बिल्ली वाली कहानी से समझाया कि टेकी नहीं बनना चाहिए - बाबा उमाकान्त महाराज




बिल्ली वाली कहानी से समझाया कि टेकी नहीं बनना चाहिए - बाबा उमाकान्त महाराज
झूठ को सच करने वाले अपनी टीम बना लेते हैं
उज्जैन (म.प्र.) : समाज की कुरीतियों को दूर करने वाले भारत के महान समाज सुधारक, सब बात सरलता से समझा देने वाले, सतयुग आगमन की घोषणा करने वाले, ध्वन्यात्मक पांच नाम बताने वाले, पूरे समरथ सन्त सतगुरु, त्रिकालदर्शी, दुःखहर्ता, उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त महाराज ने 19 मई 2020 सांय उज्जैन आश्रम में दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि टेकी किसको कहते हैं? बाप जिसकी पूजा करते रहे, उन्हीं की पूजा हमको करनी है। हमारे खानदान के लोग जो देवी के सामने बकरा चढ़ाते थे तो हमको भी बकरा चढ़ाना है। हमको भी वही करना है। इसको कहते हैं टेक। एक औरत बिल्ली पाले हुए थे। बिल्ली बार-बार दौड़ करके उसके पास आ जाती थी। कहते हैं बिल्ली रास्ता काटती है तो अशुभ होता है। इन जानवरों को आगे की जानकारी हो जाती है। सांप बिल्ली अगर रास्ता काट दे तो रुक जाना चाहिए। कौवा सुबह दरवाजे पर आकर बैठ करके कांव-कांव करके बता करके चला जाता है कि आज आपके यहां मेहमान आएंगे। अभी गांव में कौवा सुबह कांव-कांव बोलता है तो औरतें समझ जाती है कि कोई मेहमान आयेगा, दूध, घी, साग-सब्जी बचा करके रखती है, पता नहीं कब आ जाए, तो अंदाजा हो जाता है। जब किसी के बीमारी है और मरने का समय आता है तो वो पक्षी सुबह-सुबह बोलता है तब लोग समझ आते हैं कि अब ये बचेगा नहीं। ऐसे ही इनको (जानवरों को) जानकारी हो जाती है। जब उसके यहां शादी तय हुई। तो बार-बार बिल्ली आ जाए। तब उसने क्या किया? जब भी शादी में कुछ भी शुभ काम करने को हो, तब बिल्ली को डलिया से ढक दें। कार्य समाप्ति पर डलिया हटा दे और फिर बिल्ली घूमने लग जाए। तो (कालान्तर में) बिल्ली भी मर गई, सास भी मर गई। अब पोते की शादी का समय आया, शुभ काम करने को हुआ तब पुत्रवधू बोली, बिल्ली ढको। पूछे क्यों? बोली सासू मां शुभ काम के समय करती थी तो करो। बिल्ली तो मिली नहीं तो बोली शादी भी नहीं हो सकती। तो विद्वानों से पूछा। जब पॉवर को अपने हाथ में ले लेते हैं तब देश को बनाने और बिगाड़ने वाले यही विद्वान पंडित मुल्ला पुजारी। जब न जानकारी होते हुए भी अपना स्वार्थ सिद्ध करने लग जाते हैं तब धर्म मानवता खत्म हो जाती है। और जब ये अपना फर्ज काम करते हैं, लोगों को (सही चीज) बताने लगते हैं तब देश बन जाता है, लोगों की भौतिक व आध्यात्मिक तरक्की हो जाती है। तो विद्वानों के पास गए। उन्होंने सोचा शादी नहीं तो दक्षिणा नहीं मिलेगी। तो कहा चांदी की बिल्ली बना लो, उसे ढक दो फिर उसे दान दे देना। चित भी अपनी पट्ट भी अपनी। तो लोग टेकी बन जाते हैं। टेकी नहीं बनना चाहिए।
वर्णनात्मक नाम से शब्द की डोर पकड़ में नहीं आती है
महाराज ने 12 नवंबर 2020 दोपहर उज्जैन आश्रम में बताया कि माया के लोक में जो आते हैं, मां के पेट में बन करके पैदा होते हैं और अच्छा काम करते हैं जिनको महापुरुष कहा जाता है, वह जिस नाम को मान्यता दे देते हैं, वह वर्णनात्मक नाम होता है। फायदा उससे भी होता है, तकलीफों में आराम उससे भी मिलता है लेकिन जीवात्मा का कल्याण नहीं होता है। जीवात्मा को शब्द की डोर उस नाम से पकड़ में नहीं आती है। गुरु पीछे भी रहे, गुरु अब भी मौजूद हैं और आगे भी रहेंगे, सतयुग में भी, हर युग में गुरु रहे हैं। तो यह जयगुरुदेव नाम गुरु महाराज ने जगाया है। इसीलिए यह नाम आगे और पीछे नामों के जोड़ दिया उन्होंने कि गुरु मददगार रहे हैं। कलयुग में गुरु मददगार नहीं होंगे तो आगे बढ़ पाना बहुत मुश्किल है। इसलिए यह वर्णनात्मक नाम में भी उन्होंने जान भर दिया। यही कारण है कि मुसीबत तकलीफ में बहुत से लोगों को जयगुरुदेव नाम बोलने से फायदा होता है। जयगुरुदेव नाम की ध्वनि जिस घर में बराबर सुबह शाम दो घंटा होती है, बीमारियों में राहत मिलती है। भूत प्रेत भी अपनी छाया, अपना प्रकोप कम कर देते हैं, राहत मिल जाती है, धन में बरकत दिखाई पड़ती है, बच्चे भी जब बोलते हैं तो बिगड़े हुए बच्चे औरतें आदमी सुधरने लगते हैं। तो यह सब फायदा तो जयगुरुदेव नाम से भी होता है लेकिन आत्मा का कल्याण जिससे होगा, जन्म मरण से छुटकारा जिससे होगा वह नाम है ध्वन्यात्मक नाम, तो वह पांच नाम है।
झूठ को सच करने वाले अपनी टीम बना लेते हैं
महाराज ने 18 फरवरी 2023 प्रातः प्रयागराज में बताया कि राजा ने झूठ बोलने वाले से कहा, अच्छा तू झूठ बोल। तब उसने कहा सरकार राजस्थान में ऊंट जा रहे थे, पानी बरसा, सब ऊंट जलकर मर गए। लोगों ने कहा असंभव। पानी तो आग को बुझाता है। तो झूठ बोलने वाले के साथ में जो था, उससे कहा तू इस बात को सच कर सकता है? बोला अरे सरकार पूरे 16 आना सच है। कैसे? बोला- ऊंट के ऊपर चूना लदा हुआ था। पानी बरसा, चूना गर्म हुआ, उसी गर्मी से ऊंट सब जलकर मर गए। ऐसे झूठ को सच करने वाले टीम बना लेते हैं। तो प्रेमियों आप भी अच्छा काम करने वाले अपनी टीम बनाओ।