कुन्नी में आदिवासी लोककला महोत्सव का हुआ सफल आयोजन।

कुन्नी में आदिवासी लोककला महोत्सव का हुआ सफल आयोजन।

लखनपुर सितेश सिरदार:–सदियों से आदिवासी लोक संस्कृति की अपनी अलग पहचान रहीं हैं आदीवासी समुदाय के पूर्वजों ने विरासत में अपने पीढ़ी को दिया है उसे आने वाले पीढ़ी के लिए बचाये रखनें के नजरिए से बीच-बीच में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन जरूरी है। ऐसा कार्यक्रम होते रहने चाहिए उपरोक्त बातें बतौर मुख्य अतिथि जंप उपाध्यक्ष अमीत सिंह देव ने ग्राम कुन्नी हाई स्कूल मैदान में 14 दिसम्बर दिन मंगलवार को आयोजित एक दिवसीय ऐतिहासिक आदिवासी लोक कला महोत्सव में प्रतिभागी नर्तक दलों के कलाकारों तथा दर्शक दीर्घा में उपस्थित जनसमूदाय को संबोधित करते हुए कहा। कार्यक्रम में पूर्व जनपद अध्यक्ष लाल अजित प्रताप सिंह देव, प्रदेश कांग्रेस प्रतिनिधि विक्रमादित्य सिंह देव, जंप अध्यक्ष श्रीमती मोनिका सिंह, जंप उपाध्यक्ष अमीत सिंह देव, ब्लाक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष कृपाशंकर गुप्ता,सुमित सिंह देव,युवा कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह देव, मुख्य अतिथियों एवं चौपाल संस्था प्रमुख गंगा राम पैकरा ,जनपद सदस्य बिहारी तिर्की, नरेन्द्र पांडेय, दिनेश तायल ,मुन्ना पांडेय, सत्येन्द्र राय, शैलेश पांडेय, युवा कांग्रेस सोसल मीडिया ब्लॉक संयोजक मकसूद हुसैन,रामसुजान द्विवेदी ,इरशाद खान,गप्पू खान,अजर राम चौधरी,रमजान खान,हफ़ीज़ खान,कपिल राजवाडे,आशीष पैकरा,उत्कर्ष पांडेय, विशिष्ट अतिथियों ने मां सरस्वती के छाया चित्र मेंधूप-दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत किये।प्रदेश कांग्रेस सदस्य विक्रमादित्य सिंह देव ने अपने उद्बोधन में कहा आदिवासी लोक कला महोत्सव वाकई बहुत सराहनीय है और उससे भी ज्यादा सराहनीय है आयोजन कर्ता जंप अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, चौपाल संस्था प्रमुख गंगाराम पैकरा के विचार धारा जिन्होंने आदीवासी संस्कृति अपने पुरखो के धरोहर को संजोकर रखा है। ये उजागर करता है उन चलन रीति रिवाजों को जो हमें अपने पूर्वजों से मिली है। इसे सहेज कर रखना जरूरी है। इसे भूलने का मतलब खुद को भूल जाना है।जंप अध्यक्ष श्रीमती मोनिका पैकरा ने अपने विचार साझा करते हुए कहा-- पारम्परिक भेष-भूषा में पधारे लोककलाकारों को बधाई दी और अपने संस्कृति को बचाये रखने कहा।आदिवासी मूल संस्कृति को बढ़ावा देने तथा छत्तीसगढ़ के पारम्परिक आदीवासी मूल संस्कृति को पुनः स्थापित करने के दृष्टिकोण से स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करने के लिए आदीवासी लोक कला महोत्सव आयोजन ब्लाक स्तर पर कराया जाना तारीफ ऐ काबिल है।आगे सिंह देव ने कहा कि- दूरस्थ वनांचल ग्रामीण अंचलों में पुरातन काल से करमा सुआ, शैला, बायर पड़ों नृत्य,ढोमकच, आदि प्रकृति का वरदान है सृष्टि रचना के साथ ही इनकी भी रचना हुई है। इन्हें भूलाने का मतलब खुद को भूल जाना है। इस महोत्सव के जरिए स्थानीय कलाकारों को विभिन्न विधाओं में अपनी प्रतिभा प्रदर्शन करने का अवसर मिला है ।इस विवेकानंद आदिवासी लोक कला महोत्सव के माध्यम से पारम्परिक लोक संस्कृति लोक गीतों को पुनः सहेजने का एक प्रयास किया गया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाले वक्त में भी प्रयास जारी रहेगा।आदिवासी लोककला महोत्सव में 36ग्राम पंचायत के दलों के टीमों ने भाग लिया जिसमें सरगुजिहा लोककला कर्मा, शैला, गेड़ी, बायर सहित कई प्रकार के टीमो ने भाग लिया जिसे चयन कर अतिथियों के माध्यम से प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान पर रहे प्रतिभागियों को शील्ड और नगद पुरुस्कार, और सांत्वना पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम को और भी अतिथियों ने संबोधित किया।इस दौरान वहाँ सभी जनपद सदस्य, ग्राम के सरपंच, सचिव सहित हजारों की संख्या में दूर दराज से आये हुए ग्रामवासियों की उपस्थिति रही।कार्यक्रम में मंच का संचालन अनिल गुप्ता और उपेंद्र चौधरी द्वारा किया गया।