Krishna Janmashtami 2022: जन्माष्टमी पर इस समय करेंगे पूजा तो मिलेगा दोगुना लाभ, भूलकर भी न करें ये काम, इन 4 गलतियों से भी श्रीकृष्ण हो जाएंगे रुष्ट, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि.....

Happy Krishna Janmashtami 2022 Puja Vidhi, Muhurat  डेस्क। भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव हर साल हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण का श्रृंगार करके उनकी विधिवत पूजा की जाती है. उनके भक्त पूर दिन भूखे-प्यासे रहकर व्रत करते हैं और मध्यरात्रि में भगवान को पंचामृत का भोग लगाते हैं. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कई बार लोगों से जाने-अनजाने बड़ी गलतियां हो जाती है. ज्योतिषियों का कहना है कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कुछ नियमों का विशेष ख्याल रखना चाहिए.

Krishna Janmashtami 2022: जन्माष्टमी पर इस समय करेंगे पूजा तो मिलेगा दोगुना लाभ, भूलकर भी न करें ये काम, इन 4 गलतियों से भी श्रीकृष्ण हो जाएंगे रुष्ट, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि.....
Krishna Janmashtami 2022: जन्माष्टमी पर इस समय करेंगे पूजा तो मिलेगा दोगुना लाभ, भूलकर भी न करें ये काम, इन 4 गलतियों से भी श्रीकृष्ण हो जाएंगे रुष्ट, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि.....

Happy Krishna Janmashtami 2022 Puja Vidhi, Muhurat 

 

डेस्क। भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव हर साल हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण का श्रृंगार करके उनकी विधिवत पूजा की जाती है. उनके भक्त पूर दिन भूखे-प्यासे रहकर व्रत करते हैं और मध्यरात्रि में भगवान को पंचामृत का भोग लगाते हैं. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कई बार लोगों से जाने-अनजाने बड़ी गलतियां हो जाती है. ज्योतिषियों का कहना है कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कुछ नियमों का विशेष ख्याल रखना चाहिए.

 

1. श्रीकृष्ण की पीठ- ज्योतिषविदों का कहना कि मंदिर में भूलकर भी श्रीकृष्ण की पीठ के दर्शन नहीं करने चाहिए. श्रीकृष्ण की पीठ देखने से इंसान के पुण्य कम हो जाते हैं. ऐसा कहते हैं कि श्रीकृष्ण की पीठ पर अधर्म का वास होता है, जिसके दर्शन से अधर्म बढ़ता है. मायावी असुर कालयवन के पुण्य को समाप्त करने के लिए भी श्रीकृष्ण को उसे पीठ दिखानी पड़ी थी.

 

2. तुलसी के पत्ते- जन्माष्टमी के दिन भूलकर भी तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए. श्रीकृष्ण को विष्णु का पूर्ण अवतार माना जाता है और भगवान विष्णु को तुलसी बहुत प्रिय है. हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु के विग्रह रूप शालिग्राम और तुलसी का विवाह भी कराया जाता है.

 

3. चावल से परहेज- हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन चावल के सेवन से परहेज करना चाहिए. जन्माष्टमी की तरह एकादशी पर भी चावल या जौ से बनी चीजें ना खाने की सलाह दी जाती है.

 

4. लहसुन प्याज- जन्माष्टमी के दिन लहसुन, प्याज या तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए. इस दिन मांस, मदिरा पान से भी दूर ही रहें. आप जलाहार या फलाहार के साथ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रख सकते हैं.

 

5. काले रंग की सामग्री- जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को काले रंग की कोई भी सामग्री अर्पित ना करें. साथ ही काले कपड़े पहनकर भगवान की पूजा ना करें. काले रंग का प्रयोग आमतौर पर अशुभ और शोक का प्रतीक माना जाता है. 

 

जन्माष्टमी पूजा सामग्री

 

धूप बत्ती, अगरबत्ती, कपूर, केसर, चंदन, यज्ञोपवीत , कुमकुम, अक्षत, अबीर, गुलाल, अभ्रक, हल्दी, आभूषण, नाड़ा, रुई, रोली, सिंदूर, सुपारी, पान के पत्ते, पुष्पमाला, कमलगट्टे, तुलसीमाला, खड़ा धनिया, सप्तमृत्तिका, सप्तधान, कुशा व दूर्वा, पंच मेवा, गंगाजल, शहद, शक्कर, तुलसी दल, शुद्ध घी, दही, दूध, ऋतुफल, नैवेद्य या मिष्ठान्न, छोटी इलायची, लौंग मौली, इत्र की शीशी, सिंहासन, बाजोट या झूला (चौकी, आसन), पंच पल्लव, पंचामृत, केले के पत्ते, औषधि, श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर, गणेशजी की तस्वीर, अम्बिका जी की तस्वीर, भगवान के वस्त्र, गणेशजी को अर्पित करने के लिए वस्त्र, अम्बिका को अर्पित करने के लिए वस्त्र, जल कलश, सफेद कपड़ा, लाल कपड़ा, पंच रत्न, दीपक, बड़े दीपक के लिए तेल, बन्दनवार, ताम्बूल, नारियल, चावल, गेहूं, गुलाब और लाल कमल के फूल, दूर्वा, अर्घ्य पात्र आदि. 

