Diabetes Care : नींद का डायबिटीज से है गहरा कनेक्शन! हुआ चौकाने वाला खुलासा, जाने पूरी डिटेल...

Diabetes Care: Sleep has a deep connection with diabetes! A shocking revelation happened, know the complete details... Diabetes Care : नींद का डायबिटीज से है गहरा कनेक्शन! हुआ चौकाने वाला खुलासा, जाने पूरी डिटेल...

Diabetes Care : नींद का डायबिटीज से है गहरा कनेक्शन! हुआ चौकाने वाला खुलासा, जाने पूरी डिटेल...
Diabetes Care : नींद का डायबिटीज से है गहरा कनेक्शन! हुआ चौकाने वाला खुलासा, जाने पूरी डिटेल...

Diabetes Care :

 

नया भारत डेस्क : इंडियन कांउसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी ICMR के मुताबिक 2019 में भारत में 7 करोड़ लोगों को डाइबिटीज थी जो 2023 में बढ़कर 10.1 करोड़ से ज्यादा हो गई. बचपन से हम तो यह भी सुनते आए हैं कि यह बीमारी बड़े बुजुर्गों में होती है लेकिन आज दुनिया के सामने यह एक ऐसी बीमारी के तौर पर उभरी है जो बेहद तेज़ी से बच्चों से लेकर युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही है. (Diabetes Care)

अक्सर डायबिटीज की वजहों पर बात होती है तो एक आम धारणा है कि खाने-पीने में गड़बड़ी ही सबसे बड़ी वजह है लेकिन एक रिसर्च कहती है कि ऐसा नहीं है. डायबिटीज होने या न होने का आपकी नींद से भी सीधा कनेक्शन है. यानी कितने घंटे आप नींंद ले रहें हैं इससे भी तय होता है कि आपको डायबिटीज होगी या नहीं. (Diabetes Care)

स्टडी पब्लिश हुई है JAMA नेटवर्क ओपन जर्नल में.रिसर्च के लिए दुनिया के सबसे बड़े जनसंख्या डेटाबेस में से एक, यूके बायोबैंक के डेटा का इस्तेमाल किया गया. जिसमें यूके के लगभग 1.5 करोड़ जेनेटिकली मेप्ड लोगों ने सवालों के जवाब दिए. 10 साल की रिसर्च के बाद जो परिणाम सामने थे वो कुछ इस तरह के हैं- हर दिन साथ से आठ घंटे सोने वालों के मुकाबले हर पांच घंटे सोने वालों को टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा 16% से ज्यादा था. (Diabetes Care)

जो लोग तीन से चार घंटे ही सो पाते थे उनमें डायबिटीज होने का रिस्क 41 फीसदी था. एक चौंकाने वाली बात इस रिसर्च में ये भी सामने आई है की आप भले की कितना भी हेल्दी खाना खा लें अगर पर्याप्त नींद नहीं ली तो डायबिटीज़ का जोखिम हमेशा बना रहता है. (Diabetes Care)

टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज क्या है

स्टडी में कहा गया है कि नींद की कमी से टाइप 2 डायबिटीज होने का ज्यादा संभावना होती है. ये क्या होता है? जब हम खाना खाते हैं तो पचने के बाद ग्लूकोज में बदलता है. ये आंतों के जरिए खून के अंदर आता है. खून से ये ग्लूकोज सेल्स के अंदर जाता है. ग्लूकोज को खून से सेल्स के अंदर जाने के लिए एक हॉर्मोन की ज़रुरत पड़ती है जिसे इंसुलिन कहते हैं. हमारे पेट के अंदर एक अंग होता है- पैंक्रियाज. इसी पैंक्रियाज से ही इंसुलिन निकलता है. (Diabetes Care)

अगर किसी इंसान में ये इंसुलिन बनना बंद हो जाता है तो खाना खाने के बाद ब्लड में शुगर की मात्रा बढ़ती जाएगी. लेकिन वो शुगर ब्लड से सेल्स के अंदर नहीं जाएगी. इसी कंडीशन को टाइप 1 डायबिटीज बोलते हैं यानी इंसुलिन का बनना बंद हो जाना. वहीं, टाइप 2 डायबिटीज में पेंक्रियाज़ में ज़रूरत के हिसाब से इंसुलिन नहीं बनता है या हार्मोन ठीक से काम नहीं करता है. (Diabetes Care)

