CG NEWS : अन्न-जल त्यागकर हड़ताल पर बैठे संविदा कर्मचारी, सरकार की बढ़ी मुसीबत .....
छत्तीसगढ़ प्रदेश मे करीब 45 हजार संविदा कर्मचारी नियमतीकरण की मांगो को लेकर बीते 3 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। संविदा कर्मी मुख्यमंत्री भूपेश सरकार से लगातार नियमतीकरण की मांग करते चले आ रहे है।




रायपुर। नवा रायपुर के तूता स्थित धरना स्थल पर पिछले 2 सप्ताह से नियमितीकरण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हजारों संविदा कर्मचारी अब बुधवार से आमरण अनशन पर हैं। कर्मचारी अन्न-जल का त्याग कर प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे पहले मंगलवार शाम को इन कर्मचारियों ने विधानसभा घेराव का आयोजन किया। इस बीच कर्मचारी नवा रायपुर की सड़क पर उतर आए। विधानसभा जाने के लिए आगे बढ़ने लगे मगर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर इन्हें रोक दिया था। इससे गुस्साए संविदा कर्मचारी पुलिस से भी भिड़ गए। काफी देर तक हुए हंगामे के बाद संविदाकर्मी वापस अपने धरना स्थल पर लौटे। मगर उन्होंने जिला प्रशासन के अधिकारियों को चेताया कि आने वाले दिनों में उनका आंदोलन उग्र होगा। अब कर्मचारी आमरण अनशन की घोषणा कर चुके हैं।
संविदा कर्मचारियों का आज से आमरण अनशन शुरू
प्रदर्शन कर रहे संविदा कर्मचारी आज से आमरण अनशन शुरू करने जा रहे है। इस दौरान कर्मचारी अन्न-जल का का त्याग कर प्रदर्शन करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि, तूता स्थित धरना स्थल पर हमें पानी और शौचालय के लिए परेशान किया जा रहा है। कई बार बिजली काट दी जाती है। पानी का सप्लाई ठीक से नहीं होती। यहां प्रदेश के अलग-अलग जिलों से हजारों प्रदर्शनकारी पहुंचे हुए हैं। शायद यह आंदोलन को कुचलने का प्रयास है मगर हम पीछे हटने वाले नहीं।
45 हजार संविदा कर्मचारी कर रहें हड़ताल
छत्तीसगढ़ प्रदेश मे करीब 45 हजार संविदा कर्मचारी नियमतीकरण की मांगो को लेकर बीते 3 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। संविदा कर्मी मुख्यमंत्री भूपेश सरकार से लगातार नियमतीकरण की मांग करते चले आ रहे है। सुनवाई न होने से नाराज प्रदेश के संविदा कर्मियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश के करीब 45 हजार संविदा कर्मियों के हड़ताल पर जानें के कारण इसका असर शासकीय विभाग में दिख रहा है। अधिकांश विभाग में संविदा पद पर भर्ती कर्मचारियों में डाडा एंट्री आपरेटर , लिपिक , टैक्निशयन , द्वितीय तृतीय वर्ग के कर्मचारी व ऑफिस स्टाफ जैसे पदों पर कार्यरत है। इनके हड़ताल पर जाने के कारण शासकीय विभागों में परेशानी बढ़ गई है।