अवैध वसूलि ब्रेकिंग-जान्च के नाम पर कोंटा आरटीओ करता है लाखो की वसूली ड्राइवरों ने बताया फिक्स है रेटलिस्ट 300 औऱ 500 देना मजबूरी है

अवैध वसूलि ब्रेकिंग-जान्च के नाम पर कोंटा आरटीओ करता है लाखो की वसूली  ड्राइवरों ने बताया फिक्स है रेटलिस्ट 300 औऱ 500 देना मजबूरी है

सुकमा - राज्य के अंतिम छोर व छत्तीसगढ़ आंध्रप्रदेश बॉर्डर पर स्थित कोन्टा आरटीओ चेकिंग पॉइंट में जांच के नाम पर अवैध वसूली का काला कारोबार खुलेआम जारी है । जो कि जिम्मेंदारो के संरक्षण में फलफूल रहा है । रोजाना 200 से 300 वाहनों की आवाजाही छत्तीसगढ़ आंध्रप्रदेश की सीमा से होता है। जिनसे 300 से 500 रुपये तक कि अलग अलग अवैध वसूली आरटीओ कोन्टा के अफसरों द्वारा की जाती है और जांच औऱ कागजो के पचड़े से बचने ड्राइवर पैसे भी दे देते हैं । इतना ही नही जिस उद्देश्य से आरटीओ को कोन्टा में स्थित किया गया है। पैसों की सह में वो काम भी नही किया जाता । दबी जुबान में वाहन चालकों ने अपनी समस्या बताई । 

इस पूरे मामले की जानकारी के बाद मीडिया की एक टीम स्टिंग ऑपरेशन करने हेतु कोन्टा आरटीओ चेक पोस्ट पहुंची। इस दौरान आंध्रप्रदेश से ईंट लेकर आ रही तीन हाइवा गाड़ियों के ड्राइवरों द्वारा 1500 रुपये लेकर आरटीओ चेकिंग पॉइंट में पहुंचे। वहां बैठे प्रधान आरक्षक भूषण ध्रुव को दिया। इसके बाद किसी प्रकार का दस्तावेज वाहन हेल्पर द्वारा नही दिखाया गया और न ही वहां बैठे प्रधान आरक्षक ने किसी भी प्रकार के बिल/दस्तावेज को देखने की मांग की। इतने में मीडिया की टीम ने प्रधान आरक्षक से पैसों के लेनदेन के बारे में पूछ लिया कि पैसे किस लिए लिया जा रहा है तो प्रधान आरक्षक ने किसी भी तरह का पैसे लेने से साफ इंकार कर दिया। लेकिन तुरंत ही उसी हेल्पर से कैमरे पर मीडिया की टीम द्वरा पैसे के बारे मे पूछा गया तो उसने बताया की 500 रुपये प्रति गाड़ी के हिसाब से वो पैसा आरटीओ नाका में उसी प्रधान आरक्षक को दे आया है। और ये यहां का फिक्स रेट है। हमेशा इतनी ही राशि देकर आने जाने की बात कही।

विजय बेर कोन्टा आरटीओ प्रभारी से जब बात की गई तो वे सम्बंधित कर्मचारियों के बचाव में गोलमोल जवाब देते नजर आए । और कहा कि बिना रशिद किसी भी तरह का पैसा नही लिया जाता है । चालानी कार्यवाही हुई होगी। जबकि मीडिया की पूछताछ में किसी प्रकार की भी चालानी कार्यवाही या राशिद न होने की बात कहकर पैसे लेने की बात ही स्वीकार नही कर रहे हैं । निरीक्षक से फ़ोन पर बात के तुरंत बाद आरटीओ में रुकने वाली वाहनों के ड्राइवरों से लेनदेन की बात और इसी तरह की समस्या पर पत्रकारों की टीम बात कर रही थी जिसकी जानकारी प्रधान आरक्षक ने निरीक्षक को दी जिसपर निरीक्षक की किरकिरी देखने को मिली फोन पर निरीक्षक ने पत्रकार को ड्राइवरों से पूछताछ करने से रोकने का प्रयास किया और पूछताछ को गलत बताया । पूछताछ में राज्य के अंतिम छोर व छत्तीसगढ़ आंध्रप्रदेश बॉर्डर पर स्थित कोन्टा आरटीओ चेकिंग पॉइंट में जांच के नाम पर अवैध वसूली का काला कारोबार खुलेआम जारी है। जो कि वरिष्ठ अधिकारियों के संरक्षण में फलफूल रहा है। रोजाना 200 से 300 वाहनों की आवाजाही छत्तीसगढ़ आंध्रप्रदेश की सीमा से होता है। जिनसे 300 से 500 रुपये तक कि अलग अलग अवैध वसूली आरटीओ कोन्टा के अफसरों द्वारा की जाती है। इतना ही नही जिस उद्देश्य से आरटीओ को कोन्टा में स्थित किया गया है। पैसों की सह में वो काम भी नही किया जाता। रसोइये ने बताया कि स्टाफ की कमी है 2 रसोइए समेत कुल 4 लोग पदस्थ हैं ।

