आज भारत अपना 78वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है और यह आजादी हमें हमारे बुजुर्गों ने दिलाई है। आइए आज हम भी एक संकल्प लें ताकि हमारी नई पीढ़ी भी हमें हमारे अच्छे कार्यों के लिए याद रखे।
Today India is celebrating its 78th Independence Day




NBL, 15/08/2024, Lokeshwar Prasad Verma Raipur CG: Today India is celebrating its 78th Independence Day and this freedom has been given to us by our elders. Let us also take a resolution today so that our new generation also remembers us for our good deeds. पढ़े विस्तार से....
सदियों तक हमारा देश भारत विदेशी आक्रांताओं का गुलाम रहा और भारत के लोगों को इस गुलामी से मुक्ति पाने में सदियां लग गईं और इन विदेशी आक्रांताओं से मुक्ति पाने के लिए भारत के लोगों को कई रूप धारण करने पड़े, जिन्हें हम आज क्रांतिकारी कहते हैं, जिन्हें हम स्वतंत्रता सेनानी कहते हैं, और ऐसे कई नाम हैं जिन्हें शायद हम नहीं जानते, आज हमें कुछ ही लोग याद हैं, और उन चंद अवसरवादी स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत को आजादी मिलते ही भारत में राजनीतिक दलों का निर्माण किया, जो आज भी मौजूद हैं, जिनमें से एक कांग्रेस पार्टी मुख्य राजनीतिक दल के रूप में उभरी और उन पर भरोसा करते हुए सभी भारतीयों ने भारत की बागडोर उन्हें सौंप दी, बाद में और भी कई राजनीतिक दल बने, लेकिन कांग्रेस लंबे समय तक भारत की सत्ता पर काबिज रही, जिसे पूरी दुनिया जानती है।
हम यह भी कह सकते हैं कि भारत में कांग्रेस पार्टी का गठन करने वाले नेता आजादी से बहुत पहले ही योजना बना रहे थे, क्योंकि यह निश्चित था कि भारत को आजादी मिलेगी और संपूर्ण भारतीय आबादी पर प्रभुत्व स्थापित करना था, इन सब बात को ध्यान में रखते हुए, कांग्रेस का गठन करने वाले सिर्ष नेताओं ने पहले से ही योजनाबद्ध तरीके से भारत पर कब्जा करने की योजना बना ली थी और जब आजादी के बाद, कांग्रेस के संस्थापक नेता के मन में कुछ उथल-पुथल देखी, तो उसी कांग्रेस नेता ने भारत को दो समुदायों के नाम पर भारत को विभाजित कर दिया हिंदू/मुस्लिम कहकर पाकिस्तान देश बना दिया। यह लेख मेरे प्रिय पाठकों को थोड़ा अजीब लगेगा, लेकिन अगर आप सच्चाई की गहराई में जाएंगे, तो आपको सब कुछ आईने की तरह साफ दिखाई देगा, सत्ता का लालच क्या है और कैसे देश की एकता और अखंडता को टुकड़ों में विभाजित किया गया है। हम भारतीय आज भी कांग्रेस को एक मजबूत नींव के रूप में देखते हैं और हम यह भी कहते हैं कि कांग्रेस ने भारत के लोकतंत्र के लिए और भारत को मजबूत करने के लिए क्या नहीं किया, लेकिन हम देशवासी यह नहीं सोच पा रहे हैं कि इसी कांग्रेस ने सत्ता के लालच में एक दुश्मन देश जिसे हम पाकिस्तान कहते हैं, बनाया और पाकिस्तान में रहने वाले मुसलमानों को हमारे भारत का बहुत बड़ा दुश्मन बना दिया और वर्तमान में कांग्रेस भारत के मुसलमानों की हिमायती बनकर भारत के हिंदुओं को मुसलमानों से अलग करके राजनीति कर रही है।
जबकि वे दोनों पक्षों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और इसमें कोई संदेह नहीं है कि पूर्व में कांग्रेस ने पाकिस्तान के मुसलमानों को भारत का स्थायी दुश्मन बना दिया है और अब कांग्रेस के नेता और उनके सहयोगी भारत के लोगों को भारत के लोगों का दुश्मन बनाने के लिए दो कदम आगे जा रहे हैं। अगर हम कांग्रेस को सत्ता नहीं मिली तो भारत के लोग शांति से कैसे रहेंगे? हम उनका चैन भी छीन लेंगे। कांग्रेस के नेता न्याय के नाम पर भड़काने में माहिर हैं। यही उनका मूल मे है। भारत से अलग करके पाकिस्तान बनाकर भारत के लिए आजीवन दुश्मन पैदा करना छोटी बात नहीं है, यह बहुत बड़ी बात है और वह भी जीवन भर के लिए, जबकि पाकिस्तान हमारा भाई है और हम दोनों ने मिलकर देश को आजादी दिलाई, दोनों ने आजादी के लिए अपना खून दिया और आज यही भाई एक दूसरे के खून के प्यासे हैं और यह देन है कांग्रेस का जो हम भाई-भाई दुश्मन बन गए हैं।