 

जन्माष्टमी पर इस तरह करें पूजा

 

- जन्माष्टमी वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि सभी तरह के कार्यों को निपटा लें.

- फिर घर के मंदिर का साफ-सफाई कर लें.

- इसके बाद सभी देवी-देवताओं का आवहन करते हुए दीप प्रज्वलित करें.

- फिर बाद में लड्डू गोपाल के पूजन आरंभ कर दें.

- लड्डू गोपाल को जल से अभिषेक कर चंदन और भोग लगाएं.

- इसके बाद लड्डू गोपाल को झूला झूलाएं.

- फिर रात्रि का इंतजार करते हुए दिन भर कृष्ण मंत्रों का जाप करें.

- रात्रि में 12 बजे भगवान का जन्म दिन मनाएं 

- कान्हा को दूध,दही, घी, शहद, पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं.

-अंत में बाल गोपाल की आरती उतारे हुए मंगल गीत गाएं.

 

 

भगवान श्रीकृष्ण ने सफलता पाने के लिए बताएं हैं 5 सूत्र

 

श्री कृष्ण का संपूर्ण जीवन ही एक प्रबंधन की किताब है,जिसमें प्रत्येक व्यक्ति के लिए जीवन जीने के लिए श्रेष्ठम सूत्र हैं. अगर आप दिमाग को शांत और मन को स्थिर रखने की कोशिश करें तो बुरी परिस्थितियों में भी आप अपने लिए कुछ बहुत बेहतरीन हल निकाल पाएंगे,

 

1.जीवन संघर्ष है,मुकावला करो

 

2. स्वस्थ्य शरीर से मिलती है विजय

 

3. पढ़ाई किताबी ना हो, रचनात्मक हो

 

4. रिश्तों को सहेजकर रखें

 

5. शांति से सब कुछ संभव है  

 

 

कृष्ण जन्माष्टमी 2022 तिथि और शुभ मुहूर्त

 

भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव हर वर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग में मनाया जाता है. लेकिन इस बार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं हो पा रहा है. अष्टमी तिथि 18 अगस्त को शाम के 09 बजकर 21 मिनट से शुरू हो रही है जो 19 अगस्त की रात 10 बजकर 59 मिनट पर खत्म हो जाएगी.

सिंह,कन्या,तुला और वृश्चिक राशि वाले कैसे करें जन्माष्टमी की पूजा

सिंह राशि- जिन जातकों की राशि सिंह है वे लोग जन्माष्टमी के दिन बाल गोपाल को गुलाबी रंग का वस्त्र पहनाएं। मेवे का भोग लगाएं।
कन्या राशि- कन्या राशि वाले कान्हा को हरे रंग का वस्त्र पहनाएं और माखन मिश्री का भोग अर्पित करें।
तुला राशि - इस राशि के जातक भगवान कृष्ण को केसरिया रंग का कपड़ा अर्पित करें और धी और माखन का भोग लगाएं।
वृश्चिक राशि- इस राशि को लोग भगवान कृष्ण को लाल वस्त्र पहनाएं और तुलसी के पत्ते के साथ माखन-मिश्री का भोग लगाएं। 

 

श्रीकृष्ण का 5249वां जन्मोत्सव और 8 शुभ योग

इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण का यह 5249वां जन्म दिवस है। शास्त्रों के अनुसार भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रात के आठवें मुहूर्त में हुआ था। अष्टमी तिथि की उदया तिथि 19 को है ऐसे में भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव 19 अगस्त को मनाना ज्यादा अच्छा रहेगा। इस जन्माष्टमी पर 8 तरह का शुभ योग भी बन रहा है। ये 8 शुभ योग इस प्रकार है- महालक्ष्मी, बुधादित्य,ध्रुव, छत्र,कुलदीपक,भारती, हर्ष और सत्कीर्ति  

 

19 अगस्त का जन्माष्टमी मनाना ज्यादा अच्छा

अष्टमी तिथि 18 और 19 अगस्त दो दिन होने से इस बार कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में जन्माष्टमी कब मनाना उचित रहेगा इसका संक्षिप्त ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं। दरअसल इस बार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 18 अगस्त को सुबह के बजाय रात में करीब 9 बजकर 30 मिनट पर शुरू हो रही है। फिर 19 अगस्त को सूर्योदय से रात तक रहेगी। ऐसे में अष्टमी की उदया तिथि 19 अगस्त को मानी जाएगी। इस उदया तिथि के अनुसार जन्माष्टमी तिथि 19 अगस्त का मनाना ज्यादा अच्छा रहेगा।

 

पुराणों में कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व

 

भगवान कृष्ण की नगरी समेत कई जगहों पर इस बार जन्माष्टमी 19 अगस्त को मनाई जा रही है, लेकिन पुरी समेत कुछ जगहों पर जन्माष्टमी का त्योहार 18 अगस्त का भी मनाया जा रहा है। इस बार जन्माष्टमी पर 51 मिनट के अभिजीत मुहूर्त का साथ कई अन्य शुभ संयोग भी बन रहा है। जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि की उदया तिथि 19 अगस्त को है।