CG बिजली बिल के नाम पर स्कैम का पर्दाफाश : बिजली कनेक्शन काटने के नाम पर धमकी देकर ऑनलाइन ठगी…5 दिनों तक पुलिस बनी सड़क ठेकेदार…फिर जो हुआ…ऐसे खुला राज ,इस तरह स्कैम को देते थे अंजाम...1 गिरफ्तार, 3 फरार…
Scam busted in the name of CG electricity bill: Online fraud by threatening to cut electricity connection दुर्ग पुलिस ने झारखंड के जामताड़ा जिले से ऑनलाइन ठगी के एक आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। आरोपी लोगों को फोन करके बिजली कनेक्शन कट जाने की जानकारी देता था। इसके बाद जो भी व्यक्ति उसके झांसे में आ जाता था उससे एप डाउनलोड करवाकर ऑनलाइन ठगी करता था। आरोपी ने बताया कि वह ऐसा करके 1 से डेढ़ करोड़ रुपए की ठगी कर चुका है।




Scam busted in the name of CG electricity bill: Online fraud by threatening to cut electricity connection
नया भारत डेस्क : दुर्ग पुलिस ने झारखंड के जामताड़ा जिले से ऑनलाइन ठगी के एक आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। आरोपी लोगों को फोन करके बिजली कनेक्शन कट जाने की जानकारी देता था। इसके बाद जो भी व्यक्ति उसके झांसे में आ जाता था उससे एप डाउनलोड करवाकर ऑनलाइन ठगी करता था। आरोपी ने बताया कि वह ऐसा करके 1 से डेढ़ करोड़ रुपए की ठगी कर चुका है।
जानकारी के मुताबिक सुंदरनगर कोहका निवासी पुष्पेन्द्र गजेन्द्र ने स्मृतिनगर चौकी में 14 जुलाई को रिपोर्ट लिखाई कि 10 जुलाई को उनके मोबाइल नंबर पर एक अननोन नंबर से वॉट्सएप मैसेज आया। इसमें लिखा था कि उनका बिजली बिल जमा नहीं हुआ है, इसलिए कनेक्शन काट दिया जाएगा। यदि बिजली कनेक्शन कटने से रोकना चाहते हैं तो दिए गए बिजली विभाग के मोबाइल नंबर पर अधिकारी से बात करें। इस पर गजेंद्र ने वॉट्सएप पर दिए गए नंबर पर कॉल किया। दूसरी ओर से जिस आदमी ने फोन रिसीव किया, उसने खुद को बिजली विभाग का कर्मचारी बताया। कनेक्शन कटने से रोकने के लिए अपने सीनियर अधिकारी से बात करने कहा और एक नया नंबर दिया।
गजेंद्र ने नए नम्बर पर कॉल किया तो उन्हें Quick Support नामक एप्लीकेशन डाउनलोड कराया गया। इसे डाउनलोड करने पर उनके बैंक खाते से 148030 रुपए कट गए। इसकी शिकायत पर स्मृति नगर चौकी पुलिस ने अपराध दर्ज किया। इस मामले में एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव ने एक जॉइंट टीम का गठन किया। टीम के सदस्यों ने प्रार्थी से लंबी पूछताछ कर जानकारी जुटाई। जिन मोबाइल नंबरों से बात हुई और जिन बैंक खातों में पैसे गए, उनकी डिटेल ली गई। जिन नंबरों से कॉल आया था, वे सभी बंद हो गए थे। पुलिस ने तकनीकी मदद से पता लगाया कि आरोपियों का लोकेशन झारखंड के जामताड़ा के आसपास है।
क्राइम ब्रांच की एक टीम जामताड़ा के लिए रवाना हुई। टीम ने जामताड़ा से 50 किलोमीटर दूर पहाड़ी एवं दुर्गम क्षेत्र में अपना ठिकाना बनाकर आरोपी की पतासाजी शुरू की। जामताड़ा में बाहरी वाहन और लोगों की उपस्थिति का पता चलने पर आरोपी तक पहुंच पाना संभव नहीं था। टीम ने अपनी गाड़ी का नम्बर प्लेट बदलकर और अपने कपड़े स्थानीय लोगों की तरह बनाकर पतासाजी और निगरानी की जा रही थी । इसी दौरान स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने पर आरोपी की पहचान मुकेश मण्डल (उम्र 27 वर्ष) निवासी ग्राम झिलुवा टोला, खरबनी थाना नारायणपुर जामताड़ा ( झारखण्ड ) के रूप में हुई। आरोपी के संबंध में अन्य विस्तृत जानकारी जुटाने पर पता चला कि आरोपी मुकेश मण्डल 2020 में सायबर ठगी के किसी मामले में पूर्व स्थानीय जामताड़ा पुलिस द्वारा पकड़कर जेल भेजा गया था। उक्त जानकारी के आधार पर स्थानीय पुलिस से संपर्क कर आरोपी का फोटो हासिल किया गया।
