Property Today : होम लोन महंगा होने तथा ब्याज दर बढ़ने के बावजूद घरों की बिक्री बढ़ेगी, रियल एस्टेट सेक्टर ने जताई अच्छे दिनों के लौटने की उम्मीद...
Property Today : Despite home loan becoming expensive and interest rate increasing, the sale of houses will increase, real estate sector expressed hope of return of good days... Property Today : होम लोन महंगा होने तथा ब्याज दर बढ़ने के बावजूद घरों की बिक्री बढ़ेगी, रियल एस्टेट सेक्टर ने जताई अच्छे दिनों के लौटने की उम्मीद...




Property Today Good days for real estate sector :
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 0.50 प्रतिशत बढ़ाकर 4.9 प्रतिशत करने के फैसले से आवास ऋण महंगा होगा और घरों की बिक्री घटेगी। संपत्ति सलाहकारों ने यह राय जताई है। एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, रेपो दर में वृद्धि से आवास ऋण महंगा होगा।
होम लोन महंगा होने और संपत्तियों के दाम बढ़ने के बावजूद देश के शीर्ष सात शहरों में इस साल आवासीय इकाइयों की बिक्री के पूर्व-महामारी स्तर से आगे निकल जाने की संभावना है. उद्योग के दिग्गजों ने यह अनुमान लगाया है. उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले छह सालों में नोटबंदी, रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) के गठन, जीएसटी लागू होने और कोविड-19 महामारी जैसी लगातार चार बाधाएं आने के बाद देश का आवासीय बाजार बहुत सारे संरचनात्मक परिवर्तनों से गुजर रहा है और अब एक लंबी अवधि के वृद्धि की शुरुआत हो रही है. (Property Today)
क्या है इसके पीछे की वजह?
घर खरीदारों की शीर्ष संस्था एफपीसीई घर खरीद की धारणा में आए सुधार के लिए रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 के तहत गठित रेरा प्राधिकरण को श्रेय देता है. सभी प्रमुख सूचीबद्ध रियल एस्टेट डेवलपरों ने पिछले वित्त वर्ष (2021-22) में रिकॉर्ड बिक्री की थी और चालू वित्त वर्ष (2022-23) में उनकी बिक्री संख्या के और बेहतर होने का अनुमान है. हालांकि, आरबीआई की तरफ से नीतिगत रेपो दर में इस साल कुल 1.40 फीसदी की बढ़तरी करने और बैंकों की तरफ से इसका बोझ होम लोन लेने वाले कर्जदारों पर डालने से घरों की बिक्री की रफ्तार धीमी हुई है. (Property Today)
इसके अलावा आवासीय इकाइयों की कीमतों में बीते एक साल में दर्ज की गई ऊंची बढ़ोतरी ने भी कई लोगों को घर खरीद की योजना टालने के लिए मजबूर किया है. निर्माण की ऊंची लागत, खासकर सीमेंट और इस्पात की लागत बढ़ने की वजह से जून तिमाही में कीमतों में सालाना आधार पर औसतन पांच फीसदी की वृद्धि हुई है. लेकिन डेवलपरों और ब्रोकरों का मानना है कि लागत में वृद्धि अल्पकालिक है और त्योहारी सीजन से मांग में एक बार फिर तेजी आएगी. (Property Today)
संपत्ति सलाहकार फर्म एनारॉक ने कहा कि इस साल देश के सात प्रमुख शहरों- दिल्ली-एनसीआर, मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर), चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे में आवासीय इकाइयों की बिक्री कोविड-पूर्व स्तर यानी 2019 में दर्ज की गई 2,61,358 इकाइयों को पार कर जाएगी. हालांकि, फिर भी बिक्री साल 2014 के 3.43 लाख इकाइयों के आंकड़े से कम होगी. एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि रेपो रेट में बढ़ोतरी का जून तिमाही में आवास की बिक्री पर कुछ असर पड़ा है, जो पिछली तिमाही से 15 फीसदी कम है. (Property Today)
क्या कहते हैं इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स?
मैक्रोटेक डेवलपर्स के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अभिषेक लोढ़ा ने कहा कि भारत का आवास उद्योग संरचनात्मक उत्थान के शुरुआती दौर में है. उन्होंने अगले 10-20 सालों के लिए विकास पर आशावादी नजरिया रखते हुए कहा कि आवास की कीमतों में मामूली वृद्धि बाजार के लिए अच्छी है. लोढ़ा ने बातचीत में कहा कि ऐतिहासिक आंकड़े बताते हैं कि होम लोन पर 8.5-9 फीसदी ब्याज दरों तक आवास की मांग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है. (Property Today)
गोदरेज प्रॉपर्टीज के कार्यकारी चेयरमैन पिरोजशा गोदरेज ने कहा कि पिछले दो सालों में बाजार में सबसे अच्छी किफायत देखी गई है, क्योंकि ब्याज दरें 6.5 से सात फीसदी तक कम हो गई थीं. इस दौरान संपत्ति की कीमतें भी पिछले सात-आठ सालों से कमोबेश स्थिर बनी हुई थीं. उन्होंने कहा कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी और घरों की कीमतें बढ़ने के बावजूद किफायत स्तर अब भी आकर्षक बना हुआ है. घर खरीदारों की शीर्ष संस्था एफपीसीई के अध्यक्ष अभय उपाध्याय ने कहा कि पिछले एक दशक से अधिक समय से चली आ रही मांग अब वास्तविक लेनदेन में परिवर्तित हो रही है. (Property Today)