CG:साजा के तत्कालीन BEO डॉ नीलिमा गडकरी की निलंबन में साजिश...DEO कार्यालय द्वारा कलेक्टर बेमेतरा की जारी नोट सीट द्वेषपूर्ण...निलंबन के पूर्व विभाग द्वारा क्यो नही की गई कारण बताओ नोटिस जारी

CG:साजा के तत्कालीन BEO डॉ नीलिमा गडकरी की निलंबन में साजिश...DEO कार्यालय द्वारा कलेक्टर बेमेतरा की जारी नोट सीट द्वेषपूर्ण...निलंबन के पूर्व विभाग द्वारा क्यो नही की गई कारण बताओ नोटिस जारी
CG:साजा के तत्कालीन BEO डॉ नीलिमा गडकरी की निलंबन में साजिश...DEO कार्यालय द्वारा कलेक्टर बेमेतरा की जारी नोट सीट द्वेषपूर्ण...निलंबन के पूर्व विभाग द्वारा क्यो नही की गई कारण बताओ नोटिस जारी

संजू जैन:7000885784
बेमेतरा:साजा की तत्कालीन बीइओ डॉ नीलिमा गडकरी की निलंबन में साजिश की बू आ रही है कुछ घटनाएं ऐसी है जो साजिश की संभावनाओं को सुदृढ कर रही है पहला कारण फर्जी शिक्षाकर्मियों के विरुद्ध  उच्च कार्यालय रिपोर्टिंग करना रहा है जो उच्च कार्यालय को रास नही आया दूसरा कारण जेडी कार्यालय द्वारा फर्जी शिक्षा कर्मियों के विरुद्ध तीन सदस्यीय जांच दल में चयन करना है उनके साथ जेडी कार्यालय के उप संचालक  के के शुक्ला और कुसमी हायर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य एस एस ठाकुर भी जांच दल में शामिल थे जिस प्रकार बेमेतरा जिला में फर्जी शिक्षाकर्मियों को प्रशासनिक सरंक्षण मिला हुवा है उसे देखते हुए डॉ नीलिमा गडकरी का जांच में रहना जिले के आला अधिकारियों को रास नही आया डॉ नीलिमा गडकरी के निलंबन के बाद जेडी कार्यालय द्वारा जांच ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है

*डीईओ कार्यालय द्वारा कलेक्टर बेमेतरा की जारी नोट सीट द्वेषपूर्ण*

दिनांक 21 सितंबर 2021 को डीईओ कार्यालय बेमेतरा द्वारा कलेक्टर को जारी नोट सीट में द्वेष स्पष्ट रूप से दिख रही है नोट सीट में औचक निरीक्षण में 20 और 21 सितंबर दो दिनों की अनुपस्थिति बताई जा रही जबकि डॉ नीलिमा गडकरी 20 सितंबर को कोर्ट के आर्डर पर रायपुर पेंशन मामले में ऑफिशियल दौरे पर थी ये बात विभाग को भी पता था और 21 कि सुबह 09 बजे देवकर सुरही नदी में बाढ़ में फंसी थी 03 बजे बाढ़ उतरने पर वो साजा मुख्यालय में उपस्थित थी बाढ़ में फंसने की सूचना वो एसडीएम साजा और डीईओ बेमेतरा को मोबाइल और वाट्सएप के माध्यम से दे भी चुकी थी 20 सितंबर को साजा के एक स्कूल में 06 बच्चे कोविड पॉजिटिव पाया गया था 21 सितंबर कलेक्टर बेमेतरा का दौरा था चूंकि एसडीएम को बीइओ के बाढ़ में फंसे होने की सूचना पूर्व में थी एबीओ लीलाधर सिन्हा जो कोविड प्रभारी थे कलेक्टर के दौरे के समय एसडीएम के कहने पर भी समय पर उपस्थित नही हुए जिसके चलते कलेक्टर ने एबीओ को निलंबित करने का नीर्देश दिए थे लेकिन शिकार हुई बीइओ डॉ नीलिमा गडकरी जबकि बीइओ 22 सितंबर को बेमेतरा में डीईओ और कलेक्टर के समक्ष दोनो दिनों के अनुपस्थिति के आरोप पर  स्पष्टीकरण दे चुकी थी फिर भी बीइओ का निलंबन होना एक सोची समझी साजिश का हिस्सा हो सकता है

