उलझे हुए जीवन पथ कैसे सुलझाऊं, हत्प्रभ रहता हूँ मैं अक्सर, जीवन के हर एक कड़ियो में।

How to solve the complicated life path,

उलझे हुए जीवन पथ कैसे सुलझाऊं,  हत्प्रभ रहता हूँ मैं अक्सर, जीवन के हर एक कड़ियो में।
उलझे हुए जीवन पथ कैसे सुलझाऊं, हत्प्रभ रहता हूँ मैं अक्सर, जीवन के हर एक कड़ियो में।

NBL, 09/06/2022, Lokeshwer Prasad Verma, RAIPUR CG: How to solve the complicated life path, I am bewildered often, in every episode of life.आज मै अपने सज्जन प्रिय पाठकों के लिए एक उनके अपने जीवन से जुड़े काव्य प्रस्तुत कर रहा हूँ, पढ़े विस्तार से... 

हत्प्रभ रहता हूँ मैं अक्सरजीवन के हर एक कड़ियो में ,

अक्सर सपने टूटा करते

उन कल्पनाओ के गलियो में 

चला था ये सोचकर

हासिल कर लूँगा हर सपना ,

 

जीवन बस अनन्त हैं

बस यही भ्रम था अपना ,

जीवन इतना समान्य नही

ज़ितना मैंने सोच लिया था ,

हर मुश्किल थी मेरे आगे

अब इसको मैं जान लिया था ,

 

मान लिया था खुद को "कश्ती"

उन तूफानो के अठखेलियो में ,

फिर भी अड़ा रहा पथ पर अपने

उन तूफानो के गलियो में ,

 

हर सम्भव वो कोशिश की

उन रास्तो उन गलियो में ,

फिर भी मन भयभीत होता

उन कल्पनाओ के गलियो में ,

 

कुछ मित मिले कुछ छूट गये

उन कठिन परिस्थितियो में ,

फिर भी मन उदास न होता

जीवन के उन पहलुओ में ,

 

अब बीत गया वो समय कहाँ

अब सपनो से दूर रहा ,

हर सम्भव वो कोशिश की

अब बस पथ पर अडा रहा ,

 

हत्प्रभ रहता हूँ मैं अक्सर

जीवन के हर एक कड़ियो में ,

अक्सर सपने टूटा करते

उन कल्पनाओ के गलियो में.......