दुनिया के शहरों में लगातार बढ़ती आबादी, ट्रैफिक का बढ़ता दबाव ना सिर्फ प्रदूषण बल्कि शहरों के शोर को भी बढ़ा रहा है। उत्तर प्रदेश के एक शहर का नाम यूएन की लिस्ट में शामिल हुआ है।

The ever-increasing population, increasing traffic pressure in the cities of the world is not only increasing the pollution but also the noise of the cities. The name of a city in Uttar Pradesh has been included in the UN list.

दुनिया के शहरों में लगातार बढ़ती आबादी, ट्रैफिक का बढ़ता दबाव ना सिर्फ प्रदूषण बल्कि शहरों के शोर को भी बढ़ा रहा है। उत्तर प्रदेश के एक शहर का नाम यूएन की लिस्ट में शामिल हुआ है।

NBL, 27/03/2022, Lokeshwer Prasad Verma,.. नई दिल्ली, 27 मार्च। देश के शहरों में लगातार बढ़ती आबादी, ट्रैफिक का बढ़ता दबाव ना सिर्फ प्रदूषण बल्कि शहरों के शोर को भी बढ़ा रहा है। उत्तर प्रदेश के शहर का नाम यूएन की लिस्ट में शामिल हुआ है, पढ़े विस्तार से...। 

इस शहर में ध्वनि प्रदूषण दुनिया के शीर्ष शहरों की तुलना में सर्वाधिक है। युनाइटेड नेसंश इन्वॉयरमेंट प्रोग्राम की ताजा रिपोर्ट में जो लिस्ट सामने आई है उसमे दुनियाभर के उन तमाम शहरों के नाम शामिल हैं जहां ध्वनि प्रदूषण सबसे अधिक है। इस लिस्ट में उत्तर प्रदेश के शहर मुरादाबाद का नाम भी शामिल है, जोकि दुनिया के सबसे अधिक ध्वनि प्रदूषण वाले शहरों की लिस्ट में दूसरे नंबर पर है।

क्या हैं मानक... 

इस लिस्ट में बांग्लादेश का शहर ढाका पहले नंबर पर है, जहां पर ध्वनि प्रदूषण सबसे अधिक है। जबकि पाकिस्तान का शहर इस्लामाबाद इस लिस्ट में तीसरे पायदान पर है। वहीं भारत के अन्य शहरों की बात करें जो इस लिस्ट में दिल्ली, कोलकाता, आसनसोल, जयपुर भी शामिल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन के अनुसार अधिकतम ध्वनि जो स्वीकृत है वह 55 डेसिबल से अधिक नहीं हो सकता है, यह रिहायशी इलाकों के लिए है जबकि कॉमर्शियल इलाकों में अधिकतम ध्वनि 70 डेसिबल होनी चाहिए।

मुरादाबाद टॉप 3 में... 

बता दें कि निर्यात के मामले में मुरादाबाद भारत का सबसे बड़ा केंद्र है, यहां 114 डेसिबल का ध्वनि प्रदूषण है, जोकि इस लिस्ट में ढाका के बाद दूसरे नंबर पर है। ढाका की बात करें तो यह बांग्लादेश की राजधानी है और यह कपड़ों की फैक्ट्री के लिए प्रसिद्ध है। एक्सपर्ट का कहना है कि यहां ध्वनि प्रदूषण 70 डेसिबल से कहीं अधिक और वो भी काफी लंबे समय तक रहता है जोकि लोगों में सुनने की दिक्कत पैदा कर सकता है।

इन शहरों में प्रदूषण का स्तर

बता दें कि निर्यात के मामले में मुरादाबाद भारत का सबसे बड़ा केंद्र है, यहां 114 डेसिबल का ध्वनि प्रदूषण है, जोकि इस लिस्ट में ढाका के बाद दूसरे नंबर पर है। ढाका की बात करें तो यह बांग्लादेश की राजधानी है और यह कपड़ों की फैक्ट्री के लिए प्रसिद्ध है। एक्सपर्ट का कहना है कि यहां ध्वनि प्रदूषण 70 डेसिबल से कहीं अधिक और वो भी काफी लंबे समय तक रहता है जोकि लोगों में सुनने की दिक्कत पैदा कर सकता है।

इन शहरों में प्रदूषण का स्तर

दक्षिण एशियाई क्षेत्र में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल के शहरों में सबसे अधिक ध्वनि प्रदूषण है। जबकि यूरोप और लैटिन अमेरिका में सबसे कम ध्वनि प्रदूषण है। दिल्ली की बात करें यहां ध्वनि का स्तर 83 डेसिबल है, जबकि कोलकाता में ध्वनि का स्तर 89 डेसिबल है।
ढाका (बांग्लादेश)- 119
मुरादाबाद (भारत)- 114
इस्लामाबाद (पाकिस्तान)- 105
राजशाही (बांग्लादेश)- 105
हो चिन मिन सिटी (वियतनाम)- 103
इबादान (नाइजीरिया)- 101
कुर्पोंडोले (100)- 100
इल्जाइर्स (अल्जीरिय)- 100
बैंकॉक (थाइलैंड)- 99
न्यूयॉर्क (अमेरिका)- 95
डमैस्कस (सीरिय)- 94
मनीला (फिलिपींस)- 92
हॉन्गकॉन्ग (चीन)- 89
कोलकाता (भारत)- 89
आसनसोल (भारत)- 89

किन मानकों पर तय हुआ

शहरों में प्रदूषण का स्तर मुख्य रूप से सड़क पर ट्रैफिक, हवा में ट्रैफिक, रेलवे ट्रैफिक, मशीनों का शोर, उद्योग, पर्व-त्योहार के शोर को शामिल किया जाता है। दिलचस्प बात यह सामने आई है कि न्यूयॉर्क में 10 में से 9 ट्रांसिज यूजर्स को ध्वनि प्रदूषण की शिकायत है और यहां और यहां पर लोगों के बहरे होने की संभावना अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार चीड़ियों की गानों के पैटर्न में बदलाव आया है। हॉन्कॉन्ग में 5 में से 2 लोगों को तय सीमा से अधिक शोरगुल को बर्दाश्त करना पड़ता है।