साल के आखिरी दिन प्रकृति तिहार का शुभारंभ ब्लॉक में नया झरना का हुआ उदय झुइंज सतबहिनी का नामकरण ग्राम सभा ने किया

साल के आखिरी दिन प्रकृति तिहार का शुभारंभ ब्लॉक में नया झरना का हुआ उदय झुइंज सतबहिनी का नामकरण ग्राम सभा ने किया

प्रकृति का अद्भुत नजारा खरसुरा के जंगल मे स्थित झुइंज सतबहिनी जलप्रपात, देख लोगो को याद आता है फ़िल्म बाहुबली का सीन।

उदयपुर सितेश सिरदार:– फ़िल्म बाहुबली में हजारों फीट ऊंची ऊंची झरने दिखाया गया है, जिसे पर्दे पर देखने से ही दर्शकों का मन प्रफुल्लित हो जाता है। आज हम आपको एक ऐसे ही झरने के बारे में बताने जा रहे है, जो फ़िल्म बाहुबली के झरने जैसा तो नही पर इसे देख आपको फ़िल्म बाहुबली का बरबस ही याद आ जायेगा। जी हाँ स्थानीय लोग इसे खरसूरा झुंझ झरना कहते है लेकिन 31 दिसंबर 2021 दिन शुक्रवार को झूइंज सतबहिनी जलप्रपात नामकरण दिया गया।सरगुजा जिले के उदयपुर से लगभग 15 किमी दूर खरसूरा के पावन धरा के जंगल में स्थित झुइंज सतबहिनी जलप्रपात वाला रास्ता है और यहां से पैदल या बाइक पर जंगलो और पहाड़ो पर स्थित पथरीली पगडंडी पर चलते हुए स्थित प्रकृति का अद्भुत नजारा झरना स्थित है। इस झरना को देखने के लिए पहाड़ के ऊपर बहकर आ रही नदी से 100 फिट नीचे उतरना पड़ता है,झरने को देखने उसके नीचे तक जाने के लिए प्रकृति प्रेमियों को जो सफर में तकलीफ,थकावट और घुटनों में दर्द होता है,उन तकलीफों को झरने की कलरव और झरने से निकलने वाली ठंडी हवा की बयार हर लेती है।

उदयपुर तहसील के लिए वरदान साबित हो सकता है झरना आवश्यकता है सवारने की

कुछ दिनों पहले शोशल साइट्स के माध्यम से प्रचारीत हुए खरसूरा झुंझ झरना जो अब झुइंज सतबहिनी जलप्रपात के नाम से जाना जाएगा। झुइंज सतबहिनी जलप्रपात नाम का ये झरना शायद पूरे उदयपुर तहसील में ऐसा झरना और कही नही देखने को मिलेगा है।आज इसे देखने दूर दराज से प्रतिदिन सैकडो, हजारों की संख्या में लोग बीते सालों से आ रहे है। इस झरने तक जाने के लिए कोई सहूलियत नही है फिर भी लोग अपनी जान को जोखिम में डाल कर जा रहे है, क्योंकि प्रकृति का यह नजारा लोगो को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। तभी तो व्हाट्सअप,फेसबुक जैसे साइट्स में इस झरने का मात्र वीडियो डाला गया है, आने जाने का मार्ग या उसके बारे में विस्तृत जानकारी नही मिलने के बाद भी लोग पूछते पूछते उक्त झरने तक पहुच जाते है। इस झरने को लेकर शासन प्रशासन सहित जनप्रतिनिधि यदि थोड़ा प्रयास करे तो आने वाले समय मे पिकनिक स्पॉट तो है ही लेकिन जाने-माने विख्यात पिकनिक स्पॉट के तौर पर ये उदयपुर ब्लाक के लिए उपलब्धि साबित हो सकता है। आवश्यक्ता है तो मात्र पहुच मार्ग और झरने के ऊपर में सीढ़ी और रैलिंग की व्यवस्था हो जाता तो काफी अच्छा होता मोड़ो के लिए झुइंज सतबहिनी जलप्रपात जाने के लिए सूचकांक बोर्डो की आवश्यकता है । 

