CG- निर्वाचन आयोग की प्रेस कांफ्रेंस BIG NEWS: नगरीय निकाय के लिए चुनाव की तारीखों का ऐलान आज…. लग जायेगा इन क्षेत्रों में आचार संहिता....पढ़िये किन- किन नगरीय निकायों में होंगे चुनाव……....

CG- निर्वाचन आयोग की प्रेस कांफ्रेंस BIG NEWS: नगरीय निकाय के लिए चुनाव की तारीखों का ऐलान आज…. लग जायेगा इन क्षेत्रों में आचार संहिता....पढ़िये किन- किन नगरीय निकायों में होंगे चुनाव……....

रायपुर 24 नवम्बर 2021। राज्य निर्वाचन आयुक्त ठाकुर रामसिंह आज दोपहर 12 बजे प्रेस को संबोधित करेंगे। आज नगरीय निकाय चुनाव के मद्देनजर 10 जिलों के 15 निकायों में आचार संहिता का ऐलान हो जाएगा। छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग की प्रेस कांफ्रेंस में चुनाव की तारीखों का ऐलान किया जाएगा। आयुक्त ठाकुर राम सिंह आज 10 जिलों के 15 नगरीय निकायों में आम चुनाव कराए जाने की तारीखों का ऐलान करेंगे। इससे पहले कल ही निर्वाचन आयुक्त ने नगरीय चुनाव वाले जिलों के एसपी और कलेक्टर्स की तैयारियों के मद्देनजर बैठक ली थी। कल उन्होंने बैठक में नगरीय निकायों में आम निर्वाचन के दौरान आदर्श आचरण संहिता, प्रशासनिक ,सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था और कोविड 19 गाइडलाइन के परिपालन के संबंध में चर्चा की थी। 

 

प्रदेश के इन निकायों में होंगे चुनाव

जिला     –          निकायों के नाम

बीजापुर    –        नगर पंचायत भैरमगढ़

                        नगर पंचायत भोपालपट्टनम

रायपुर         –     नगरपालिका निगम बीरगांव

कांकेर          –    नगर पंचायत नरहरपुर

दुर्ग  – नगरपालिक निगम भिलाई

          नगरपालिक निगम रिसाली

          नगरपालिक निगम जामुल

         नगरपालिक निगम चरोदा

राजनांदगांव – नगरपालिका परिषद् खैरागढ़

बेमेतरा – नगर पंचायत मारो

कोरिया – नगरपालिका परिषद् बैकुंठपुर

              नगरपालिका परिषद् शिवपुर चरचा

सूरजपुर- नगर पंचायत प्रेमनगर

सुकमा  – नगर पंचायत कोटा

रायगढ़ – नगर पालिका सारंगढ़

आगामी चुनाव में उम्मीदवारों को अपना नाम निर्देशन पत्र (नामांकन) ऑनलाइन दाखिल करना होगा। अभ्यर्थी घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से छग निर्वाचन आयोग की वेबसाइट में उपलब्ध ओनो साफ्टवेयर के जरिए नॉमिनेशन दाखिल कर सकेंगे। इस संबंध में उप जिला निर्वाचन अधिकारियों, रिटर्निंग एवं सहायक रिटर्निंग अधिकारियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ऑनलाइन ट्रेनिंग भी दी गई है।

नामांकन निरस्त होने की आशंका कम हो जाएगी

ऑफलाइन भरे गए नाम निर्देशन पत्र में कई बार लिपकीय त्रुटियां और कांट छांट बहुत अधिक होती है। इस वजह से नाम निर्देशन पत्र निरस्त होने की आश्ंाका बढ़ जाती है। ऑनलाइन हो जाने से इसमें कमी आएगी, क्योंकि फॉर्म सबमिट करने के पहले इसमें करेक्शन किया जा सकेगा। जब सारी प्रविष्टियां भरने के बाद अभ्यर्थी पूर्णत: संतुष्ट हो जाएं तब फॉर्म सबमिट करें। फॉर्म सबमिट करने के बाद इसका प्रिंट आउट लिया जा सकता है, ताकि एक बार पुन: फॉर्म पढ़ सकें। साथ ही आयोग द्वारा अभ्यर्थियों को 2 बार नाम निर्देशन पत्र दाखिल करने की सुविधा दी गई है ताकि यदि कोई त्रुटि रह गई हो तो उसे दूर किया जा सके।

