चीन ने हमारे बाजारों पर कब्जा कर लिया है जानते है डॉ सुमित्रा से...




चीन ने हमारे बाजारों पर कब्जा कर लिया है जानते है डॉ सुमित्रा से
डॉ सुमित्रा अग्रवाल
यूट्यूब आर्टिफीसियल ऑय को (११ लाख से अधिक दर्शक )
नया भारत डेस्क : आज हैरानी होती है यह देखकर कि किस तरह से चीन ने हमारे बाजारों पर कब्जा कर लिया है। कॉस्मेटिक्स, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक, इलेक्ट्रिकल, खिलौने व सजावटी आइटम्स के कारोबार में चीन में बनी चीजों की बड़ी हिस्सेदारी है। व्यापारी नेता अतुल कुमार जैन का तो यहां तक अनुमान है कि सभी ट्रेड को मिलाकर सालाना करीब 10 हजार करोड़ का कारोबार चीन के साथ यहां होता है। राजधानी के बहुत से कारोबारी सीधे चीन के शहरों से माल मंगाते हैं, जिनके कंटेनर मुंबई में उतरते हैं।
महिलाओं की पर्स से हजार करोड़ निकाल लेता है चीन
अमीनाबाद में कॉस्मेटिक्स के होलसेल कारोबारी विनोद अग्रवाल ने बताया कि लखनऊ में सालाना 2500 करोड़ रुपये की लिपस्टिक, पाउडर, परफ्यूम, क्रीम सहित अन्य सौंदर्य प्रसाधन बिक जाते हैं। इसमें से 40 फीसदी यानी करीब 1000 करोड़ के आइटम चीन के होते हैं।
खिलौनों पर 600 करोड़ तो सजावट पर 1200 करोड़ खर्च
नाका के होलसेल कारोबारी नीलेश अग्रवाल बताते हैं कि राजधानी व आसपास के जिलों के लोग चीन में बने खिलौनों पर 600 करोड़ और सजावटी आइटम पर सालाना 1200 करोड़ खर्च करते हैं। बच्चों के जितने भी खिलौने मार्केट में सजे हैं वह सब चीन में ही तैयार होते हैं। घरों की साज सज्जा के लिए खरीदे जाने वाले आइटम, लाइट, लैंप, झूमर, फाउंटेन, शो पीस, फर्नीचर सब में ज्यादातर चीन के होते हैं।
कपड़ा -- 30
सजावटी आइटम-- 80
इलेक्ट्रिकल -- 75
इलेक्ट्रॉनिक -- 70
मोबाइल -- 70
खिलौने -- 80
एलईडी टीवी -- 40
कॉस्मेटिक्स -- 40
प्रमुख ट्रेड का कारोबार
ट्रेड रुपये(करोड़में)
कपड़ा -- 1500
सजावटी आइटम-- 1200
इलेक्ट्रिकल्स -- 1000
कास्मेटिक -- 1000
इलेक्ट्रॉनिक्स -- 500
मोबाइल्स -- 650
खिलौने -- 600
एलईडी टीवी -- 300
लैपटॉप, कंप्यूटर -- 250
कुल -- 7000
नोट : आंकड़ों का स्रोत ट्रेड कारोबारी
हर महीने बिकने वाले 10 हजार एलईडी टीवी में 4000 चीन के होते हैं
नाका हिंडोला व्यापार मंडल के अध्यक्ष सतपाल सिंह मीत ने बताया कि राजधानी में हर महीने 10000 एलईडी टीवी बिकते हैं। इनमें 6000 तो ब्रांडेड कंपनियों के, जबकि 4000 चीन में तैयार किए होते हैं। इसके अतिरिक्त चीन में बनाए गए माइक, स्पीकर, और कई तरह की एसेसरीज भी खूब बिकती हैं, जिनका लखनऊ में सालाना 300 करोड़ का कारोबार होता है।
सस्ते मोबाइल के बाजार पर चीन का कब्जा
लखनऊ मोबाइल एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज जोहर बताते हैं कि जितने भी सस्ते मोबाइल बिक रहे हैं वह चीन के हैं। मोबाइल की 90 फीसदी एसेसरीज भी चीन से ही सप्लाई हो रही है। चीनी मोबाइल और एसेसरीज की राजधानी के बाजार में 70 फीसदी हिस्सेदारी है।
चीन में बने हैं प्रॉसेस हाउस
लखनऊ कपड़ा व्यापार मंडल के अध्यक्ष अशोक मोतियानी बताते हैं कि चीन में भारतीय उद्यमियों ने कपड़े के प्रॉसेस हाउस बना रखे हैं। इसकी वजह कपड़े की कम लागत में उसकी बेहतरीन फिनिशिंग होना है।
लखनऊ में सालाना जितना कपड़ा बिकता है, उसमें 30 फीसदी चीन का तैयार हुआ शामिल होता है, जो लगभग सालाना 1200 करोड़ रुपये का बिकता है, जिसमें रेडीमेड भी शामिल है। इसके अतिरिक्त 300 करोड़ रुपये के घर की सजावट के पर्दे, बेड शीट, चादर आज भी बिक जाते हैं।
मोदी सरकार के एक फैसले से लग गई चीन की वाट
भारत में ईयरबड्स, नेक बैंड्स और स्मार्टवॉच जैसे वियरेबल्स आइटम्स की मैन्यूफैक्चरिंग तेजी से बढ़ रही है। भारतीय ब्रांड्स ने देश में वियरेबल्स के 75 परसेंट मार्केट पर कब्जा कर लिया है। इससे चीन की एसेंबली लाइन्स पर बुरा असर हुआ है। वहां की फैक्ट्रियों के ऑर्डर में भारी गिरावट आई है और देश में एक के बाद एक कई फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं। पिछले साल भारत में करीब 8,000 करोड़ रुपये के वियरेबल आइटम्स की मैन्यूफैक्चरिंग हुई। इसकी वजह सरकार का एक फैसला है।
