार का बीजारोपन कर सकते है । संस्कार ना होने पर सदस्य कर्तव्य से ज़्यादा अधिकार पर ध्यान देने लगता है और यही से विघटन की नीव पड़नी शुरू हो जाति है यदि फ़र्ज़ से सदस्य परिवार पर संस्कार का रोपन करे तो संयुक्त परिवार में आनंद ही आनंद है।
परिवार के 2 पुत्र राहुल और योगेश ले चुके है नेत्र दान का संकल्प ।।।।
साथ रहे , काम बाट कर करे:- मेघराज जी कोचर
72 वर्षीय मेघराज जी का कहना है साथ में रहकर मिलजुल रहो , काम बाट कर करो परिवार के सदस्यों का दर्द चेहरे से पढ़े । बिना बोले सहायता करो एक - दूसरे के सहायता के लिए तत्पर रहो , परिवार में कलह को जगह नही मिलेगी । समझदारी से परिवार मे भूमिका निभाए तो ऐकल परिवार की ओर बढ़ते कदम रुकने लग जाएँगे । संयुक्त परिवार सबके हित में होते है साँस - ससुर , देवरानी - जेठानी , ननद - भाभी , पिता - चाचा के संयुक्त परिवार के अभाव में रिश्तों में महक नही आ पाएगी , संयुक्त परिवार में बच्चों का लालन पालन और विकास अच्छे से होता है ।
परिवार की बहूए भावना, मंजु, अंजु , ज्योति और माला ये धार्मिक और गृहस्थी से परिवार के सभी मोतियों को एक धागे से पिरो रही व्यापार को आगे बढ़ाया समय आगे बढ़ता गया और धीरेधीरे सब बड़े हुए सबकी शादी हो गई। मेघराज, भोमराज़, ताराचंद, पारसमल ये चार पुत्र है व्यापार में है सभी भाइयों के 2 पुत्र 2 पुत्री है गाँव कि मिशाल है जब भी ये पूरा परिवार गाँव पहुँचता ख़ुशियों से झूम उठता है परिवार महावीर, राहुल , ज्ञानचंद, ऋषभ, विजय, दिलीप, ज्ञानचंद, लक्ष्मी, योगेश ये पोते है चंपालाल जी के।