आपकी सावधानी एक अनमोल जान बचा सकती है विश्व आत्महत्या रोकथाम सप्ताह के तहत आईटीआई बस्तर में हुई कार्यशाला

आपकी सावधानी एक अनमोल जान बचा सकती है विश्व आत्महत्या रोकथाम सप्ताह के तहत आईटीआई बस्तर में हुई कार्यशाला

 

जगदलपुर। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले में विश्व आत्महत्या रोकथाम सप्ताह मनाया जा रहा है इसी कड़ी में शासकीय औद्योगिक संस्था बस्तर में डी.एम.एच.पी. के नोडल ऑफिसर डॉ.ऋषभ साव के दिशानिर्देशानुसार आत्महत्या रोकथाम विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में आत्महत्या के संकेत को समझने और उस पर नियंत्रण रखने के बारे में उपस्थित 106 छात्रों को खेल के माध्यम से जागरूक किया गया। जिसमें क्लीनिकल साइकोलोजिस्ट मोनिका साहू और कम्युनिटी नर्स रूपेश मशीह ने छात्रों को जानकारी दी कि आत्महत्या करने वाले व्यक्ति की पहचान कैसे करें ,और किस प्रकार वह एक गेट कीपर की भूमिका निभाकर इन घटनाओं को रोक सकते हैं।

जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की मेडिकल ऑफिसर रुख़सार खान ने बताया, “आत्महत्या करने या इसका प्रयास करने वाले व्यक्तियों में विद्यार्थी भी शामिल है। वर्तमान में किशोरों में आत्महत्या की बढ़ रही प्रवृत्ति तथा जीवन के प्रति निराशा को दूर करने की जरूरत है। ऐसे मे गेट कीपर की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने बताया, यदि कोई व्यक्ति बहुत लंबे समय तक उदास और शांत रहता हो और ज्यादा समय अकेला रहता है, ऐसा व्यक्ति जिसको नींद नहीं आती या जो अधिक समय तक सोता रहता है, जो मर जाने से संबंधित बातें बार-बार करता हो, चेतावनी-धमकी देता हो।, ऐसा व्यक्ति जो आत्महत्या करने से संबंधित सामग्री जैसे-रस्सी, हथियार, और दवाईयों के दुकानो के आस-पास बार-बार नजर आये। उपरोक्त में से हमें कोई भी लक्षण दिखे तो उसे डॉक्टर, मनोविश्लेषक या मनोचिकित्सक के पास ले जाना चाहिए। आपकी जरा सी सावधानी से एक अनमोल जान बचा सकती है।“

 

आत्महत्या की समस्या जटिल और दुखद है, लेकिन इसे रोका जा सकता है। कार्यशाला में उपस्थित छात्रों को जानकारी प्रदान की गयी कि आत्महत्या की चेतावनी के संकेत को समझकर दूसरों की जान बचाने में मदद की जा सकती है। ऐसे व्यक्ति जो भावनात्मक रूप से कमजोर हों उनकी मदद करने के लिए निम्न कार्य किये जाने चाहिये।

1.उनसे पूछें: - "क्या आप खुद को हानि पहुचाने के बारे में सोच रहे हैं?" यह एक आसान सवाल नहीं है, लेकिन अध्ययनों से पता चलता है कि, ऐसे व्यक्तियों से यह पूछने पर उनके मन में चल रहे आत्मघाती विचारों को कमजोर करते हैं।

 

2.उन्हें सुरक्षित रखें:- आत्महत्या करने वाले व्यक्ति की अत्यधिक घातक वस्तुओं या स्थानों तक पहुंच को कम करना आत्महत्या की रोकथाम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। 

 

3.उनके साथ रहें: - मानसिक अस्वस्थ व्यक्ति की बातों को ध्यान से सुनें और जानें कि वह क्या सोच रहा और क्या महसूस कर रहा है फिर उन्हें उचित सलाह दें। ऐसा करने से व्यक्ति के मन मे आत्महत्या के विचार बढ़ने के बजाय कम हो सकते हैं।

 

4. उनकी सहायता करें:- आप उनके फोन में अपना नम्बर सेव करें ताकि जरूरत पड़ने पर वहां मौजूद रह सकें। साथ ही राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम लाइफलाइन नंबर(1-800-273-8255) की भी जानकारी दें यहां पर वे कॉल कर अपनी समस्या बता सकते हैं जहां उन्हें उचित परामर्श मिलेगा। राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम लाइफलाइन 24/7 खुली रहती है।

 

5.जुड़े रहें:- आत्मघाती प्रयास कर चुके व्यक्ति या अपना उपचार करा रहे व्यक्ति के संपर्क में जुड़े रहने से उनकी मानसिकता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। और वे ऐसा करने या सोचने से पीछे हटने लगते हैं। जिससे आत्महत्या के डर में गिरावट आती है। 

 

यहाँ लें सलाह 

अगर किसी के मन मे आत्महत्या करने जैसे विचार आ रहे है तो वह मानसिक रूप से अस्वस्थ है, मानसिक अस्वस्थता की स्थिति हो तो घबराएं नही, महारानी अस्पताल में स्पर्श क्लीनिक के माध्यम से मानसिक रोगियों को निःशुल्क परामर्श व उपचार दिया जाता है। स्पर्श क्लीनिक जगदलपुर हेल्पलाइन नम्बर 077822-22578 पर कॉल करके भी जानकारी ली जा सकती है।