छात्र क्रांति की मशाल लेकर भीलवाड़ा पहुंचे JNVU के छात्रसंघ अध्यक्ष- भाटी




भीलवाड़ा। जोधपुर के JNVU कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष रविन्द्र सिंह भाटी जो कि राजस्थान के हर कॉलेज व विश्वविद्यालय में फीस के नाम पर चल रहे जबरन वसूली के खेल, विश्वविधालय में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं तानाशाह प्रशासन के विरोध में छात्र क्रांति के आगाज के तहत भीलवाड़ा के छात्रों की भी आवाज को बुलंद करने के लिए भीलवाडा पधारे, उन्होंने भीलवाड़ा में भी छात्रों के साथ मिलकर चर्चा की व ज्ञापन सौंपा। छात्रसंघ अध्यक्ष भाटी ने छात्र संगठनों को धन्यवाद देते हुए कहा कि आप सब लोग मजबूती से लड़ाई लड़ रहे है, इस मामले को लेकर गंभीर है, पूरे राजस्थान में जिला मुख्यालय व तहसील स्तर पर ज्ञापन भी सौंपे है, भाटी ने कहा कि अगर आगे भी जरूरत पड़ी तो मजबूती से लड़ाई भी लड़ेंगे ओर प्रशासन ने छात्रों की बात नहीं समझी तो विधानसभा का घेराव भी किया जाएगा। साथ ही साथ उपचुनाव में तैयार रहे सरकार, मजबूती से विरोध किया जाएगा। भाटी ने सभी छात्र संगठनों से कहा की हम सब एकजुट होकर मजबूती से लड़ाई लड़ेंगे, छात्र एकता को बुलंद करें। फीस के राहत देने को लेकर जोधपुर से शुरू हुई "छात्र क्रांति" बीकानेर, नागौर होते हुए आज भीलवाड़ा पहुंची, कई संख्या में छात्र समुदाय भदाली खेड़ा चौराए से एकत्रित होकर जिला कलेक्ट्रेट पर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। कोरोना वायरस के संक्रमण ने समाज के हर तबके को प्रभावित किया है। सभी प्रकार के आर्थिक क्रियाकलाप इस महामारी के कारण बन्द है और घोर आर्थिक संकट पैदा हो चुका है। प्रत्येक व्यक्ति के लिए अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करना मुश्किल हो गया है।
महामारी के इस दौर में विद्यार्थी वर्ग भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। शिक्षण कार्य ठप्प होने की वजह से उनका शैक्षणिक स्तर पर असर पड़ा है।
इसको मद्देनजर समस्त छात्र वर्ग के द्वारा निम्नलिखित मांगे रखी गईं है:
(1.) प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेज में काफी समय से भौतिक रूप से बंद है। छात्रों द्वारा इसके संसाधनों का उपयोग नहीं किया है बावजूद इसके विश्वविद्यालय और कॉलेजों द्वारा बेवजह कई संसाधनों और मदों के नाम पर फीस की वसूली की जा रही है जो गलत है। हमारी मांग है 2 साल से जो बेवजह फीस ली गई है उसको या तो छात्रों को वापिस किया जाए या इस सत्र में समायोजित किया जाए।
(2.) विश्वविद्यालय और कॉलेजों में कोरोना वायरस के कारण ज्यादातर विद्यार्थियों को अगले सत्र के लिए प्रमोट किया गया है। इसके बावजूद परीक्षा शुल्क सभी विद्यार्थियों से लिया गया। जिन छात्रों की परीक्षा हुई ही नहीं उनसे बेवजह परीक्षा शुल्क लिया गया है जो बहुत ही गलत है। इसलिए हमारी मांग है कि छात्रों को परीक्षा शुल्क अतिशीघ्र वापस किया जाए।
(3.) कोरोना की तीसरी लहर की पूरी संभावना विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त की जा रही है। इसलिए हमारी मांग है कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ऑनलाइन कक्षाओं और पाठ्यक्रम की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए ताकि पहले से पीड़ित विद्यार्थियों का शैक्षणिक कार्य और अधिक प्रभावित ना हो