सुरक्षा के आभाव एवम रैलिंग नहीं होने से एक दो लोग उपर से गिरे।

झुइंज सतबहिनी जलप्रपात झरने को देखने और प्रकृति की गोद मे समय बिताने जाने वाले प्रकृति प्रेमियो में से एक दो ऐसे है जिन्होंने झरने के तल मैं फिसल कर नीचे गिर गए जिससे एक आदमी का सिर फट गया लेकिन इलाज होने के बाद बाल-बाल बच गया। खरसुरा के गांव के लोगों ने बताया कि झरने के तल तक जाने की लिए एक व्यक्ति ठलान से उसका पैर फिसल गया और ठलान से लुढ़कने लगा जिसके चलते उसके सिर पर गंभीर चोट आई, इस प्रकार की घटना दोबारा न हो इसके लिए ठलान पर सीढ़िया का निर्माण किया जाना चाहिए। तथा साथ ही झरने के ऊपर लोहे से घेरा रैलिंग लगाया जाना चाहिए, ताकि कोई भी हादसा न हो। कोई ऊपर से नीचे किसी भी कारण से न गिरे।

सरपंच प्रतिनिधि संजय सिंह झरने तक प्रकृति प्रेमियों को पहुचाने हमेशा रहते है तैयार

लोग दूर दराज से खरसुरा में स्थित झुइंज सतबहिनी जलप्रपात के झरने को देखने के लिए यदा कदा आते रहते है, कुछ तो पूछते हुए भटकते भटकते झरने तक पहुच जाते है, और कुछ जो जानते है कि सरपंच पति संजय सिंह उन्हें झरने तक बिना किसी सवाल और स्वार्थ के पहुचा देंगे वे उन्हें झरने तक चलने का आग्रह करते है, और सरपंच पति उन्हें सहर्ष झरने तक घुमाने ले जाते है। झरने के आस पास झरने के बगल में सीढ़ी नुमा, ढोढी का निर्माण , भूल भुलय्या जगह, और जंगल मे फलदार वृक्षो के साथ फुलवारी जैसा अनुभव, और हरे भरे पेड़ पौधों भरमार सघन जंगल और उची नीची पहाड़ो के बीच स्थित खरसुरा का झरना प्रकृति प्रेमियों के लिए लुभावना जगह तो है ही इसी के साथ यहां स्थित जंगल के अंदर स्थित फलदार वृक्ष जिसमे आम ,जामुन, आंवला, महुवा, बेल, कैत एवम लम्बे घने विशालकाय वृक्ष इस जंगल को और भी लुभावना और डरावना बनाता है । बारिश के महीनों से लेकर दीपावली तक झरने का पानी लगता है लुभावना ठंड के दिनों में सबसे ज्यादा पर्यटक यहां आते हैं पिकनिक मनाने व घूमने सरपंच पति संजय सिंह के द्वारा पूछने पर बताया गया कि बारिश के महीनों में सही बारिश होने पर झरने का सही आकार और खूबसूरती दिखाई देता है, जो बारिश के महीनों से लेकर दीपावली तक बना रहता है बाकी के महीनों में झरने का आशिक खूबसूरती ही दिख पाता है। कारणों पर यदि गौर करे तो बारिश में बहकर आने वाली बारिश का पानी पहाड़ो के ऊपर से लगभग 150 फ़ीट नीचे गिरने वाले झरने को खूबसूरती प्रदान करता है वही बारिश के बाद दीपावली तक जमीन से आशिक रूप में निकलने वाले प्राकृतिक पानी नाले से बहते हुए झरने तक जाकर झरने को कम पानी मे भी निखारती है। तथा ठंड के दिनों में झरने में कम पानी होने से पर्यटक नीचे में पिकनिक मनाते हैं।ग्राम वासियों के द्वारा पूछने पर बताया कि सुदूर वनांचल खरसुरा में जहां लगभग कई आदिवासी सहित अन्य परिवार निवास करते है। यंहा झुंझ सतबहिनी जलप्रपात में बिजली और पानी की सुविधा पहुच जाता तो बहुत ही अच्छा रहता। गांव वाले बताते हैं कि हमारा गाव विकाशखंड के आखिरी छोर के आस पास बसा है। झुइंज सतबहिनी जलप्रपात के लिए यदि सड़के और सूचकांक बोर्ड सहित सीढ़ी बनाया जाता है, तो गाव का अस्तित्व में सहायता मिल सकता है।ऊंची नीची पथरीले पगडंडी से तो जैसे तैसे महिलाये एवम बच्चे आगे बढ़ जाएंगे परंतु प्रकृति के मनोहर दृश्य को देखने के लिए पहाड़ के ऊपर से सीधी ढ़लान वाले लगभग 150 फिट के सफर में यदि किसी महिला या बच्चे का पैर फिसल गया तो मौत न सही पर बुरी तरह से घायल होने की पूरी संभावना है, यही वजह है कि उक्त झरने तक अधिकांश व्यवस्क पुरुषों को जाते देखा गया है , परन्तु यदि उक्त पहाड़ पर 150तट से 200 फ़ीट का सीढ़िया बना दिया जाता है तो पूरे परिवार के लिए झरना देखना सुगम हो सकता है।

