साहित्यकारों का दीपावली मिलन...

साहित्यकारों का दीपावली मिलन...
साहित्यकारों का दीपावली मिलन...

साहित्यकारों का दीपावली मिलन

जगदलपुर : मीन पियासी बीच समंदर, घर बारे भये बेघर, घुसि घुसि आवयं लोग विदेसी, द्वार तोरि सब अंदर! ये गहरी पंक्तियां उत्तराखंण्ड से आये प्रसिद्व कवि डॉ कौशलेन्द्र ने अपने काव्यपाठ में कहीं। विदेशी घुसपैठियों से त्रस्त देश की पीड़ा की सचित्र अभिव्यक्त करती हैं।

अवसर था साहित्य एवं कला समाज जगदलपुर द्वारा आयोजित दीपावली मिलन का। क्षेत्र के नामचीन साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम गरीमामय बना दिया और कार्यक्रम साहित्य के चरमोत्कर्ष को प्राप्त हुआ। एक से एक मनभावन रचनाओं ने शाम को रंगीन बना दिया।

कार्यक्रम का संचालन करते हुये साहित्य एवं कला समाज के अध्यक्ष सनत सागर ने प्रेम की नवीनतम विकृति पर प्रहार हुये उन पापियों पर प्रश्न उठाया।

प्रेम की ये कैसी परिभाषा हम तो पूछेंगे,

भोले भाले मन को है झांसा हम तो पूछेंगे

पैंतीस पैंतीस टुकड़ों में बांट दिया उसको

मन में है किसकी अभिलाषा हम तो पूछेंगे।

युवा ग़ज़लकार कृष्ण शरण पटेल ने अपनी ग़ज़लों का सस्वर पाठ कर मन मोह लिया।

हमपे तुम्हारा होगा असर, थोड़ी दूर साथ चलो

ग़मों से हो जायेंगे बेखबर, थोड़ी दूर साथ चलो।

डालेश्वरी पाण्डे महंगाई और बेटियों की व्यथा पर धीर गंभीर रचना का सस्वर पाठ कर वातावरण द्रवित कर दिया।

नारी तेरी कथा कहूं क्या, चीरहरण की व्यथा कहूं क्या !

गीत गजलों में समान रूप से पकड़ रखने वाली स्मृति मिश्रा ने वर्तमान राजनीति पर प्रहार किया और कहा -

आप की बात अब बेअसर हो गयी, बेवजह की सियासत नहीं चाहिये।

हिन्दी और हल्बी-भतरी भाषा के कवि नरेन्द्र पाढ़ी ने अपनी कविता में दशहरा पर्व की भीड़ भाड़ का चित्र खिंचा और कहा- दसराहा भाटा ने गांव कारी, धांगड़ा धांगड़ी चो मया।

युर्वा लोककवि लोककलाकार भरत कुमार गंगादित्य ने दीपावली पर अपने संदेश में कहा -

दीप जले हैं द्वारे द्वारे, जगमग जगमग सुंदर दिखते हैं

प्रसन्न वे मुस्कुरा रहे, और भला क्या हमसे कहते।

अंचल के प्रसिद्व साहित्यकार अवधकिशोर शर्मा ने अपनी गहरी

पंक्तियों से दीपावली पर संदेश दिया।

मैं अंतःकरण के आंगन में हर दिन

बीज रोशनी का बोता

मैं स्वयं प्रकाशित होता हूं

मैं स्वयं प्रकाशित होता हूं।

ग़ज़लकार विपिन बिहारी दाश ने सस्वर गजलों का पाठ किया।
युवा कवि ओमप्रकाश ध्रुव ने वर्तमान पीढ़ी के व्यवहार पर प्रहार करते हुये कहा कि जिन्हें थपकियों से सुलाते थे , वो अपनी धमकियों से रूलाते हैं।

डॉ प्रकाश पैमाना गहरी ग़ज़लों से श्रोताओं को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।

अगर कोई कहता के वो गिरता नहीं है

समझ लो कि वो शख्स चलता नहीं है।

गीता शुक्ला ने अपनी ओज पूर्ण कविता के माध्यम से नारियों को आगे बढ़ने का संदेश दिया।

सतरूपा मिश्रा ने अपनी गुलमोहर पर आधारित कविता के बिम्ब से नारी जीवन का पहलू दिखाया।

बहुभाषी कवि अनिल शुक्ल ने छठ पर्व पर आधारित कविता से सभी के जीवन की मंगल कामना की।

युवा कवयित्री शैफाली जैन ने दीपावली पर दीपक के माध्यम से संदेश दिया।

दीपक की रोशनी ही उसकी मुस्कुराहट है।

ममता मधु ने अपनी कविताओं के माध्यम से सावन के झूलों की सैर करवाई तो दीपक का संदेश दिया।

कार्यक्रम उपस्थित दानवीर अनिता राज और प्रसिद्व चित्रकार बी एल विश्वकर्मा के साथ अनिता जैन आदि ने भी अपनी उपस्थिति प्रदान की।