CG ब्रेकिंग: मौत के बाद भूले परिजन.... अस्थियों को कलश से मुक्ति का इंतजार.... मोक्ष के इंतजार में महीनों गुजर गये…. कोरोना से गुजरे सैंकड़ों बदनसीबों की अस्थियां आज भी श्मशान घाटों में कर रही अपनों का इंतजार….

CG ब्रेकिंग: मौत के बाद भूले परिजन.... अस्थियों को कलश से मुक्ति का इंतजार.... मोक्ष के इंतजार में महीनों गुजर गये…. कोरोना से गुजरे सैंकड़ों बदनसीबों की अस्थियां आज भी श्मशान घाटों में कर रही अपनों का इंतजार….

रायपुर। विसर्जन हेतु अस्थियां अपनो की राह तक रही है। मृतको के परिजन महीनो बाद भी अस्थि लेने शमशान नही पहुँचे। कोरोना संक्रमण की चपेट में आए सैकड़ों लोगों की अस्थियां महीनों से राजधानी के श्मशान घाटों के लॉकरों में बंद हैं और कलश से मुक्ति का इंतजार कर रही है। कोरोना संक्रमण के चलते हजारों लोगों की मृत्यु हुई। इसमें ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिनके परिजन डर के चलते सामने नहीं आए और जिला प्रशासन नगर निगम ने उनका अंतिम संस्कार किया। कई अज्ञात शवों का भी स्वयंसेवी संगठनों ने अंतिम संस्कार किया।

 

मगर अस्थियों को विसर्जित नहीं किया गया। सैकड़ों लोगों की अस्थियां पांच महीने से श्मशान घाट के लंबे इंतजार के बाद अब यह लॉकरों में कैद है। कांग्रेस नेता ने कलेक्टर से लावारिस अस्थियों के विर्सजन की अनुमति मांगी है। कांग्रेस नेता विनोद तिवारी ने ऐसे 400 से अधिक अस्थि कलश की जानकारी देते हुए बुधवारको रायपुर कलेक्टर सौरभ कुमार से ज्ञापन सौंपकर विसर्जन की अनुमति मांगी है। विनोद तिवारी ने बताया कि जिला प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद 26 जून शनिवार को महादेव घाट में प्राप्त अस्थियों को हिंदू परंपराओं और पूर्ण विधि विधान से विसर्जित कर अंतिम विदाई दिया जाना प्रस्तावित किया गया है। इस कार्यक्रम में कोई परिजन शामिल होना चाहे तो वह भी सम्मिलित हो सकता है।

 

अस्थि विसर्जन की मांग पर कलेक्टर सौरभ कुमार ने कहा कि क़ानूनी प्रक्रिया पूरी कर अनुमति दी जा सकती है। इसके लिए एसडीएम को आगे की कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया है। अस्थि कलश को लेकर सात दिवस की नोटिस जारी की जाएगी। इसके बाद ही अनुमति प्रदान की जाएगी। विनोद तिवारी ने बताया कि हिंदू परंपरा के मुताबिक तीसरे दिन ही अस्थियां चुनकर किसी पवित्र नदी में विसर्जित किया जाता है। लंबे इंतजार के बाद अब यह उम्मीद नहीं है कि मृतकों के परिजन अस्थियों को लेने आएंगे।ऐसे में एक सामाजिक दायित्व है। मृतकों की अस्थियों को हिंदू परंपराओं और पूर्ण विधि विधान से आखिरी विदाई दें। 26 जून को महादेवघाट पे हिंदू रीति रिवाज से अस्थियों का विसर्जन होगा।