*निलंबन के पूर्व विभाग द्वारा क्यो नही की गई कारण बताओ नोटिस जारी*

किसी भी अधिकारी या कर्मचारी पर लगे आरोप पर किसी भी तरह की कार्यवाही के पूर्व कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है जो डॉ नीलिमा गडकरी के मामले में नही किया गया और न ही उनका पक्ष सुना गया और बिना पक्ष सुने किसी भी अधिकारी या कर्मचारी पर निलंबन की कार्यवाही करना नैसर्गिक न्याय सिद्धांत का सीधा उलंघन है 10 महीने से ऊपर निलंबन अवधि हो जाने के बाद भी विभाग अब तक आरोप सिद्ध नही कर पाई जानबूझकर एक महिला अधिकारी के विरुद्ध द्वेषपूर्ण ढंग से निलंबन को बरकरार रखा गया है साथ ही निलंबन अवधि में मिलने वाली निर्वहन गुजारा भत्ता में भी भेदभाव किया जा रहा है 10 महीने में 75 प्रतिशत भत्ता मिलने का प्रावधान है जो डॉ नीलिमा गडकरी को नही मिल रहा है

*2019 निलंबन अवधि में पांच माह का वेतन अब भी अप्राप्त*

2019 में भी डॉ नीलिमा गडकरी को नियमो के विपरीत निलंबन किया गया था जिस पर माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर ने निलंबन के विरुध्द निर्णय दिए थे साथ ही अपने आर्डर में माननीय न्यायालय ने 05 माह के विलंबित वेतन को भी देने का निर्देश दिए थे जिसे आजपर्यंत भुगतान नही किया गया है जिसकी शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय में की गई थी जिसकी जांच कलेक्टर बेमेतरा को दिया गया था डीईओ ने 17 जून 2022 कलेक्टर को लिखे पत्र में वेतन भुगतान करने का जिक्र किए है जो झूठ है

*पुरुस्कार की जगह तिरस्कार मिला*

जिस प्रकार डॉ नीलिमा गडकरी फर्जीयो के विरुध्द लगातार पुलिस थाना साजा में एफआईआर करा रही थी तत्कालीन कलेक्टर ने इस महिला अधिकारी को प्रोत्साहित करने 26 जनवरी को पुरुस्कार देने की घोषणा किए थे शायद विभाग को रास नही आया इसलिए साजिश के तहत पुरुस्कार देने की जगह तिरिस्कार किया जबकि पूर्व में ऐसे ही फर्जीयो के मामले में तब के अधिकारियों द्वारा कई मामलों में एफआईआर कराने से बचता देखा गया है एक महिला अधिकारी को बहादुरी के लिए पुरुस्कार की जगह निलंबन का दंश झेलना पड़ रहा है इसे साजिश न कहे तो क्या कहा जाए
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*मेरे विरुद्ध हुए विभागीय अन्याय पर मैने  हाई कोर्ट में अपील की थी. माननीय न्यायालय के निर्देश पर अपने प्रकरण का अभ्यावेदन महामहिम राज्यपाल के समक्ष  प्रस्तुत की हूँ . जो अभी   विचाराधीन है अतः मामले के निर्णय आने तक अभी मेरा सार्वजनिक रुप से ज्यादा कुछ कहना उचित नही. 2019 में कोर्ट के आदेश पर मुझे वेतन देने का आदेश पारित हुआ हैं जो  आज तक अप्राप्त है .अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे अधिकारी को अनुपस्थित बता कर निलंबित करना और लंबे समय तक बहाल न करना ईमानदार कर्मचारी को हतोत्साहित करना है*.

डॉ नीलिमा गडकरी तत्कालीन बीइओ साजा