Festival of Laziness : यहाँ मनाया जाता है आलसियों को त्यौहार, जीतने वाले को मिलता है इतना कैश प्राइज, जाने कैसे किया जाता है विजेता डिसाइड...

Festival of Laziness: A festival is celebrated here for the lazy, the winner gets so much cash prize, know how the winner is decided... Festival of Laziness : यहाँ मनाया जाता है आलसियों को त्यौहार, जीतने वाले को मिलता है इतना कैश प्राइज, जाने कैसे किया जाता है विजेता डिसाइड...

Festival of Laziness : यहाँ मनाया जाता है आलसियों को त्यौहार, जीतने वाले को मिलता है इतना कैश प्राइज, जाने कैसे किया जाता है विजेता डिसाइड...
Festival of Laziness : यहाँ मनाया जाता है आलसियों को त्यौहार, जीतने वाले को मिलता है इतना कैश प्राइज, जाने कैसे किया जाता है विजेता डिसाइड...

Festival of Laziness :

 

नया भारत डेस्क : जिन भी लोगों को बिस्तर से उठकर काम करने में परेशानी होती है और लाइफ में किसी भी तरह का मोटिवेशन उनके आलसपन के आगे फीका है ऐसे ही महान लोगों के लिए बना है आलसपन का त्योहार। ये आलसी लोगों के लिए किसी ड्रीम कंपीटिशन जैसा है। जहां उन जैसे कई आलसी लोग इकट्ठा होते हैं और मिलकर अपनी इस आदत को सेलिब्रेट करते हैं। Montenegro में ये अनोखा फेस्टिवल ऑर्गेनाइज किया जाता है। (Festival of Laziness)

Brezna गांव में लोगों के बीच आलसपन का अजीब कंपीटिशन भी रखा जाता है। इस कंपीटिशन में देखा जाता है कि कौन सबसे ज्यादा समय तक एक जगह पर पड़ा रहता है। खड़े होने वाले और बैठने वालों को कंपीटिशन से बाहर होना पड़ता है। गद्दों पर बिना किसी खास एक्टिविटी के लंबे समय तक लेटे रहने वाले को सबसे आलसी नागरिक का खिताब और साथ में कैश प्राइज दिया जाता है। (Festival of Laziness)

मिलता है कैश प्राइज

अब ये फेस्टिवल महज एक सेलिब्रेशन ना होकर गांव का ट्रेडिशन बन गया है। 12 सालों से इसे हर साल बिना किसी गैप के ऑर्गेनाइज किया जा रहा है। इस साल 21 अगस्त को इसे ऑर्गेनाइज किया गया था, जो पूरे 24 दिनों तक चला। 21 लोगों ने इसमें हिस्सा लिया जिनमें से सिर्फ चार ने अपनी डेली लाइफ को पीछे रखकर खुद को नींद और आलस के हवाले कर दिया। परिवार, काम और शिक्षा की चिंता को भूलाकर ये लोग जमकर सोए। जीतने वाले को इस फेस्टिवल में 1000 यूरो यानी 88,000 रुपए कैश प्राइज में दिए जाते हैं। (Festival of Laziness)

कैसे किया जाता है विजेता डिसाइड

एक जगह पर पर्दे लगाकर सख्त लकड़ी के बने फ्लोर पर गद्दे बिछाए जाते हैं। इस रूम में गंदे बदबूदार कपड़े, बासी पुराना खाना भर दिया जाता है। यहां पर आने वाले पार्टिसिपेंट्स को पुराने कंबल ओढ़ने के लिए दिए जाते हैं। यहां पर आने वाले पार्टिसिपेंट्स या तो फोन चलाकर या सोने की कोशिश करते हुए अपना वक्त बिताते हैं। सभी एक हॉलिडे रिजॉर्ट में रुकते हैं और दिन में तीन बार खाना खाते हैं। (Festival of Laziness)

सभी को रेस्टरूम आठ घंटों के बाद ही जाने की इजाजत होती है। सबकी हेल्थ को मॉनिटर किया जाता है। रूल सिर्फ एक ही है- ना बैठना ना खड़े रहना वरना आपको डिसक्वालिफाई कर दिया जाएगा। पार्टिसिपेंट्स को किताबें पढ़ने, फोन चलाने और लोगों से मिलने की इजाजत रहती है। (Festival of Laziness)

इस साल बदले गए नियम

इस साल ऑर्गेनाइज हुए कंपीटिशन में रूल्स में थोड़ा फेरबदल किया गया। हर पार्टिसिपेंट को आठ घंटों के बाद 15 मिनट का ब्रेक दिया गया। इस वजह से इस बार के कंपीटिशन में पिछले पुराने रिकॉर्ड टूट गए और जीतने वाले ने 24 दिन आलस में गुजारे। जहां ज्यादातर पार्टिसिपेंट्स मोंटेनिगरो के थे वहीं दूसरे देशों के लोगों को भी इस फेस्टिवल ने आकर्षित किया। रूस, यूक्रेन और सर्बिया से भी लोग यहां उपस्थित थे। (Festival of Laziness)

महिला ने ऐसे जीता टाइटल

36 साल की Gordana Filipovic ने इस साल कंपीटिशन जीता। अपनी इस उपलब्धि पर गोर्डाना ने बताया कि मेरे पति ने मुझे कहा था कि तुम वेकेशन पर हो, लेटो और आराम करो। ये अजीबोगरीब कंपीटिशन मोंटेनिगरो के लोगों को लेकर चली आ रही धारणा के चलते मजाक में शुरू किया गया था। यहां के लोगों के लिए कहा जाता है कि वे दुनिया में सबसे आलसी हैं। अगर आपके आस-पास भी कोई आलसपन के टैलेंट की खान है तो उन्हें पैसे कमाने वाले इस कंपीटिशन के बारे में जरूर बताएं। (Festival of Laziness)