केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मोतियाबिंद और सिजेरियन डिलीवरी योजना की गई बंद : आम आदमी पार्टी ने जताया विरोध




जनता स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में हताहत है परंतु केंद्र व राज्य सरकार मिलकर जनता के पैसों की रेवड़ी खा रहे - तरुणा साबे बेदरकर
बस्तर में सरकारी स्वास्थ्य सुविधा लचर है, डिलीवरी योजना बंद होने पर हजारों महिलाओं की बनेगी जान पर जोखिम - तरुणा साबे बेदरकर
जगदलपुर / छत्तीसगढ़ । मोतियाबिंद और सिजेरियन डिलीवरी की सेवा योजना को केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा बन्द किये जाने पर आम आदमी पार्टी ने प्रेस नोट जारी करते हुए विरोध दर्ज किया है।
गौरतलब है कि पूर्व में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा स्मार्ट कार्ड के जरिये मोतियाबिंद और सिजेरियन डिलीवरी का इलाज गरीब परिवारों के लिए सम्भव किया गया था। लेकिन स्मार्ट कार्ड से ये दोनों सुविधाओ को अब हटा दिया गया है। आम आदमी पार्टी बस्तर ज़िलाध्यक्ष तरुणा साबे बेदरकर ने कड़े शब्दों में कहा कि बहरहाल जनता की जान और स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मुहिम छेड़ दी गयी है, कुछ महीनों पहले मोतियाबिंद के इलाज के लिए आने वाले फण्ड को जनता तक पहुंचाने की सुविधा बंद कर जनता की स्वास्थ से खिलवाड़ किया गया। इस योजना को बंद हुए चंद दिन भी नही हुए और अब नेशनल हेल्थ अथॉरिटी द्वारा सिजेरियन डिलीवरी को भी बंद कर दिया गया है। बस्तर जैसे जिले में जहां आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है ग्रामीण अपना बुखार का इलाज पैसे से करवाने में सक्षम नही है वहां अब अगर गर्भवती आदिवासी महिलाओं को ऑपेरशन से जचकी करानी पड़ी तो उन्हें अपने जेब का पैसा लगाना पड़ेगा या फिर सरकारी अस्पताल में इलाज करवाना पड़ेगा।पूरे जिले में महारानी और डिमरापाल कॉलेज में ही सिजेरियन डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध है। ग्रामीण क्षेत्र में नार्मल डिलीवरी तक के लिए पूर्ण सुविधा नही है ऐसे में सिरेजियन डिलीवरी होना नामुकिन है। अब अगर जिले के चुनिंदा अस्पतालों में जाये तो एक ही समय में अधिक संख्या में डिलीवरी करवा पाना मुमकिन नही होगा, अगर माँ और बच्चे की जान बचाना हो तब आम आदमी को निजी नर्सिंग होम या अस्पताल का सहारा लेना पड़ता है। लेकिन इसके लिए 40 से 50 हजार तक का खर्च भी उठाना पड़ता है।
इस पर आम आदमी पार्टी जिलाध्यक्ष तरुणा साबे बेदरकर जो कि एक महिला है ने कहा है कि बस्तर जैसे क्षेत्र में आम गरीब आदिवासी महिला आज मासिक धर्म आने पर पैड के लिए पैसे तक कि व्यवस्था नही कर पाती हैं वे कहां से इतने पैसों का इंतेजाम कर पाएगी इस तरह उचित व्यवस्था के ना मिलने पर डिलीवरी के समय माँ और बच्चे की जान भी जा सकती है।
महिलाओं के सम्मान और स्वास्थ्य को मोहरा बना कर वोट की राजनीति करने वाले असंवेदनशील केंद्र और राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी।
आगे तरुणा ने कहा कि जब केंद्र सरकार द्वारा योजना को बंद किया गया तो राज्य में बैठी कांग्रेस सरकार को इसका विरोध करना चाहिए था लेकिन राज्य सरकार जनता की पैसों की रेवड़ी इकठा कर रहे है। जनता के हक के लिए दिल्ली जैसे स्वास्थ्य सुविधा दिलवाने हर आम आदमी पार्टी के सैनिक प्रतिबंध है। यह सुविधा पुनः आरंभ किया जाए इस हेतु बहुत जल्द रूपरेखा तैयार कर लोगों के स्वास्थ्य के लिए लड़ाई लड़ेगी।