ईट कोई भी किसी भी के नाम पर बना हो लेकिन घर के दीवार में ढक ही जाता है, वैसे ही सत्य व असत्य की स्वरूप है. पढ़े जरूर..
The brick may be made in the name of any one, but it gets covered in the wall of the house, so is the nature of truth and untruth. Must read..




NBL, 17/04/2022, Lokeshwer Prasad Verma,.Raipur CG: The brick may be made in the name of any one, but it gets covered in the wall of the house, so is the nature of truth and untruth. Must read.
ईट कोई भी किसी भी के नाम पर बना हो लेकिन घर के दीवार में ढक ही जाता है, वैसे ही सत्य व असत्य की स्वरूप है. पढ़े विस्तार से...।
सदियों से देश विदेश में इतिहास बनता है और बिगड़ भी जाता है, लेकिन इतिहास हम मनुष्य के लिए बहुत कुछ छोड़ जाते है, धर्म, कर्म और मर्म यही इतिहास के पन्नों मे सत्य का दर्शन करने को मिलता है, और असत्य का भी दर्शन करने को मिलता हैं। इन्ही सत्य व असत्य के चंगुल में दुनिया के लोग फसे हुए हैं, मै अपने धर्म के लिए अच्छा किया भले ही वह दूसरे के धर्म को नुकशान पहुचाये लेकिन वह अपने आप को सत्य मानते हैं, लेकिन सत्य से कोसों दूर रहते हैं, बस यही उनके मन की भ्रम है।
धर्म के मर्म को सही तरीके से हम समझ ही नही पाते अगर कोई हमे धर्म का ज्ञान देते है वह भी सही ज्ञान नही होते उस धर्म की सार्थकता को न बताकर अन्य उदाहरण देते हुए धर्म ज्ञान को ही उलझा देते हैं। उन्हीं उलझन के कारण हम मनुष्य भटक रहे हैं।
जितने भी विश्व में धर्म है, वह सभी धर्म सत्य है, लेकिन धर्म के प्रचार व प्रसार करने वाले विद्ववान हम सामान्य ज्ञान रखने वाले लोगो को उलझा कर रख देते है, वह ज्ञान हमे सही नही देते धर्म के सत्य ज्ञान मानव हितकर होती है, और सर्व मानव कल्याण की बात सिखाती है धर्म, लेकिन धर्म उपदेशक अपने ही सत्य धर्म के अंदर असत्य रूपी मायाजाल रचकर अपने लिए खुद एक रोजगार व व्यापार पैदा करने के लिए सत्य धर्म में असत्य रूपी ईट अपने नाम व ज्ञान से तैयार कर लेते हैं। और एक ही अधर्म ज्ञानी सारे धर्म अनुयायी को उलझा कर रख देते है और सत्य धर्म ज्ञान नही होने के कारण एक धर्म अनुयायी दूसरे धर्म अनुयायी के लोगों से आपस में लड़ते भिड़ते व झगड़े रहते हैं।
अब धीरे- धीरे सत्य धर्म की पतन होते जा रहे हैं, पूरे विश्व में हम मनुष्य बस एक धर्म के लोग बन कर रह गए हैं, लेकिन धर्म की सत्यता से कोसो दूर होने के कारण अब धर्म उत्तसव बन कर रह गए है। और हम मनुष्य अपने ही धर्म के सत्य को न मानकर दूसरे के धर्म को महान समझकर अपना लेते हैं, या अपने ही धर्म के ईश्वर का होने या ना होने की संदेह मे लग जाते है। यही सबसे बड़ी भूल है हम मनुष्यो की। आज नानाप्रकार के नाम की धर्म है उस ईट की तरह लेकिन सत्य नाम के दीवार मे ढक जाते है, आपके सत्य रूपी धर्म को नही समझने के कारण। इसलिए अपना गुरु आप खुद बने और अपने धर्म की सत्य को पढ़े और उसे तन और मन से अपनाऐ तो ही आप शांति को प्राप्त होंगे नही तो आपस मे लड़ते झगड़ते रहेंगे। बहुत से धर्म अनुयायी अपने धर्म ग्रंथ से कोसो दूर है वह कभी खोलकर पढ़ा ही नही होगा। बस धर्म उत्तसव मे चिल्लाते चिखते रहते हैं।