Narak Chaturdashi 2022 : नरक चौदस 2022 का शुभ मुहूर्त, स्नान विधि, पूजा विधि…नरक चौदस के दिन इन तीन कामों को करना न भूलें…जानें इस दिन का महत्व…

Narak Chaturdashi 2022 Narak Chaturdashi 2022: Auspicious time of Narak Chaudas 2022, bathing method, worship method… do not forget to do these three things on the day of Narak Chaudas

Narak Chaturdashi 2022 : नरक चौदस 2022 का शुभ मुहूर्त, स्नान विधि, पूजा विधि…नरक चौदस के दिन इन तीन कामों को करना न भूलें…जानें इस दिन का महत्व…
Narak Chaturdashi 2022 : नरक चौदस 2022 का शुभ मुहूर्त, स्नान विधि, पूजा विधि…नरक चौदस के दिन इन तीन कामों को करना न भूलें…जानें इस दिन का महत्व…

 

Narak Chaturdashi 2022

नया भारत डेस्क : इस दिन ब्रह्ममुहूर्त में स्नान न करने वाला नरक का भागी माना जाता है। वहीं नरक चौदस के दिन यमराज के अलावा हनुमान पूजा, श्रीकृष्ण पूजा, काली पूजा, शिव पूजा और भगवान वामन की पूजा की जाती है। मान्यता के अनुसार इस दिन इन 6 देवों की पूजा करने से समस्त प्रकार की परेशानियों मिट जाती हैं।

नरक चतुर्दशी 2022 मुहूर्त:

अभ्यंग स्नान मुहूर्त - 04:52 AM से 06:13 AM

अवधि - 01 घण्टा 20 मिनट्स

नरक चतुर्दशी के दिन चन्द्रोदय का समय - 04:52

दरअसल पांच दिवसीय पर्व दीपावली के पहले दिन धनतेरस के बाद दूसरे नंबर पर नरक चतुर्दशी का त्योहार मनाया जाता है, इसे रूप चौदस या काली चौदस भी कहा जाता हैं। वहीं कृष्‍ण चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि भी मनाई जाती है। तो आइये जानते हैं कि इस साल यानि 2022 का ये पर्व क्यों है खास साथ ही जानते हैं इस दिन के शुभ मुहूर्त व वह बातें जो आप जानना चाहते हैं।

 

ये तीन काम जरूर करें

 

1. घर से कबाड़ बाहर निकालें

नरक चौदस के दिन घर की अच्छे से साफ सफाई करनी चाहिए. इस दिन घर के हर कोने की सफाई करें और घर का सारा कबाड़ बाहर निकाल दें. घर में रखे खाली पेंट के डिब्‍बे, रद्दी, टूटे-फूटे कांच या धातु के टूटे या चटके बर्तन आदि सारा सामान बाहर निकालना चाहिए. इसके अलावा अगर कहीं टूटा फर्नीचर या सजावटी सामाना हो तो उसे भी घर से बाहर निकाल दें. माता लक्ष्मी के आगमन के लिए घर के वातावरण को स्वच्छ रखना जरूरी है.

 

2. शरीर पर तेल और उबटन लगाना

घर के हर सदस्य को उबटन आदि लगाकर शरीर की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए. माना जाता है कि इस दिन उबटन लगाने और शरीर पर तेल मालिश करने से सौंदर्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है.

 

3. यमदीप जलाना

नरक चौदस के दिन शाम के समय चार बत्‍ती वाला मिट्टी का दीपक जलाना चाहिए. ये दीपक यमराज को समर्पित होता है. मान्यता है कि इसे जलाने से अकाल मृत्यु और नरक की यातनाओं से मुक्ति मिलती है. इस दीपक को घर के मुख्य द्वार पर नाली या कूड़े के ढेर के पास रखें. जब तक ये दीपक जले, इस पर निगरानी रखें. दीपक विदा होने के बाद इसे घर के अंदर लाकर रख लें.

