D-SIB Bank : ये 3 बैंक है भारत की ताकत! यदि ये डूब गये तो देश का हाल हो जायेगा बेहाल, RBI ने इन बैंको का किया है चयन...
D-SIB Bank: These 3 banks are the strength of India! If they drown then the condition of the country will be in trouble, RBI has selected these banks... D-SIB Bank : ये 3 बैंक है भारत की ताकत! यदि ये डूब गये तो देश का हाल हो जायेगा बेहाल, RBI ने इन बैंको का किया है चयन...




D-SIB Bank :
नया भारत डेस्क : RBI देश के सभी बैंकों को उनकी परफॉर्मेंस, उनके कस्टमर बेस के आधार पर सिस्टमैटिक इम्पॉर्टेंस स्कोर देता है. किसी भी बैंक के D-SIB के तौर पर लिस्ट होने के लिए जरूरी है कि उसकी संपत्ति राष्ट्रीय GDP के 2 फीसदी से ज्यादा हो. मुख्यतौर पर घरेलू अर्थव्यवस्था में महत्व के आधार पर RBI इन बैंकों का चयन करता है. (D-SIB Bank)
साल 2008 की मंदी के दौरान भारतीय शेयर बाजार तहस-नहस हो गए थे. मंदी को भारतीय बैंक भी नहीं झेल पाए थे. जिससे देश का नुकसान वित्तीय तौर पर बढ़ गया था. तभी सरकार ने तय किया कि ऐसी स्थिति में कुछ चुनिंदा बैंकों को बचाने की जरूरत है, ताकि इकॉनमिक क्राइसिस ना पैदा हो. D-SIB में बैंकों को भी कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है. ये सारा पैसा लोन देने में या बाकी चीजों के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते. इन्हें अपने रिस्क वेटेड एसेट्स का एडिशनल कॉमन इक्विटी टीयर 1 मेनटेन करना होता है. (D-SIB Bank)
क्योंकि फिलहाल SBI बकेट 3 में हैं, तो उसे 0.60% और ICICI और HDFC बैंक को 0.20% मेनटेन करना होता है, जो बकेट 1 में हैं. बैंक की इम्पॉर्टेंस के आधार पर D-SIB को 5 अलग-अलग बकेट्स में रखा जाता है. बकेट फाइव का मतलब सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बैंक, वहीं बकेट वन का मतलब है कम महत्व वाले बैंक. (D-SIB Bank)
भारत में SBI, ICICI और HDFC बैंक इस लिस्ट में हैं. इनके डूबने से देश की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा सकती है. जिसकी वजह से आर्थिक संकट और पैनिक की स्थिति बन सकती है. इन बैंकों की गतिविधियों पर RBI की पैनी नजर होती है, इसलिए इनके डूबने की जोखिम बेहद कम होते हैं. D-SIB से डील करने के लिए RBI ने अलग नियम बना रखे हैं. आर्थिक संकट की स्थिति में इन बैंकों को उबारने के प्लान होते हैं, और सरकार भी हरसंभव मदद करती है. (D-SIB Bank)
सभी बैंक केंद्रीय बैंक यानी RBI के अधीन होते हैं. साल 2020 में Yes Bank की आर्थिक सेहत बिगड़ गई थी. जिसके बाद तुरंत आरबीआई ने बैंक के बोर्ड को भंग कर अपने कब्जे में ले लिया था, और फिर उसे उबारने के लिए पूंजी डाली गई. जिसमें सहयोग के लिए SBI समेत देश के कई बड़े बैंक सामने आए. कुछ इसी तरह का मामला फिलहाल अमेरिकी फर्स्ट रिपब्लिक बैंक को बचाने के लिए सामने आया है. देश के दूसरे बैंकों ने 30 अरब डॉलर की मदद देकर बचाया है. साल 2015 से RBI हर साल D-SIB की लिस्ट निकालता है. 2015 और 2016 में केवल SBI और ICICI बैंक D-SIB थे. 2017 से HDFC को भी इस लिस्ट में शामिल किया गया. (D-SIB Bank)
D-SIB में शामिल बैंकों को सरकार हर हाल में डूबने नहीं देगी. बाकी बैंकों का बहुत ज्यादा प्रभाव दुनिया में नहीं है. हालांकि बाकी बैंकों के भी डूबने के चांस बहुत कम है. क्योंकि सभी पर RBI की नजर होती है. खाताधारकों की स्थिति में अब देश के सभी बैंकों के लिए एक ही नियम है. डूबने या आर्थिक संकट की स्थिति में बैंक डिपॉजिट पर सरकार 5 लाख रुपये तक का इंश्योरेंस कवर देती है. कई अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के बाद भी अलग से भारतीयों बैंकों के लिए नियम बनाए गए हैं. (D-SIB Bank)