चुनाव आते ही देश के कुछ राज्यों के किसान केंद्र सरकार को घेरने और झुकाने के लिए आधारहीन आंदोलन करने लगते हैं। लेकिन क्यों?
As soon as the elections come




NBL, 18/02/2024, Lokeshwar Prasad Verma Raipur CG: As soon as the elections come, farmers of some states of the country start carrying out baseless movements to corner and subdue the central government. But why? पढ़े विस्तार से...
चुनाव नजदीक आते ही पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के ज्यादातर किसान सक्रिय हो जाते हैं, खासकर बीजेपी राज में क्योंकि बीजेपी राज में देश और प्रदेश के किसानों के हित में काफी अच्छे काम हुए हैं. देश के किसानों के हित में भविष्य में और भी बेहतर काम किया जाएगा, यह गारंटी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा देश के किसानों को देते हैं। यह बात देश के विपक्षी दलों के नेताओं को आहत करती है और देश के कुछ किसान नेताओं को भी आहत करती है।
नरेंद्र मोदी सरकार की किसान हित गारंटी से इनकी दुकानदारी कहीं बंद न हो जाए, पिछली कांग्रेस सरकार कभी भी देश के किसानों को कोई खास लाभ नहीं दिला सकी, जबकि स्वामीनाथन एमएसपी कमीशन किसान बिल 2004/2014 तक कांग्रेस के राज में बना है जो ये आज के आंदोलनकारी किसान और किसान नेता हैं कांग्रेस से हैं. यही किसान नेता अपनी बात रखने में असफल रहे और कांग्रेस इन किसानों के सामने कभी भी नहीं झुकी। पंजाब के किसान कांग्रेस की कट्टरता को अच्छी तरह समझते हैं, जो पंजाब के सिख समुदाय के लोगों की कट्टर दुश्मन थी इतिहास गवाह है। आज बीजेपी पीएम नरेंद्र मोदी के एक बार झुकने का फायदा उठाना चाहती है. देश के कुछ किसान और किसान नेता जो आज अराजकता को बढ़ावा दे रहे हैं।
सोशल मीडिया के जमाने में कोई भी अपनी अराजकता छुपाकर नहीं रख सकता, वह कहीं न कहीं से देश के सामने आ ही जाती है, उसी तरह आज के किसान आंदोलन में इन किसानों के बीच खड़े लोगों के हाथों में तलवारें हैं और कुछ लोगों ने हाथों में पन्नी से पत्थर ले जाकर किसानों के बीच पत्थर ले जाए जा रहे हैं और सुरक्षा बल पुलिस पर फेंके जा रहे हैं और सुरक्षा बल पुलिस अपने बचाव के लिए आंदोलनकारी किसानों को रोकने के लिए आंसू गैस और रबर की गोलियों का इस्तेमाल कर रही है. लेकिन बल का पहला प्रयोग आंदोलनरत किसानों ने ही किया है, मानों दो पक्षों के बीच युद्ध हो रहा हो और दोनों पक्षों को नुकसान हो रहा है, जबकि देश में जय जवान जय किसान के नारे लगाई जाती है, क्योंकि देश इन दोनों के कंधों पर टिका है।
ये दोनों ही देश को मजबूत बने रहने का साहस देते हैं। जबकि देश का लोकतंत्र कई अन्य लोगों के सहयोग से और देश के कई अन्य संसाधनों से देश विकसित होती है, देश के अन्नदाता किसानों से और सैनिकों की देशभक्ति देश की रक्षा करने की प्रधानता महत्वपूर्ण है। देश के किसानों को न्याय मिलना चाहिए उनके जीवन स्तर में सुधार होनी चाहिए, सम्पूर्ण देश चाहते है, लेकिन आज जिस रूप में किसान आंदोलन हो रही है वह राजनीति का हिस्सा बन कर लड़ाई लड़ रहे हैं जो संपूर्ण राष्ट्र के किसानों के सम्मान को ठेस पहुचायी जा रही है।
जिस तरह से अचानक चुनाव नजदीक आते ही देश के कुछ राज्यों के किसानों के द्वारा आंदोलन की जा रही है, इस विषय को लेकर देश में तरह तरह की चर्चाऐ की जा रही है, देश के बहुत से लोग यह कह रहे हैं कि यह विपक्षी दलों के द्वारा रचित किसान आंदोलन है जो देश में पीएम नरेंद्र मोदी के बढ़ती ग्राफ को गिराने की साजिस चल रही है , आने वाले लोकसभा में अपने पक्ष में देश के लोकतंत्र को लाने के लिए जद्दोजहद चल रहा है, क्योंकि एक बार बीजेपी पीएम नरेंद्र मोदी देश के किसानों के सामने झुक कर अपने बनाए किसान हित कानून को लागू करने में असफल रहे और इन्ही कुछ राजनीति करने वाले किसान नेता व किसानों के सामने पीएम नरेंद्र मोदी सरकार झुकी लेकिन विपक्षी दलों के नेताओं को कोई खास फायदा नही हुआ चुनाव नतीजे से और यही हाल अभी आने वाले लोकसभा चुनाव में होगा विपक्षी दलों के साथ और फिर दोबारा प्रचण्ड बहुमत के साथ बीजेपी नरेंद्र मोदी फिर से देश में अपनी सरकार बनायेगी और पुनः तीसरी बार देश का प्रधानमंत्री बनेंगे
