CG - बर्खास्तगी के बाद महिला जज बनी वकील, खुद बहस कर हाईकोर्ट से हासिल की जीत.....

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर निवासी एक महिला जज ने नारी सशक्तिकरण का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। दरअसल बर्खास्त की गई महिला जज ने अपने केस में खुद बहस कर हाई कोर्ट में बड़ी जीत हासिल की है।

CG - बर्खास्तगी के बाद महिला जज बनी वकील, खुद बहस कर हाईकोर्ट से हासिल की जीत.....
CG - बर्खास्तगी के बाद महिला जज बनी वकील, खुद बहस कर हाईकोर्ट से हासिल की जीत.....
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर निवासी एक महिला जज ने नारी सशक्तिकरण का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। दरअसल बर्खास्त की गई महिला जज ने अपने केस में खुद बहस कर हाई कोर्ट में बड़ी जीत हासिल की है। स्थायी समिति की अनुशंसा पर 7 साल पहले उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था, जिसके खिलाफ उन्होंने याचिका लगाई थी। इसके बाद विधि एवं विधायी विभाग और हाईकोर्ट ने अपील की थी। उनके पक्ष में फैसला आने पर हाई कोर्ट ने उन्हें नियुक्ति भी दे दी है।
 
दरअसल, बिलासपुर के सरकंडा में रहने वाली आकांक्षा भारद्वाज का चयन वर्ष 2012-13 में परीक्षा के जरिए सिविल जज के पद पर हुआ था। 12 दिसंबर 2013 को जारी आदेश के अनुसार उन्हें दो वर्ष की परिवीक्षा पर नियुक्त किया गया। उन्होंने 27 दिसंबर 2013 को ज्वाइन किया। इस दौरान एक सीनियर मजिस्ट्रेट ने उसने अनुचित व्यवहार किया, लेकिन नई ज्वाइनिंग होने से उन्होंने इसकी शिकायत नहीं की। प्रारंभिक प्रशिक्षण के बाद उन्हें अगस्त 2014 में अंबिकापुर में प्रथम सिविल जज वर्ग-2 के पद का स्वतंत्र प्रभार दिया गया।
 
इस बीच अधिकांश सीनियर मजिस्ट्रेट का तबादला हो गया। अंबिकापुर में सिर्फ 4 सिविल जज बचे। सभी एक सीनियर मजिस्ट्रेट के अधीन थे। आरोप है कि जब भी वे सीनियर मजिस्ट्रेट के पास न्यायिक मामलों में मार्गदर्शन के लिए जाती, तो उनसे अनुचित व्यवहार किया जाता था। जिसे लेकर उन्होंने उच्चाधिकारियों से पहले मौखिक और बाद में लिखित शिकायत की। उनकी शिकायत पर हाई कोर्ट ने आंतरिक शिकायत कमेटी बनाई।
 
कमेटी ने जांच के बाद 6 अप्रैल 2016 को रिपोर्ट सौंपी। उसमें सीनियर मजिस्ट्रेट के खिलाफ शिकायत निराधार पाई गई। कमेटी की रिपोर्ट के खिलाफ अपील की गई, पर उसे भी 5 जनवरी 2017 को खारिज कर दिया गया। तब हाई कोर्ट की सिफारिश पर आकांक्षा को 9 फरवरी 2017 को विधि-विधायी विभाग ने बर्खास्त कर दिया। जिस पर उन्होंने बर्खास्तगी के खिलाफ याचिका लगाई थी, और मामले की सुनवाई के दौरान खुद अपना पक्ष रखा।
 
हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने मई 2024 में उनके पक्ष में फैसला देते बैक वेजेस के बगैर सिविल जज-2 के पद पर वरिष्ठता के साथ बहाल करने के आदेश दिए थे। सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट और विधि एवं विधायी विभाग ने अपील की थी। महिला सिविल जज ने सिंगल बेंच के फैसले के एक हिस्से को चुनौती दी थी। इस पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई, और हाई कोर्ट ने अपील मंजूर की थी। इसके बाद 3 दिसंबर 2024 को उनकी पोस्टिंग कर दी गई है। उन्हें महासमुंद में पदस्थ किया गया है।