नरक चतुर्दशी स्नान विधि :
1. नरक चतुर्दशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में पूर्व उठकर स्नान करने का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दिन ऐसा करने से रूप में निखार आ जाता है। इस दिन स्नान के लिए एक तांबे के लौटे में जल भरकर कार्तिक अहोई अष्टमी के दिन रखा जाता है और फिर लौटे के जल को स्नान के जल में मिलाकर स्नान किया जाता है। मान्यता के अनुसार ऐसा करने से नरक के भय से मुक्ति मिलती है।

2. नरक चतुर्दशी के दिन स्नान से पूर्व तिल के तेल से शरीर की मालिश करने के बाद औधषीय पौधा अपामार्ग अर्थात चिरचिरा को सिर के ऊपर से चारों ओर 3 बार घुमाने का भी प्रचलन है।

3. इस दिन स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर हाथ जोड़कर यमराज से प्रार्थना करने का भी विधान है। माना जाता है कि ऐसा करने से पूरे साल में किए पापों का नाश होता है।

नरक चतुर्दशी पर क्या करें :
1. नरक चतुर्दशी के दिन घर के मुख्य द्वार से बाहर की ओर यमराज के लिए तेल का दीया लगाया जाता है।
2. नरक चतुर्दशी को शाम के समय सभी देवताओं की पूजा के बाद घर की चौखट के दोनों ओर तेल के दीपक जलाकर रखा शुभ माना जाता है। मान्यता के अनुसार ऐसा करने से लक्ष्मीजी का घर में वास होता है।

3. माना जाता है कि सौंदर्य की प्राप्ति के लिए नरक चतुर्दशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करनी चाहिए।

4. इसके अलावा नरक चतुर्दशी पर अर्धरात्रि के समय (निशीथ काल ) घर से बेकार के सामान फेंक देना चाहिए। माना जाता है कि इससे दरिद्रता का नाश हो जाता है।

नरक चतुर्दशी की पूजा विधि :
1. नरक चतुर्दशी के दिन यमराज, श्रीकृष्ण, काली माता, भगवान शिव, रामदूत हनुमान और भगावन वामन की पूजा करने का विधान है।
2. इस दिन घर के ईशान कोण में ही पूजा करनी चाहिए। वहीं पूजा के दौरान अपना मुंह ईशान कोण, पूर्व या उत्तर की ओर रखना चाहिए। इस पूजन के दौरान पंचदेव की स्थापना अवश्य करें। पंचदेवों में श्रीगणेश, भगवान विष्णु, देवी मां दुर्गा, भगवान शिव और सूर्यदेव आते हैं।

 

3. 6 देवों की इस दिन षोडशोपचार पूजा करनी चाहिए। यानि इनकी 16 क्रियाओं से पूजा करना उचित माना जाता है। षोडशोपचार पूजा में पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, आभूषण, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नेवैद्य, आचमन, ताम्बुल, स्तवपाठ, तर्पण और नमस्कार शामिल होते है। वहीं सांगता सिद्धि के लिए पूजन के अंत में दक्षिणा भी चढ़ाना चाहिए।

4. इसके पश्चात सभी देवों के सामने धूप, दीप जलाएं। इसके पश्चात उनके मस्तक पर हलदी कुंकूम, चंदन और चावल लगाएं। और फिर उन्हें हार और फूल पहनाएं। पूजन में अनामिका अंगुली (रिंग फिंगर) से गंध (चंदन, कुमकुम, अबीर, गुलाल, हल्दी आदि) लगाना श्रेष्ठ माना जाता है। षोडशोपचार की समस्त सामग्री से इसी तरह पूजा करें। वहीं पूजा के दौरान उनके मंत्र का भी जाप करें।

5. पूजा के पश्चात प्रसाद या नैवेद्य (भोग) चढ़ाएं। यहां इस बात को निश्चित कर लें कि प्रसाद या नैवेद्य (भोग) में नमक, मिर्च और तेल का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। इसके साथ ही हर पकवान पर तुलसी का एक पत्ता रखा जाता है।

6. अंत में सभी देवों की आरती कर पश्चात नैवेद्य चढ़ाकर पूजा का समापन करें।

7. मुख्‍य पूजा के बाद प्रदोष काल में मुख्य द्वार या आंगन में दीये जलाएं। इनमें से एक दीया विशेषकर यम के नाम का भी जलाएं। वहीं रात्रि के दौरान घर के सभी कोने जहां विशेषकर अंधेरा रहता हो वहां अवश्य दीए जलाएं