अखिल भारती अघरिया समाज बिलासपुर ग्रामीण के द्वारा माता देवकी और वासुदेव के आठवे पुत्र श्री कृष्ण जन्म उत्सव सामाजिक भवन खैरा जयरामनगर में हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया पढ़े पूरी खबर

अखिल भारती अघरिया समाज बिलासपुर ग्रामीण के द्वारा माता देवकी और वासुदेव के आठवे पुत्र श्री कृष्ण जन्म उत्सव सामाजिक भवन खैरा जयरामनगर में हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया पढ़े पूरी खबर
अखिल भारती अघरिया समाज बिलासपुर ग्रामीण के द्वारा माता देवकी और वासुदेव के आठवे पुत्र श्री कृष्ण जन्म उत्सव सामाजिक भवन खैरा जयरामनगर में हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया पढ़े पूरी खबर

अखिल भारती अघरिया समाज बिलासपुर ग्रामीण के द्वारा कृष्ण जन्म उत्सव सामाजिक भवन खैरा जयरामनगर में हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया जिसमें समाज के प्रमुख जन वह महिलाओ ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया जिसमें उपस्थित अध्यक्ष ढोल नारायण पटेल कोषाध्यक्ष नरसिंह पटेल उपाध्यक्ष अजीत राम पटेल केंद्रीय प्रतिनिधि बंशीधर पटेल सचिव जीवन लाल पटेल सह सचिव तिरीथ पटेल कुशल पटेल राजेंद्र पटेल परमेश्वर पटेल थानचंद पटेल गोपी पटेल व अनेक समाजिक महिला पुरुष उपस्थित थे


आपको बताते चले की आज के दिन 
भारत में ही नहीं अपितु पुरे विश्व में जहां जहां भारत वासी रहते है वहाँ जन्माष्टमी पर्व को भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व पूरी दुनिया में पूर्ण आस्था एवं श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। जन्माष्टमी को भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं। श्री कृष्ण युगों-युगों से हमारी आस्था के केंद्र रहे हैं। वे कभी यशोदा मैया के लाल होते हैं, तो कभी ब्रज के नटखट कान्हा।

 
जन्माष्टमी कब और क्यों मनाई जाती है 
 
भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव का दिन बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। जन्माष्टमी पर्व भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है, जो रक्षाबंधन के बाद भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है।
 
श्री कृष्ण देवकी और वासुदेव के 8वें पुत्र थे। मथुरा नगरी का राजा कंस था, जो कि बहुत अत्याचारी था। उसके अत्याचार दिन-प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे थे। एक समय आकाशवाणी हुई कि उसकी बहन देवकी का 8वां पुत्र उसका वध करेगा। यह सुनकर कंस ने अपनी बहन देवकी को उसके पति वासुदेवसहित काल-कोठारी में डाल दिया। कंस ने देवकी के कृष्ण से पहले के 7 बच्चों को मार डाला।

 
जब देवकी ने श्री कृष्ण को जन्म दिया, तब भगवान विष्णु ने वासुदेव को आदेश दिया कि वे श्री कृष्ण को गोकुल में यशोदा माता और नंद बाबा के पास पहुंचा आएं, जहां वह अपने मामा कंस से सुरक्षित रह सकेगा। श्री कृष्ण का पालन-पोषण यशोदा माता और नंद बाबा की देखरेख में हुआ। बस, उनके जन्म की खुशी में तभी से प्रतिवर्ष जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है।