विपक्षी दलों के राजनीति से प्रेरित आजके किसान आंदोलन अपने आप सभी अपने घर की ओर चले जायेंगे इसलिए आज ही इन आंदोलनकारी किसानों को अपने घर पर जाकर अपने परिवार के साथ रहकर खेती बाड़ी करना चाहिए,विपक्षी दलों के राजनीति के साथ मिले हुए किसान नेता को कुछ आर्थिक फायदा मिल सकता हैं, लेकिन आप भोले भाले किसान अपने आप को क्यों संकट में डाल रहे है, क्योंकि कुछ दिनों के बाद देश में लोकसभा चुनाव होने वाला है और चुनाव आयोग अपना शासन लागू कर देगा और बीजेपी नरेंद्र मोदी की सरकारी ताकत खत्म हो जायेगा और बीजेपी के सभी संगठन चुनाव में व्यस्त हो जायेंगे जब चुनाव के नतीजे आएँगे और जिस भी किसी दल के पक्ष में जनाधार आयेगी वह अपना सरकार बनाएंगे। अभी किसानों का आंदोलन करना राजनीतिक है और बीजेपी नरेंद्र मोदी के साथ सीधी लड़ाई है उनके मत प्रतिशत गिराने की सोची समझी साजिश है, जो राम को लाए है उनको हम लायेंगे वालो के दिल से बीजेपी नरेंद्र मोदी को कैसे हटा पाएंगे इतना कमजोर नही है नरेंद्र मोदी जो आप राजनीतिक किसान आंदोलन के ब्यार में बह जायेगा मिट जाएगा देश के लोकतंत्र सब समझती है, आजके सनातन धर्म संस्कृति के दमदार नेता बीजेपी नरेंद्र मोदी है।
यदि सरकार किसानों के हित में एमएसपी को 50 प्रतिशत तक बढ़ा देती है तो भारत का विकास रुक जाएगा और भारत की आर्थिक वृद्धि में भारी गिरावट आएगी, इसीलिए भारत सरकार एमएसपी 50 नहीं लाना चाहती है, इसलिए सरकार झुकती है किसानों के सामने मौजूदा सरकार थोड़ा एमएसपी में बदलाव लाकर देश के किसानों को राहत देने की कोशिश करती है और वो भी पिछली कांग्रेस सरकार किसानों के हित में इतना अच्छा नहीं कर पाई, जितना मौजूदा सरकार कर पा रही है जिससे देश के किसानों की स्थिति में कुछ सुधार हो रहा है।
किसानों के हित में पूर्ण एमएसपी 50 तुरंत नहीं लाया जा सकता, चाहे सरकार किसी की भी हो। सरकार किसानों के हित में स्वामीनाथन एमएसपी 50 बिल में बदलाव कर इसे देश के किसानों के हित में बेहतर बना सकती है, लेकिन स्वामीनाथन किसान बिल को पूर्ण रूप से ताकत कोई भी सरकार नही दे सकता और आंदोलन कारी किसानों को भी पता है, इस किसान बिल का पूर्ण सत्यता। जबकि वर्तमान सरकार स्वामीनाथन किसान बिल एम एस पी के नियमो से कही ज्यादा दे रहा है कुछ फसलों में आमदनी किसानों को।
आज यह किसान आंदोलन विपक्षी दलों के साथ किसान नेता मिलकर इन दोनों की सोची समझी साजिश है, यह बेबुनियाद है और विषय पर देश के सर्वोच्च न्यायालय को अपनी संज्ञान में लेना चाहिए, क्योंकि इस बेबुनियाद किसान आंदोलन से निर्दोष किसान भाई-बहनों के साथ-साथ देश की सुरक्षा फोर्स को भी हो सकता है जान-माल को खतरा, किसानों की आड़ में आतंकी संगठन शामिल होकर इस किसान आंदोलन पर हमला कर सकते हैं. वर्तमान सरकार को कलंकित करने की साजिश चल रही है और यह पूरी तरह से राजनीतिक है. क्या किसान नेता जान-माल की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेंगे? आंदोलन में शामिल किसान भाई-बहनों को आंदोलन से होने वाले नुकसान की गारंटी किसान नेताओं से मिलनी चाहिए। जिस तरह पीएम नरेंद्र मोदी सरकार से गारंटी मांग रहे हैं, वैसी ही गारंटी किसानों को भी दी जानी चाहिए. किसान नेताओं को अच्छे और बुरे नतीजों की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए क्योंकि उन्हें भड़काने से कोई अच्छा नतीजा नहीं निकलेगा।