फोटो मिलने के बाद टीम ने आरोपी की पतासाजी उसके आने-जाने के रास्तों, उठने-बैठने के स्थानों पर लगातार निगरानी रखी जा रही थी। आरोपी के संबंध में यह भी जानकारी मिली थी कि वह प्रतिदिन एक मटन की दुकान पर शाम को मटन खरीदने आता है। पुलिस टीम मटन दुकान के पास स्थानीय ग्रामीण पहनावे में मौजूद रहकर आरोपी पर नजर रखी हुई थी। इसी दौरान शाम करीब 05.30 बजे आरोपी एक काले रंग की पल्सर मोटर सायकल में आया और मटन दुकान से मटन खरीदने लगा। तभी आसपास मौजूद टीम के सदस्यों द्वारा घेराबंदी कर आरोपी मुकेश मण्डल को पकड़ा गया।
वारदात का तरीका
आरोपी प्रारंभिक पूछताछ पर गुमराह करता रहा परन्तु टीम द्वारा सघन एवं तथ्यात्मक तकनीकी आधार पर पूछताछ करने पर आरोपी मुकेश मण्डल ने बताया कि वह कक्षा 9 वीं तक पढ़ा है। आसपास के गांव के लोगों से सायबर ठगी का तरीका सीखकर, अपनी स्वयं की एक टीम बनाकर सायबर ठगी का काम करता है। विस्तृत पूछताछ पर आरोपी ने बताया कि वह अपने साथी अजय मण्डल , अक्षय उर्फ पिन्टू मण्डल और रंजीत मण्डल के साथ मिलकर काम करता है। मुकेश मण्डल Google के कस्टमर केयर से Developer से संपर्क करके 12 % नाम की एक App ID Create कराता है और उससे मोबाइल नम्बरों का डाटा खरीदता है।
Developer द्वारा 1000-1500 रुपए में 10,000 मोबाइल नम्बरों का डाटा उपलब्ध करा दिया जाता है। इसके बाद अजय मण्डल और अक्षय मण्डल बिजली विभाग का कर्मचारी व अधिकारी बनकर मोबाईल फोन पर Whatsapp पर बिजली बिल बकाया होना, जमा नहीं करने पर बिजली कनेक्शन कट जाने का मैसेज भेजते है। साथ ही, बिजली कनेक्शन कटने से बचाने के लिये बिजली विभाग के कर्मचारी व अधिकारी का सम्पर्क मोबाइल नम्बर देते हैं , जिस पर प्रार्थी के द्वारा फोन करने पर Quick support नाम का एक एप्लीकेशन प्रार्थी के मोबाइल पर डाउनलोड कराया जाता है। इससे प्रार्थी के मोबाइल का एक्सेस आरोपियों के द्वारा अपने फोन पर लेकर प्रार्थी के बैंक खातों से रकम अपने फर्जी नाम व पता से विभिन्न खातों में ट्रांसफर करा लिया जाता है। रंजीत मंडल बैंक अकाउण्ट का प्रबंधन व संचालन करता है। ठगी की रकम को आपस में बांट लेते हैं।
आरोपियों ने प्रार्थी गजेंद्र के खाते से 148030 रुपए कोटक महिन्द्रा बैंक व MPL Gamming App में ट्रांसफर कर लिए थे। बाद में रंजीत मण्डल द्वारा बैंक में ट्रांसफर किए गए रकम को निकाल कर आपस में बांट लिये थे। मुकेश मण्डल की निशान देही पर उसके घर से घटना में प्रयुक्त 02 नग मोबाइल व सिम कार्ड 01 नग लैपटॉप , 02 नग की - पेड मोबाइल फोन, 03 नग फोन के खाली डिब्बे और ठगी गई रकम 35,500 रुपए बरामद कर जप्त किया गया। प्रकरण के अन्य आरोपी अजय मण्डल, अक्षय उर्फ पिन्टू मण्डल, रंजीत मण्डल की पतासाजी उनके निवास में दबिश देकर की गयी, लेकिन मुकेश मण्डल के पकड़े जाने की जानकारी मिलने के कारण उक्त आरोपी फरार हो गये। फरार आरोपियों की पतासाजी सायबर पुलिस स्टेशन जामताड़ा के सहयोग से की जा रही है । 22 सितंबर को आरोपी मुकेश मण्डल को जामताड़ा से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमाण्ड पर दुर्ग लाया गया, जिसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर पुलिस रिमाण्ड लिया गया है।