सरकार ने पूरी तरह से तैयार वियरलेबल आइटम्स के इम्पोर्ट पर 20 फीसदी बेसिक कस्टम ड्यूटी लगा दी थी। इससे कंपनियों ने चीन से मंगाने के बजाय देश में ही प्रॉडक्शन करना शुरू कर दिया। आज भारत दुनिया में वियरेबल्स मार्केट का सबसे बड़ा बाजार बनकर उभरा है। जानकारों का कहना है कि बोट (Boat) और गिजमोर (Gizmore) जैसे ब्रांड्स अधिकांश वियरेबल आइटम्स देश में ही बना रहे हैं। इन कंपनियों ने ठेके पर आइटम बनाने वाली कंपनी डिक्सन टेक्नोलॉजीज और ऑप्टीमस इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ हाथ मिलाया है। नोएडा की कंपनी Gizmore के चीफ एग्जीक्यूटिव संजय कलीरोना ने कहा कि वियरेबल्स एसेंबली चीन से भारत में शिफ्ट हो गई है। इसलिए चीन की एसेंबलिंग कंपनियों के पास कोई काम नहीं रह गया है। पहले हम वहां से पूरी तरह तैयार यूनिट्स मंगाते थे। लेकिन जबसे सरकार ने वियरेबल्स पर ड्यूटी लगाई, तबसे हम उन्हें सेमी नॉक-डाउन फॉर्म में मंगाते हैं और यहां उनकी एसेंबलिंग की जाती है। यही कारण है कि भारत को सप्लाई करने वाली कंपनियों के पास कोई ऑर्डर नहीं है।
सबसे बड़ा मार्केट
आईडीसी इंडिया (IDC India) के मुताबिक जनवरी से लेकर मार्च के बीच वियरेबल्स के डोमेसिट्क शिपमेंट्स में पिछले साल के मुकाबले 81 फीसदी तेजी आई और यह 2.5 करोड़ यूनिट पहुंच गई। इसके साथ ही चीन को पछाड़कर भारत दुनिया में वियरेबल्स का सबसे बड़ा मार्केट बन गया। बीजिंग का शिपमेंट चार फीसदी की गिरावट के साथ 2.47 करोड़ यूनिट रह गया। आईडीसी इंडिया के मुताबिक 2023 में भारतीय शिपमेंट 13.1 करोड़ पहुंच सकता है जो पिछले साल 10 करोड़ था। हालांकि भारतीय कंपनियां अब भी पार्ट्स के लिए काफी हद तक चीन की कंपनियों पर निर्भर हैं।
देश में स्मार्टफोन के मार्केट में चीन की कंपनियों का दबदबा है लेकिन वियरेबल्स इंडस्ट्री में स्थिति अलग है। इसमें बोट, नॉइज औ फायरबोल्ट जैसी भारतीय कंपनियों का दबदबा है। वॉल्यूम के हिसाब से देश के 75 फीसदी मार्केट पर देसी कंपनियों का दबदबा है। 2022 के अंत में देश में बिकने वाले 40 परसेंट वियरेबल्स देश में ही बनाए गए थे। अभी यह आंकड़ा 65 फीसदी पहुंच गया है और इस साल के अंत में इसके 80 परसेंट पहुंचने की उम्मीद है। बोट के चीफ एग्जीक्यूटिव समीर मेहता ने कहा कि 75 परसेंट ऑडियो प्रॉडक्ट्स और 95 फीसदी स्मार्टवॉच देश में ही बन रही हैं। पिछले साल यह आंकड़ा 20-25 फीसदी था। हालत यह हो गई है कि चीन की फैक्ट्रियों में काम आधा रह गया है।
सरकार का कदम
मेहता ने कहा कि पिछले डेढ़ साल में भारत में वियरेबल्स की खपत सबसे ज्यादा है। इसलिए कंपनियों ने मैन्यूफैक्चरिंग को भारत में शिफ्ट कर दिया है। यही वजह है कि चीन की फैक्ट्रियों के पास काम नहीं रह गया है और कई तो बंद हो चुकी हैं। बोट भारत में सात से आठ पार्टनर्स के साथ काम कर रही है। इनमें डिक्सन और वीवीडीएन टेक्नोलॉजीज शामिल है। चीन में कंपनी सिंफनी, मिनामी और छह अन्य कंपनियों के साथ काम कर रही है।
सरकार ने अप्रैल 2022 में Phased Manufacturing Programme (PMP) को नोटिफाई किया था। इसके बाद से देश में वियरेबल्स की मैन्यूफैक्चरिंग ने जोर पकड़ा। भारत ने फाइनेंशियल ईयर 2023 में 8,000 करोड़ रुपये के वियरेबल्स बनाए जबकि उससे पिछले साल यह आंकड़ा बहुत कम था। सरकार ने अप्रैल 2023 से सीबीयू के इम्पोर्ट पर 20 फीसदी बेसिक कस्टम ड्यूटी लगा दी थी। जानकारों का कहना है कि लोकल एसेंबली बढ़ाकर लो एवरेज सेलिंग प्राइज (ASP) को मेनटेन किया जा रहा है। आईटीसी का कहना है कि इस साल के अंत तक एएसपी 23 से 25 डॉलर तक आ सकता है जो पिछले साल 25 डॉलर था।