विश्व मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह पर विशेष मनोचिकित्सक को बताएं अपने मन की पीड़ा- प्रीति चांडक (क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट)

विश्व मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह पर विशेष मनोचिकित्सक को बताएं अपने मन की पीड़ा- प्रीति चांडक (क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट)

नारायणपुर 8 अक्टूबर। आजकल मेरे कानों में बिना किसी के बोले ही आवाज सुनाई दे रही , किसी के सामने ना होने पर भी कोई दिखाई दे रहा है ,खुद को बहुत अकेला महसूस करने लगा हूं, पहले की तरह किसी काम में अब मन भी नहीं लगता, सारा दिन उदास सा लगने लगा है, नींद भी सही से नहीं आ रही है। लेकिन यह बात किससे कहूं? कैसे कहूं?। 

 

उपरोक्त लक्षण किसी भी व्यक्ति में हो सकते है लेकिन हमारे समाज में इसे एक निंदा के रूप में देखा जाता है, जिसके कारण ऐसे व्यक्ति सामने आकर अपनी परेशानियों को बताने में संकोच करते हैं, उन्हें लगता है कि अगर वह किसी मनोचिकित्सक या चिकित्सकीय मनोवैज्ञानिक के पास जाएंगे, तो लोग उन्हें पागल कहेंगे, इतना ही नहीं उन्हें लगता है कि कहीं उन पर मानसिक रोगी का ठप्पा ना लग जाए। दूसरी तरफ कई बार ऐसे लोगों के परिवार वाले इस बात को स्वीकार ही नहीं कर पाते हैं कि उसे किसी प्रकार की मानसिक बीमारी है उन्हें लगता है कि उस पर किसी ऊपरी साया का प्रकोप है और वह रोगी का झाड़-फूक करवाते रहते हैं। उपरोक्त दोनों कारणों से देरी होने के कारण बीमारी की तीव्रता और बढ़ जाती है और जब मनोचिकित्सकीय इलाज के लिए जाते हैं, तो सुधार होने में भी उतनी ही देर लगती है।

 

इस लेख के माध्यम से मेरा यही संदेश है कि समाज की जिम्मेदारी है कि वह ऐसे लोगों की पहचान कर उनकी सहायता करें ,ना कि उन्हें हेय दृष्टि से देखें। वे समझे कि दिमाग भी शरीर का एक अंग है, जैसे लीवर, हृदय, किडनी ,फेफड़ा आदि। जैसे इन सबकी कार्य प्रणाली के फंक्शन में कोई कमी आ जाती है जिसकी वजह से हम बीमार हो जाते है। उसी प्रकार दिमाग भी हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो व्यक्ति के सोच, विचार और हर चीज को नियंत्रित करता है। इसलिए हमें समझना होगा कि मानसिक बीमारी भी एक बीमारी है ना कि देवी देवता का प्रकोप या कोई बाहरी शक्ति का प्रकोप। 

 

झाड़-फूंक करवाना बहुत से लोगों की सामाजिक व सांस्कृतिक आस्था हो सकती है लेकिन लोगों को यह समझना होगा कि मानसिक स्वास्थ्य में सुधार के लिये समय रहते मनोचिकित्सकका इलाज करवाना जरूरी है ताकि दवाइयों और काउंसलिंग (साइकोथेरेपी) के द्वारा रोगियों के जीवन को एक सही दिशा दी जा सके, जिससे वह अपनी जिंदगी फिर से सामान्य रूप से जी पाएं। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाने को प्रति वर्ष 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता है जिसका उद्देश्य लोगों को मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित बीमारियों के लक्षणों के बारे में जागरूक करना और उनकी पहचान कर सही समय में इलाज करवाना है। ऐसे में समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व बनता है कि अपने आस पास के ऐसे व्यक्ति जो मानसिक रूप से अस्वस्थ है उनका ख्याल रखें और समय रहते अपने नजदीकी शासकीय अस्पताल में उनका इलाज कराएं।