हम कांग्रेस के नेताओं पर उनके विचारों का आरोप नहीं लगा रहे हैं, बल्कि हमने इस बात का गहराई से विश्लेषण किया है कि कांग्रेस के संस्थापक नेताओं ने अपनी सत्ता के लिए पाकिस्तानी मुसलमानों को भारत के लोकतंत्र के लिए कितना बड़ा दुश्मन पैदा किया, जिसके कारण हम अपने देश के मूल निवासी भारतीय मुसलमानों को भी हम संदेह की नजर से देखते हैं, जबकि इन्हीं भारतीय मुसलमानों ने भारत छोड़कर पाकिस्तान जाना पसंद नहीं किया और इसी भारत की मिट्टी से प्यार किया और आज उन्हीं भारतीय मुसलमानों के मन में नफरत के बीज बोए जा रहे हैं, जिन्होंने भारत की आजादी के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। नफरत के बीज अब अंकुरित हो रहे हैं और फिर से हिंदू/मुस्लिम धर्म के लोगों के बीच भारत को टुकड़ों में बांटने की कोशिश की जा रही है।
और हिंदुओं की जातियों को अलग करके उन्हें फिर से छुआछूत की आग में धकेलने की बात कर रहा है कांग्रेस। कांग्रेस का न्याय क्या है? जातियों में बांटने की बात करने वाली कांग्रेस की मंशा क्या है? कांग्रेस को देश की जनता के कल्याण की बात दस साल बाद ही क्यों याद आ रही है? उससे पहले देश की सत्ता पर काबिज कांग्रेस पार्टी कुंभकरण की नींद में थी और देश के लोकतंत्र के कल्याण के बारे में नहीं सोचती थी? वे आज क्यों सोच रहे हैं, जबकि यह गलती कांग्रेस ने की थी, जिसे सुधारने में भारत में किसी भी पार्टी के सत्ताधारी नेताओं को सदियाँ लग जाएँगी, जिसमें भाजपा के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, वर्तमान भारत सरकार और भविष्य में सत्ता में आने वाली कोई भी पार्टी शामिल है। यह उनके लिए आसान बात नहीं है। खुद कांग्रेस भी इसे आसानी से नहीं सुधार सकती। सत्ता देने के बावजूद कांग्रेस ने देश को ऐसा जख्म दिया है, जिसे भरना इतना आसान नहीं है। और इस बारे में पूरे भारतीय धार्मिक समाज के लोगों को सोचना होगा, जो इतनी आसानी से इन राजनीतिक नेताओं की बकवास और लुभावनी बातों में आ जाते हैं।
भारत में अवसरवादी राजनीतिक दल तब तक समाप्त नहीं होंगे जब तक भारत अपने विकास के कदमों को तेज गति से आगे नहीं बढ़ा सकता। यह बिल्कुल सही है। जब तक हम घरेलू आलोचनाओं से घिरे रहेंगे, हम अपने घर की चारदीवारी तक ही सीमित रहेंगे। हम चाँद पर पहुँच गए हैं, लेकिन उस चाँद पर क्या करना है, यह सोचिए। नई सोच पैदा कीजिए। नए विस्तार के बारे में सोचिए। नए विज्ञान के बारे में सोचिए। नई शिक्षा प्रणाली के बारे में सोचिए। हम भारतीयों को अपने और अपने देश के विकास के बारे में सोचना चाहिए। लेकिन हम इसके विपरीत सोच रहे हैं। महंगाई बढ़ रही है। जबकि महंगाई आपके नेताओं की बातों से बढ़ रही है। कांग्रेस के नेता कह रहे हैं कि देश में महंगाई बढ़ रही है। ये चतुर बिचौलिए इसे बढ़ाते हैं। अब सत्ताधारी भाजपा भी इसे नियंत्रित नहीं कर सकती क्योंकि कांग्रेस उसके पक्ष में है। वे इसमें सबको साथ लेकर चलेंगे। उत्पादक किसानों से लेकर छोटे खुदरा व्यापारियों तक, ये नेता अपने फायदे की बात करेंगे। लेकिन इन नेताओं की बातों से किसका फायदा हो रहा है? सिर्फ बिचौलियों का फायदा हो रहा है, न किसानों का फायदा हो रहा है और न ही छोटे खुदरा व्यापारियों का।
देश की अभी यही हालत है। आप राजनीतिक नेता देश के लोकतंत्र को भड़काते रहो, देश के लोकतंत्र में आग लगाते रहो, चाहे देश रसातल में चला जाए। किसी तरह राजनीति की सीढ़ी के सहारे सत्ता के सिंहासन पर बैठने का अवसर मिलना चाहिए, यह कांग्रेस की पुरानी नीति है। हालांकि देश को आजादी देश के कई अज्ञात सच्चे देशभक्तों से मिली, लेकिन देश में अवसरवादी कांग्रेस के कूटनीति व उनको सहयोग देने वाले राजनीतिक दलों के नेताओं की कमी नहीं है और देश में उनका समर्थन करने वाले लोकतंत्र की भी कोई कमी नहीं है। भारत में पुरानी फिल्म की रील की तरह कांग्रेस का रील चलता रहेगा, जाति, आरक्षण, संविधान, महंगाई, बेरोजगारी, धार्मिक झगड़े, मंदिर/मस्जिद, लोकतंत्र का हनन, अब आप भारतीय भारत के लिए कुछ नया करेंगे? या पुराने इतिहास को धीरे-धीरे दोहराते हुए आगे बढ़ेंगे? नई पीढ़ियों के लिए, मेरे नए भारत के नए आधुनिक युग के लोकतंत्र कुछ तो नया करें।