सन्त महात्मा लोगों को दु:खी देखते हैं तो उनकी न्याय, सुरक्षा, रोजी-रोटी की जरूरत की पूर्ति के लिए निकल पड़ते हैं...




सन्त महात्मा लोगों को दु:खी देखते हैं तो उनकी न्याय, सुरक्षा, रोजी-रोटी की जरूरत की पूर्ति के लिए निकल पड़ते हैं
भारत को उन्नति के शिखर पर ले जाना है तो सभी लोकतंत्र सेनानियों को होना पड़ेगा एकजुट
करनाल (हरियाणा)। निजधामवासी बाबा जयगुरुदेव के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी, सोलह आने सच्चे देशभक्त, देश की प्रगति के लिए निरंतर सोचने और करने वाले, गुरु आदेश में सतत लगने वाले, जीवों के कर्मों की गन्दगी को साफ़ करा कर मुक्ति मोक्ष दिलाने वाले, इस समय के महापुरुष, पूरे समरथ सन्त सतगुरु, परम दयालु, त्रिकालदर्शी, दुःखहर्ता, लोकतंत्र सेनानी, उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त महाराज ने 18 जून 2023 प्रातः करनाल (हरियाणा) में दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि समय-समय पर महापुरुषों ने नाम को जगाया। त्रेता में राम भगवान ने राम नाम को, द्वापर में कृष्ण भगवान ने कृष्ण नाम को जगाया। कलयुग में सत साहब नाम कबीर साहब ने, वाहे गुरु नानक जी ने और राधास्वामी नाम शिवदयाल जी ने जगाया। इसी तरह से गुरु महाराज ने जयगुरुदेव नाम जगाया जिसका प्रचार करने के लिए, गुरु महाराज के आदेश का पालन करने में, मैं लगा हुआ हूं।
गुरु महराज, मैं और सभी लोकतन्त्र सेनानी देश के लिए जेल गए थे
पुणे में कुछ दिन पहले कार्यक्रम हुआ था। वहां मैं गया। पूर्व वक्ता ने कहा कि लड़के कहते हैं कि मैं बताने में शर्म महसूस करता है कि हमारे पिताजी लोकतंत्र सेनानी हैं, जेल गए थे। क्योंकि लोकतंत्र के बारे में लोगों को मालूम ही नहीं है। हमारे प्रेमियों ने सोचा कि सम्मान समारोह आयोजित किया जाए और इनको कुछ इस तरह की चीज दिया जाए कि उनके घर वाले भी समझें, वास्तव में किसी संस्था, साधु के द्वारा यह प्रमाणित हो गए हैं। ये सेनानी अपने लिए, अपने बच्चों के लिए नहीं, देश के लिए जेल गए थे। यह कार्यक्रम शुरू हुआ। मेरी इच्छा तो कुछ कम हो रही थी क्योंकि मैं भी लोकतंत्र सेनानी हूं। मैं सोचा मेरा भी नाम इसमें होगा लेकिन गुरु महाराज भी गए हुए थे।
महात्मा सन्त जब भी आते हैं, लोगों की कर्मों की गंदगी साफ कराकर निर्मल करके जीवात्माओं को निज घर पहुंचाते हैं
हमेशा यह बात रही है। जब भी महात्मा सन्त इस धरती पर आते हैं और जब लोग दु:खी होते हैं तो उनके हर तरह के दु:ख को दूर करते हैं। हर तरह की तकलीफों को दूर करके, कर्मों की गंदगी को साफ करा कर के, जीवात्माओं को अपने घर अपने मालिक के पास पहुंचाया करते हैं। अब अगर रोटी कपड़े न्याय और सुरक्षा की समस्या सामने आ जाती है तो उनको आगे बढ़ाना ही पड़ता हैं। उनकी आवाज पर बहुत से लोग निकल पड़ते हैं। उनमें जज्बात पैदा हो जाता है, इन्हीं बुनियादी सुविधाओं, जरूरत की पूर्ति के लिए निकल पड़ते हैं।
देश में वो दिन कभी भी न आवे
मैं तो उस समय को दोहराना नहीं चाहता हूं। मुझे भी मार खानी पड़ी, मुझे भी तकलीफ झेलनी पड़ी, मच्छरों और खटमलों से शरीर को नुचवाना पड़ा। मैं तो अब दोहराना नहीं चाहता हूं। आज मैं परम पिता प्रभु परमात्मा से प्रार्थना करता हूं कि अब वह दिन कभी भी इस भारत देश में न आवे।
सभी लोकतंत्र सेनानियों को होना पड़ेगा एकजुट
देखो लोकतंत्र सेनानी जब तक एक मत नहीं होंगे तब तक इनका न तो नाम आगे बढ़ पाएगा न काम आगे बढ़ पाएगा। क्योंकि मैं अक्सर देखता हूं, महात्वकांक्षाए बुढ़ापे में कम नहीं हो रही। ये सब यहीं धरी रह जाती हैं। धन दौलत, मान प्रतिष्ठा और ये सब इच्छायें शरीर से संबंध रखती हैं। यह मृत्युलोक है। एक दिन इस शरीर को छोड़ना ही पड़ता है। यही कारण है कि राम कृष्ण जैसे भगवान कबीर पलटू नानक दादू मीरा जैसे सन्त सब चले गए। एक से एक राजा महाराजा सेठ साहूकार पंडित मुल्ला पुजारी प्रधानमंत्री राष्ट्रपति आए, सब चले गए। इस शरीर का संबंध यहीं तक है। अब अगर लोकतंत्र को आगे बढ़ाना है, लोकतंत्र सेनानियों के माध्यम से, उनके आश्रित बच्चे-बच्चियां, उनके रिश्तेदार दोस्त के माध्यम से अगर सेवा करनी है, देश को आगे बढ़ाना है, विश्व गुरु बनाना है, देश में बढ़ती हिंसा-हत्या, गिरते चरित्र, बिगड़ते खानपान को सही करना है, देश-प्रदेश को उन्नति के शिखर पर, भारत को आगे बढ़ाना, ले जाना है, भारत देश भारत मां की जयकार पूरे विश्व में फैलाना है तो सभी लोकतन्त्र सेनानियों को एकजुट होना पड़ेगा।