बाबा शेवाराम साहब की 38वीं वर्सी उत्सव सम्पन्न

बाबा शेवाराम साहब की 38वीं वर्सी उत्सव सम्पन्न
बाबा शेवाराम साहब की 38वीं वर्सी उत्सव सम्पन्न

भीलवाड़ा। बाबा शेवाराम साहब की 38वीं वर्सी उत्सव के साथ संयोगवश महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन के महामंडलेश्वर बनने की छठी वर्षगांठ भी हरी शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर भीलवाड़ा में शेवा सुमिरन कर उत्साह एवं उमंग के साथ मनाई गई। महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने सत्संग प्रवचन की श्रंखला में जगद्गुरु श्री श्रीचंद्र महाराज एवं अपने सद्गुरुओ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह सब सद्गुरु के प्रताप का प्रभाव ही है कि हरी शेवा उदासीन आश्रम सनातन मन्दिर से नित्य प्रति शेवा सुमिरन किया जा रहा है। उन्होंने अपने प्रवचन में याद रख याद रख बंदा तू गीत हरि जा गाईदे अर्थात यदि तुम हरि का भजन नहीं करोगे तो यम की मार पड़ेगी और बाबा हरिराम तूहिजा  बचड़ा आहियू आदि गीत प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि भक्ति में अहंकार का भाव कभी नहीं आना चाहिए क्योंकि अहंकार आते ही भक्ति एवं सेवा का भाव समाप्त हो जाता है। बाबा शेवाराम साहब ने अपने जीवन काल में अनेक भजन एवं गीतों की स्वयं रचना की एवं अपनी मधुर वाणी में उन्हें प्रस्तुत भी किया। उन्होंने अपने सभी वचनों में स्वयं को *दास शेवो* कह कर ही बताया था। यह भी उनका अपने गुरुओं के प्रति समर्पण को प्रकट करता है। उन्होंने यह भी बताया कि बाबा हरिराम साहब के दो प्रमुख शिष्य रहे बाबा हिरदाराम साहब एवं बाबा शेवाराम साहब। वे सदेैव अपने गुरु बाबा हरिराम साहब की आज्ञा में रहे व कभी भी उनके समक्ष बराबरी में नहीं बैठे। वे सदैव उनके चरणों में ही विराजते थे एवं उनकी दृष्टि भी अपने गुरु बाबा हरिराम साहब के चरणों पर ही केंद्रित रहती थी। बाबा शेवाराम साहब के सेवा संकल्प को देखते हुए बाबा हरिराम साहब ने उन्हें अपने जीवन के अंतिम समय में गुरु गद्दी प्रदान कर दी थी। विभाजन के उपरांत बाबाजी ने भीलवाड़ा को भाग्यशाली बताते हुए यहां हरी शेवा उदासीन आश्रम की स्थापना तथा हरी मंदिर की स्थापना की। वे स्वयं अपने खेतों में हल चलाकर कृषि कार्य करते थे। उन्होंने ही हरी शेवा सनातन मंदिर में समाधि साहब, ध्वजा  साहब, धूणा साहब आदि की स्थापना की और अनेक सेवा कार्य प्रारंभ किए जो आज भी अनवरत जारी है। महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन के सान्निध्य में संत मयाराम, संत राजाराम, संत गोविंदराम एवं श्रद्धालुओं ने आश्रम में प्रातः क़ालीन सत्र में श्री हरि सिद्धेश्वर मंदिर में अभिषेक, गुरुजनों की समाधियों पर पूजन, साँयक़ालीन सत्र में सतगुरुओ की स्तुति में भजन, सत्संग, प्रवचन, श्री मात्रा साहब पाठ हनुमान चालीसा पाठ आरती साहेब किये। तत्पश्चात प्रसाद वितरण किया गया।  प्रातः काल में निराश्रितों के लिए पुलाव, हलवा व फल प्रसाद का वितरण किया गया। साथ ही गौ वंश के लिए चारा व प्रसाद भी दिया गया। पुष्कर शांतानंद उदासीन आश्रम के महंत हनुमानराम उदासीन  एवं गोविंद धाम भीलवाड़ा के संत किशनदास ने भजन बाबा शेवाराम जी हर गाल पई याद अचे गाते हुए उनके संस्कार शिक्षाओं के बारे में भक्तों को बताकर गुणगान किया। इस अवसर पर हरी शेवा संस्थान के ट्रस्टी पदाधिकारियों के अलावा सूरत से गौरी शंकर आहूजा, गणेश आहूजा, अहमदाबाद से महक लोकेश परवानी, जोधपुर से टहल्यानी परिवार, अजमेर से  दौलतानी परिवार, प्रकाश मूलचंदानी, महेंद्र तीर्थाणी, अमेरिका से लक्ष्मी खटवानी,  हरीश खटवानी, पदमा रोमा नौतानी, वच्छानी परिवार सहित हंसगंगा हरीशेवा भक्त मंडल एवं भीलवाड़ा के अननुयायीगण सम्मिलित हुए।