इस पूरे मामले की जानकारी के बाद मीडिया की टीम स्टिंग ऑपरेशन करने हेतु कोन्टा आरटीओ चेक पोस्ट पहुंची । इस दौरान आंध्रप्रदेश से ईंट लेकर आ रही तीन हाइवा गाड़ियों के ड्राइवरों द्वारा 1500 रुपये लेकर आरटीओ चेकिंग पॉइंट में पहुंचे । वहां बैठे प्रधान आरक्षक भूषण ध्रुव को दिया। इसके बाद किसी प्रकार का दस्तावेज वाहन हेल्पर द्वारा नही दिखाया गया और न ही वहां बैठे प्रधान आरक्षक ने किसी भी प्रकार के बिल/दस्तावेज को देखने की मांग की। इतने में मीडिया की टीम ने प्रधान आरक्षक से पैसों के लेनदेन के बारे में पूछ लिया कि पैसे किस लिए लिया जा रहा है तो प्रधान आरक्षक ने किसी भी तरह का पैसे लेने से साफ इंकार कर दिया। लेकिन तुरंत ही उसी हेल्पर से कैमरे पर मीडिया की टीम द्वरा पैसे के बारे मे पूछा गया तो उसने बताया की 500 रुपये प्रति गाड़ी के हिसाब से वो पैसा आरटीओ नाका में उसी प्रधान आरक्षक को दे आया है। और ये यहां का फिक्स रेट है। हमेशा इतनी ही राशि देकर आने जाने की बात कही।

 

विजय बेर कोन्टा आरटीओ प्रभारी से जब बात की गई तो वे सम्बंधित कर्मचारियों के बचाव में गोलमोल जवाब देते नजर आए । और कहा कि बिना रशिद किसी भी तरह का पैसा नही लिया जाता है । चालानी कार्यवाही हुई होगी। जबकि मीडिया की पूछताछ में किसी प्रकार की भी चालानी कार्यवाही या राशिद न होने की बात कहकर पैसे लेने की बात ही स्वीकार नही कर रहे हैं । निरीक्षक से फ़ोन पर बात के तुरंत बाद आरटीओ में रुकने वाली वाहनों के ड्राइवरों से लेनदेन की बात और इसी तरह की समस्या पर पत्रकारों की टीम बात कर रही थी जिसकी जानकारी प्रधान आरक्षक ने निरीक्षक को दी जिसपर निरीक्षक की किरकिरी देखने को मिली फोनपर निरीक्षक ने पत्रकार को ड्राइवरों से पूछताछ करने से रोकने का प्रयास किया और पूछताछ को गलत बताया । पूछताछ पर टीएन 48 एवाई 7900 के ड्राइवर कुमार ने बताया कि यहां चेकपोस्ट में पैसे देने कम्पलसरी है 300 रुपये एक बार जाने का दिया जाता है महीने 2 महीने में 1 बार कागज चेक किया जाता है । आज भी 300 देकर ही नाका पार कर रहा हूँ । वहीं एपी 20 टीबी 0707 वाहन के तमिलनाडु निवासी वाहन चालक ने कैमरे पर बताया कि वह कैम्प निर्माण हेतु ईट लेकर 3 हाइवा जा रहा है और प्रति वाहन हाइवा 500 रुपये लिया जाता है औऱ लम्बे टाइम से दिया जा रहा है मेरे द्वारा । 

 

जिला परिवहन अधिकारी शिव भगत रावटे से जब इस विषय पर बात की गई तो उन्होंने कहा कि मीडिया के माध्यम से यह मामला आया है मैं अपने उच्च अधिकारी कमिश्नर को इस बाबत पत्र लिखूंगा जिसके बाद उनके निर्देश पर मामले की जांच की जाएगी । उन्होंने कहा कि वे जब भी कोन्टा आरटीओ निरीक्षण पर गए तब उन्होंने इस तरह की घटना को नही पाया।

 

*लंबे समय से चल रहा करोड़ो का कारोबार, जिम्मेदार अधिकारी खुद को बता रहे अनजान*

 

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़-आंध्रप्रदेश सीमा पर स्थित कोन्टा आरटीओ चेकिंग पॉइंट से लगभग 200 से 300 वाहन गुज़रते हैं जिनसे चैकिंग के नाम पर सैकड़ो रुपए लिए जा रहे हैं । वहां से गुजर रहे ड्राइवरों के अनुसार उनसे आने पर 300 और जाने पर 300 लिया जाता है इसके अलावा भारी भरकम वाहनों से 500 रुपए बिना किसी रशीद के लिया जा रहा है । इस हिसाब से 1 लाख रुपए प्रतिदिन और 1 माह में लगभग 30 लाख तो वही साल के 365 दिनों में लगभग 3 करोड़ रुपए की अवैध वसूली की जाती होगी। ये बात विचारणीय है कि इतना बड़ा कारोबार सालों आखिर किसके सह में चल रहा है। जिला मुख्यालय में मौजूद अधिकारी अगर निरीक्षण समय समय पर करते है तो उन्हें इस बात की जानकारी क्यो नही है। या वे सब जानते हुए भी अनजान बनने का प्रयास कर रहे हैं।