30 दिसंबर व 1 जनवरी को पिकनिक मनाने वाले पर्यटकों की उमड़ी भीड़

अंबिकापुर दक्षिण सरगुजा वन मंडल के हृदय स्थल ग्राम पंचायत खरसुरा में 31 दिसंबर 2021 दिन शुक्रवार को नव जलप्रपात जिसका नाम जो झूंझ सतबहिनी जलप्रपात नामकरण किया गया विकासखंड उदयपुर में एक ऐतिहासिक पहल है, जिसमें नव वर्ष 2022 की स्वागत में प्रकृति वंदन अभिनंदन करते विलुप्त प्रकृति की धरोहर झरना जिसे पूर्व में यूं ही झुंझ के नाम से संबोधित किया जाता था परंतु प्रकृति को शायद 31 दिसंबर 2021 का दिन कि इंतजार था जिसमें हजारों दूरदराज के नागरिकों समेत ब्लॉक जनप्रतिनिधियों की गरिमामई उपस्थिति मे 31 दिसम्बर को झरना धन्य हो गया जिसे अब झुइंज सतबहिनी जलप्रपात के नाम से जाना जाएगा। नवीन नामकरण के साक्षी बने सरगुजा विधायक प्रतिनिधि सिद्धार्थ सिंह देव,ब्लॉक अध्यक्ष श्रीमती भोजवन्ती सिंह, ब्लॉक उपाध्यक्ष नीरज मिश्रा,जनपद सदस्य सलका श्रीमती सरिता महंत, ललाती सरपंच आसाराम, सचिव राजेश, पटवारी क्षितिज ग्रामसेवक जनक पैकरा खरसुरा सरपंच पति संजय कुमार पैकरा, खरसुरा सरपंच श्रीमती कलेश्वरी पैकरा,उत्तम जयसवाल ,भरत लाल गुप्ता, शिवचरण पैकरा , शिवरीनारायण ,मनमोहन सिंह ,भरत चौधरी, समस्त पंचगन के सानिध्य में देवगढ़ मंदिर पुजारी श्री कांता प्रसाद द्वारा वैदिक विधि विधान से नए नामकरण के रूप में स्थानीय देवी-देवताओं समेत झुंज सतबहिनी जलप्रपात वा 36 कोटि देवी-देवताओं का पूजा अर्चना कर नामकरण का जयकारा सामूहिक रूप से लगाते हुए विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आतिशबाजी के साथ एक नए पहल की शुरुआत उपस्थित जन समुदाय के समक्ष संपन्न किया गया संस्कृति कार्यक्रम में सुआ, सैला नृत्य डंडा के साथ ही सायन कालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम में रामायण डांस छैला करमा ददरिया इत्यादि रात्रि कालीन तक उत्सव मनाया गया। नामकरण के दूसरे दिन 1 जनवरी 2022 को विभिन्न स्थानों से आए ग्राम वासियों ने नए वर्ष का लुक बड़े आनंद एवं उत्साह के साथ झुंज सतबहिनी जलप्रपात में उत्सव मनाया एवं दिनभर वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रम शनिवार 1 जनवरी को संपन्न किया गया उक्त कार्यशाला से पूरा क्षेत्र काफी हर्षित एवं प्रसन्न मुद्रा में है सभी ने मांग किया है कि शासन प्रशासन उस दुर्लभ एवं प्राकृतिक दर्शनीय स्थल के साथ-साथ झरने का सौंदर्य करण एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं अति शीघ्र उपलब्ध कराने की मांग की है।

खरसुरा सतबहिनी जलप्रपात में 30 दिसंबर को नामकरण के साथ सैकड़ों पर्यटकों की भीड़ रही, वही 1 जनवरी को पिकनिक मनाने वाले आस-पास के गांव सहित पर्यटकों की भीड़ सैकड़ों की संख्या में उमड़ पड़ी