अंतर में दिखाने सुनाने वाले गुरु की खोज करनी चाहिए - बाबा उमाकान्त




अंतर में दिखाने सुनाने वाले गुरु की खोज करनी चाहिए - बाबा उमाकान्त
गुरु भक्ति आ जाएगी तो अंतर में दिखाई सुनाई पड़ जाएगा
उज्जैन (म. प्र.)। जीते जी देवी देवताओं का दर्शन कराने, उनकी आवाज सुनाने वाले, उनके लोकों में और उनसे परे भी ले चलने वाले, कर्मों की मिल रही सजा से बचाने वाले, साधना में तरक्की की चाबी जिनके पास में है ऐसे सतपुरुष के तदरूप, पूरे समरथ सन्त सतगुरु, परम दयालु, त्रिकालदर्शी, दुःखहर्ता, उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त महाराज ने धनतेरस पर 12 नवंबर 2020 दोपहर उज्जैन आश्रम में दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि कोई गुरु मिल गया तो कुछ न कुछ तो बताएगा ही। अब उससे आपको अगर कुछ (अंतर में) दिखाई सुनाई नहीं पड़ रहा, विष्णुजी लक्ष्मीजी गणेशजी शिवजी, उनके पिता, इनकी माता आद्या मां शक्ति और ईश्वर नहीं दिखाई पड़ रहे हैं तो आप दूसरे गुरु को खोजो। जो यह कहता हो कि मैं आपको दिखाऊंगा, मैं उन तक पहुंचाउंगा, मैं उनकी आवाज आपको सुनाऊंगा, उन से परे भी ले जाऊंगा। जिनको सन्त सतगुरु कहा गया, उन पर आपको विश्वास करना चाहिए। जैसे हमारे गुरु महाराज इस चीज को कहते थे कि मैं तुमको ले चलूंगा, दिखाऊंगा, अगम अटारी दिखाऊंगा, वहां की शोभा न्यारी दिखाऊंगा, वहां की सुंदरता, शीश महल दिखाऊंगा और वहां की खुशबू आपको दिलाऊंगा और आपने विश्वास किया। और आप उनके बताए रास्ते पर चलते हो। कुछ लोगों ने पक्का विश्वास किया। विश्वास जब डगमगाता है तो दया नहीं मिल पाती है। दृढ़ता विश्वास मजबूती के साथ जो करता है उसके लिए वो फलदाई हो जाता है, वही गुरु भक्त हो जाता है।
स्वयं के और दूसरों के कर्म जो आपने अपने उपर लाद लिए हैं, उनसे कैसे छुटकारा मिलेगा
जो गुरु के आदेश का पालन करता है वही गुरु भक्त कहलाता है। तो आदेश का पालन ही गुरु भक्ति बताई गई है। जिनको नाम दान मिल गया है, आप आदेश का पालन करोगे और गुरु भक्ति आपके अंदर आ जाएगी तो आपके सब समझ में आ जाएगा। जो चीज आपको (अंतर में) दिखाई-सुनाई नहीं पड़ रहा है, वह जो गुरु भेजे हुए होते हैं, सतपुरुष के तदरूप होते हैं, समरथ गुरु जिनको कहा गया, वह होते हैं, उनके आदेश के पालन में अगर आप लगोगे, उनके बताये संयम-नियम से रहोगे, सतगुरु बताते हैं उसका पालन करोगे तो (दिव्य) आवाज भी सुनाई पड़ जाएगी। यह जो जन्म जन्मान्तर के कर्मों के मैल जमा है और समाज में रहने के नाते जो दूसरे के कर्म आप (अपने ऊपर) ले लिये हो, और अपराध कोई कर रहा है, फल आप भोग रहे हो तो इससे भी आपको छुटकारा मिल जाएगा और आप इसी जन्म में पार हो जाओगे, आपको दूसरा जन्म नहीं लेना पड़ेगा।
करने वाले सबको साधना में दिखाई सुनाई पड़ता है
महाराज ने 8 मार्च 2020 प्रातः उज्जैन आश्रम में बताया इसीलिए महापुरुष (अंतर साधना में) थोड़ा-थोड़ा देते हैं। एकदम से अगर (तीसरी) आंख, कान खोल दें तब तो सब उसी में लगे रह जाएंगे तो यह आश्रित बाल बच्चे क्या करेंगे? डंडा लेकर औरतें निकल पड़ेंगी, कहेंगी सही कर देंगे अगर अब भजन करोगे तो, चलो रोटी कमा कर लाओ। सरकार को भी नियम बनाना पड़ेगा की साधना कोई न कर पाए और यह बाबा जो नाम दान देते हैं, नाम दान न देने पाए। इसीलिए थोड़ा-थोड़ा मिलता है। मेहनत जो करते रहते हैं, सबको मिलता है, दिखाई सुनाई पड़ता है। करोगे तो आपको भी दिखाई सुनाई पड़ेगा, खुशबू भी आपको अंतर में मिलेगी।
साधना में खिंचाव होने पर साधक को घबराने की जरूरत नहीं है
महाराज ने 13 नवंबर 2020 प्रातः उज्जैन आश्रम में बताया कि (साधना के दौरान) रक्त का संचार कम हो जाता है, दर्द झुनझुनी होती है, और खींचते हो तेजी से रक्त का संचार होता है तो दर्द होता है। ऐसे जब (जीवात्मा का उपर की तरफ) खिंचाव होता है तो भी दर्द होता है। कहा गया, साधक को घबराने की जरूरत नहीं है। कभी-कभी जब जल्दी खिंचाव होने लगता है तो भी घबराहट होती है। घबराना नहीं चाहिए। जब कोई ज्यादा परेशानी दिक्कत हो तो गुरु के स्वरूप को याद करना चाहिए तो गुरु मदद कर देते हैं। कैसे भी मदद कर देते हैं, ढाढ़स दिला करके, हिम्मत दिला करके, साक्षात दर्शन देकर मदद कर देते हैं। जाकी जैसी भक्ति भावना होती है उसी हिसाब से उस साधक को गुरु मदद कर देते हैं।