(4.) जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर में छात्रसंघ अध्यक्ष सहित तीन विद्यार्थियों को छात्रों की मांग उठाने के कारण अलोकतांत्रिक तरीके से निलंबित करने के प्रशासनिक आदेश प्रशासन के गलत इरादों को जाहिर करते है। हमारी मांग है कि हमे इस बात को लेकर आश्वस्त किया जाए कि भविष्य में जब भी कोई युवा अपने हक की बात करे तो उसे इस तरीके के अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक हथकंडे अपनाकर उसकी आवाज को दबाया ना जाए। कोरोना के कारण उत्पन्न आर्थिक संकट के इस दौर में आर्थिक रूप से पिछड़े, वंचित और शोषित समाज से आने वाले छात्रों से इस प्रकार प्रकार जबरन फीस वसूली कर आर्थिक शोषण करना ना सिर्फ अनैतिक रूप से गलत है, बल्कि बर्बरता के एक ऐसे स्वरूप को दर्शाता है जिसकी कल्पना करना असंभव है। विश्वविद्यालयों में फीस के नाम पर आर्थिक रूप से पिछड़े, दलित, शोषित और वंचित तबके से आने वाले विद्यार्थियों को ना सिर्फ प्रताड़ित किया जाता है बल्कि उनको शिक्षा जैसे मूल अधिकार का उपयोग करने से वंचित रखने का पूरा प्रयास विश्वविद्यालयों के प्रशासनो द्वारा किया जाता है। उसके क्या कारण है यह विश्वविद्यालय प्रशासन खुद बेहतर बता सकते है। अगर प्रदेश सरकार छात्रों की समस्याओं प्रति गंभीर होती तो उनके शिक्षा जैसे मूलभूत अधिकार को उपलब्ध कराने के लिए ना सिर्फ एक सजक भूमिका निभाता बल्कि उनकी मदद के लिए हमेशा प्रयासरत रहता। एक तरफ कोरोना द्वारा उत्पन्न परिस्थितियों में चाहे वो केंद्र सरकार द्वारा हो या प्रदेश सरकार के द्वारा हर क्षेत्र में वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सहूलियते दी गई है। वहीं दूसरी तरफ हम नजर डालते हैं तो छात्र जो आज कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है उसको सरकार द्वारा कोई छूट नही मिलती बल्कि उसके शोषण को और बढ़ावा दिया जा रहा है। हमारे विश्वविद्यालय में लॉकडाउन में विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन क्लासेज की कोई व्यवस्था नहीं की और ना ही ऐसी कोई सुविधा छात्रों को इस वैश्वीकरण महामारी के दौरान उपलब्ध कराएगी जो यह बताने के लिए काफ़ी हो कि विश्वविद्यालय छात्रों की समस्याओं के प्रति ना सिर्फ गंभीर है बल्कि उनकी समस्याओं के समाधान की निरंतर कार्य कर रहा है। विश्वविद्यायलयों में ऑनलाइन क्लासेज की कोई भी व्यवस्था नहीं होने की वज़ह से आज विधार्थियों को पढाई करने के लिए प्राइवेट संस्थाओं की मदद लेने पड़ रही है जिसके लिए उनसे मोटी रकम वसूल की जाती है। प्रदेश सरकार पिछले 2 साल से पूरी तरीके से छात्रों की परेशानियों को लेकर आंख मूंद कर बैठी है।आज के हर छात्र पीड़ित और परेशान है और यह समय की जरूरत है कि प्रदेश सरकार उनकी हर समस्याओं का समाधान करने के लिए स्वयं आगे आए। बजाय इसके प्रशासन का रवैया इसके विपरीत नजर आता है जब छात्र विभिन्न मंदो के नाम पर बेवजह हो रही फीस वसूली और परीक्षा शुल्क की वापसी की मांग करते हैं तो उनको विश्वविद्यालय से निलंबित कर दिया जाता है। प्रशासन का यह रवैया भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में संविधान द्वारा स्थापित बोलने की स्वतंत्रता और विरोध करने की आजादी जैसे मूलभूत सिद्धांत पर चोट करता है। साथ ही प्रशासन का यह अलोकतांत्रिक व तानाशाही व्यवहार भारतीय संविधान द्वारा अपनाई गई लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को भी धुंधला करता है जिसमें राज्य की जिम्मेदारी होती कि वह अपने लोगों के कल्याण और समस्याओं के निस्तारण के लिए कार्य करें।
हमे उम्मीद है कि प्रदेश सरकार अपने इस अलोकतांत्रिक और तानशाही रवैया को त्याग कर छात्रों की समस्याओं को सुनेगा और उनका समाधान करने के लिए प्रयास करेगा। अगर प्रदेश सरकार यह करने में असफल रहती है तो आने वाले दिनों में मानसून सत्र शुरू होते ही लाखो छात्रों द्वारा विधानसभा का घेराव किया जाएगा और एक बहुत बड़े स्तर पर प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे, जिसकी जिम्मेदारी केवल और केवल प्रशासन की होगी।