अद्भुत है ये छत्तीसगढ़ का 500 साल पुराना मंदिर, जलाभिषेक के बाद जल पीने से छूमंतर हो जाते हैं रोग, जानिए पीछे की रहस्यमय कहानी....
हिन्दू धर्म में सावन के महीनें को सबसे महत्वपूर्ण और पावन महीना माना जाता है। जांजगीर क्षेत्र के पीथमपुर स्थित बाबा कलेश्वर नाथ के दर्शन के लिए सावन सोमवार में भक्त उमड़ पड़े। भगवान कलेश्वरनाथ के दर्शन की बड़ी मान्यता है। यही वजह से दूर-दूर से दर्शन करने लोग आते हैं।




जांजगीर चांपा। हिन्दू धर्म में सावन के महीनें को सबसे महत्वपूर्ण और पावन महीना माना जाता है। जांजगीर क्षेत्र के पीथमपुर स्थित बाबा कलेश्वर नाथ के दर्शन के लिए सावन सोमवार में भक्त उमड़ पड़े। भगवान कलेश्वरनाथ के दर्शन की बड़ी मान्यता है। यही वजह से दूर-दूर से दर्शन करने लोग आते हैं। संतान प्राप्ति को लेकर भी इस मंदिर के प्रति भक्तो की बड़ी आस्था है।
5 सौ साल पुराने बाबा कलेश्वर नाथ मंदिर में नागा साधु भी पहुंचे हैं और लोग उनके दर्शन के लिए भी मंदिर आते हैं। श्रद्धालु शिव मंदिर में पूजा कर अपने अपने घर परिवार की मंगल कामना की मांग कर रहे हैं। बाबा कलेश्वर नाथ मंदिर के शिवलिंग की जलहरी के जल का विशेष महत्व है। इसे पीने मात्र से पेटदर्द और बांझपन से मुक्ति मिलती है। यहां हर साल रंगपंचमी पर 15 दिनों का मेला लगता है और भगवान शिव की बारात निकलती है। यहां देश भर से नागा साधु पहुंचते हैं। सावन सोमवार में भी भक्तों की काफी भीड़ रहती है।
नवागढ़ ब्लाक के ग्राम पंचायत पीथमपुर के हसदेव नदी के तट पर स्थित कलेश्वरनाथ मंदिर में धूल पंचमी पर निकलने वाली कलेश्वरनाथ की बारात के लिए मंदिर को भव्य रुप से सजाया जाता है। धूल पंचमी के दिन विशेष पूजा अर्चना के बाद बारात निकाली जाती है। बारात में शामिल होने नेपाल, हरिद्वार, बनारस, अमरकंटक सहित देश के कई स्थानों से विभिन्न अखाड़ों के सौ से अधिक नागा साधु पहुंचते हैं। रंग पंचमी पर कलेश्वरनाथ की बारात निकालने की परंपरा लंबे समय से चल रही है। हर वर्ष यहां जिले सहित प्रदेश भर के श्रद्घालु बाबा कलेश्वर नाथ की बारात में शामिल होकर पूजा अर्चना कर उनकी पालकी उठाते हैं। कलेश्वरनाथ की विशेष पूजा अर्चना के बाद चांदी की पालकी में नागा साधुओं की अगुवाई में बारात निकाली जाती है। इस दौरान नागा साधुओं द्वारा शौर्य प्रदर्शन किया जाता है। यहां मेला भ्रमण के बाद साधु संत हसदेव नदी में शाही स्नान कर बाबा कलेश्वर नाथ की पूजा अर्चना करते हैं।