ये कोई पहली बार नहीं है…

2015 में, डायबेटोलोजिया में एक रिसर्च पब्लिश हुई थी जिसमें भी नींद की कमी और डायबिटीज के बीच कनेक्शन होने की बात कही गई थी. दिल्ली के मणिपाल हॉस्पिटल में डायबिटिशियन डॉक्टर मोनिका शर्मा कहती हैं कि, ”नींद हमारे शरीर में रेस्टोरेटिव फेज की तरह काम करता है मतलब जो भी शरीर में मरम्मत का काम होता है वो रात में होता है. जब आपकी नींद ही पर्याप्त नहीं होगी तो रिपेयरिंग के काम में बाधा आती है जिसकी वजह से इंसुलिन रेजिस्टेंस की मात्रा बढ़ती है नतीजन आपका मेटाबॉलिज्म बिगड़ जाता है.” (Diabetes Care)

शिकागो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि तीन रातों में केवल चार घंटे की नींद लेने के बाद, फैटी एसिड का रक्त स्तर, जो आमतौर पर चरम पर होता है और फिर रात भर में कम हो जाता है, लगभग सुबह 4 बजे से सुबह 9 बजे तक उपर रहता है. जब तक फैटी एसिड का स्तर ऊंचा बना रहा, ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन की क्षमता कम हो गई थी. (Diabetes Care)

फोर्टिस हॉस्पिटल मुंबई में इंटरनल मेडिसिन की डायरेक्टर फराह इंग्ले वहीं बताती हैं, ”डायबिटीज की वजह से भी नींद की साइकिल बिगड़ती है. जैसे कुछ डायबिटीज के मरीजों को रात में पेशाब के लिए उठना पड़ता है, जिन्हें स्लीप अपनिया की बीमारी हैं उन्हें भी नींद की समस्या रहती है जिसकी वजह से शुगर लेवल बढ़ जाता है.” (Diabetes Care)

भारत में कितने डायबिटीज के मरीज?

पिछले साल यूके मेडिकल जर्नल ‘लैंसेट’ में प्रकाशित एक आईसीएमआर अध्ययन में दावा किया गया था कि 2019 में भारत में 7 करोड़ लोगों को डाइबिटीज थी जो 2023 में बढ़कर 10.1 करोड़ से ज्यादा हो गई. कुछ विकसित राज्यों में संख्या स्थिर हो रही है, वहीं कई अन्य राज्यों में यह चिंताजनक दर से बढ़ रही है. शहरी क्षेत्रों में नींद की कमी काफी आम है. गोवा में टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के 26.4 मामले देखे गए. पुडुचेरी 26.3 प्रतिशत मामलों के साथ दूसरे स्थान पर और केरल 25.5 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रहा. (Diabetes Care)

इस बीच, उत्तर प्रदेश में मधुमेह की सबसे कम संख्या (4.8 प्रतिशत) दर्ज की गई है. लेकिन राष्ट्रीय औसत 15.3 प्रतिशत की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत प्री-डायबिटीज मरीज हैं. स्टडी के मुताबिक मध्य प्रदेश, बिहार और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में जहां इसका प्रसार कम है, वहां अगले कुछ सालों में मधुमेह के विस्फोट की संभावना अधिक है. (Diabetes Care)

डॉक्टर की सलाह पर भरोसा रखे

काम का शेड्यूल, तनाव, आर्थिक दबाव और सोशल मीडिया का बढ़ता इस्तेमाल जैसे फैक्टर इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं. लेकिन हमें इससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने के लिए इसमें सुधार करने के तरीके खोजने की जरूरत है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़, दुनिया भर में इस समय 42.2 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं. बीते 40 सालों में इसकी चपेट में आने वाले लोगों की संख्या चार गुना बढ़ गई है. (Diabetes Care)

साल 1980 में 18 साल से ज़्यादा उम्र वाले डायबिटीज़ से पीड़ित युवाओं का प्रतिशत 5 से कम था. लेकिन 2014 में ये आंकड़ा 8.5% तक पहुंच गया था. जिन भी लोगों को यह लगता है कि उन्हें डायबिटीज नहीं हो सकता है तो उन्हें इन आंकड़ों से सचेत हो जाने की काफी जरूरत है. भारत के मेट्रो शहरो में 40 वर्ष की आयु के लगभग 20 प्रतिशत लोगों को डायबिटीज है. जब आप 60 वर्ष के होंगे तो यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत हो जाएगा. इससे निपटना और स्वस्थ जीवन जीना संभव है. अपने डॉक्टर पर भरोसा करें, उनकी सलाह मानें. (Diabetes Care)