अभ्यर्थी मोबाइल नंबर से क्रिएट करेंगे अकाउंट

0. अभ्यर्थियों को ओनो सॉफ्टवेयर के माध्यम से फॉर्म भरने के लिए पहले एक अकाउंट बनाना होगा।
0. यह सॉफ्टवेयर आयोग की वेबसाइट (डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट सीजीईसी डॉट जीओवी डॉट इन) पर उपलब्ध है।
0. सबसे अनिवार्य होगा अभ्यर्थी का मोबाइल नंबर, सुरक्षा की दृष्टि से यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि बिना ओटीपी के लॉगिन आईडी क्रिएट नहीं किया सकता।
0. इसलिए अभ्यर्थी वही मोबाइल नम्बर चुनें जिनका उपयोग वे स्वयं कर रहे हैं।
0. ओनो के पोर्टल पर नगरीय निकाय चुनाव वाले सेक्शन में जाकर अभ्यर्थी अपना मोबाइल नंबर डालकर अपनी आईडी क्रिएट करेंगे और 8 कैरेक्टर्स का पासवर्ड बनाएंगे।

ओटीपी होगा अनिवार्य

0. इसके बाद अभ्यर्थी के मोबाइल पर एक ओटीपी आएगा जिसे दर्ज करना होगा तभी अकॉउंट बनेगा।
0. पासवर्ड भूलने की दशा में मोबाइल नंबर के माध्यम से ही दूसरा पासवर्ड बनाया जा सकेगा।
0. यहां पर उम्मीदवार को सारे नियमों-अधिनियमों की जानकारी भी उपलब्ध रहेगी ताकि उनको फॅार्म भरने के पहले ही सारी ज़रूरी जानकारी मिल जाए।
0. इसमें अभ्यर्थियों के लिए मार्गदर्शिका और चेक लिस्ट भी दी गई है।

राज्य निर्वाचन आयुक्त ठाकुर राम सिंह ने बताया है कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग देश का पहला ऐसा आयोग है जिसने यह पहल की है। 2019 के नगरीय निकाय चुनावों में पहली बार इस सॉफ्टवेयर का उपयोग किया गया था, लेकिन उस समय ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके उपलब्ध थे। इस बार 15 नगरीय निकायों में होने वाले आम चुनाव और 14 निकायों में होने वाले उप चुनाव में ऑनलाइन प्रक्रिया को अनिवार्य कर दिया गया है। नाम निर्देशन प्रपत्र शत प्रतिशत ऑनलाइन भरे जाएं। यह कोविड-19 के लिहाज से भी काफी उपयोगी साबित होगा। इसके लिए जिला स्तर पर भी मार्गदर्शन उपलब्ध रहेगा।


नगरीय निकायों के चुनाव संबंध में कलेक्टर एस पी की बैठक 

प्रदेश के 10 जिलों के 15 नगरीय निकायों में आगामी समय में होने वाले आगामी आम चुनाव के संबंध में राज्य निर्वाचन आयुक्त ठाकुर राम सिंह ने महत्वपूर्ण बैठक ली। बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव रिमिजुइस एक्का सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव डीडी सिंह, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के विशेष सचिव सी आर प्रसन्ना, सहित संबंधित जिलों के कलेक्टर और एस पी शामिल हुए।

बैठक में निर्वाचन प्रक्रियाओं के दौरान कोविड-19 गाईडलाईन के पालन के संबंध में विस्तार से चर्चा हुई। निर्वाचन आयुक्त ठाकुर राम सिंह ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के विशेष सचिव से खास तौर पर इस संबंध में चर्चा की। उन्होेंने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए कि नाम निर्देशन पत्र दाखिल करने से लेकर मतगणना तक कोविड गाइडलाइन का कड़ाई से पालन करना है। मतदान केंद्रों में सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजर एवं मास्क की व्यवस्था रखें। मतदान दलों का गठन करने से पूर्व इस बात पर विशेष ध्यान दें कि सभी मतदान कर्मी वैक्सीनेटेड हों। उन्होंने कहा कि मतदान केन्द्र, नामांकन प्राप्ति केन्द्र, संवीक्षा केन्द्र, वितरण, वापसी केन्द्र इत्यादि गतिविधियों एवं केन्द्रों पर कोविड-19 गाईडलाईन का पालन करने के साथ-साथ मतदान कार्य में लगे कार्मिकों के लिए उचित चिकित्सा व्यवस्था रखें।

निर्वाचन आयुक्त ने बैठक में निर्देश दिए कि सभी कलेक्टर अपने-अपने जिलों में मतदान केंद्रों का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्था की जानकारी लें। उन्होंने कहा कि यदि किसी परिस्थिति में मतदान केंद्र का बदलाव किया जाता है, तो इस संबंध में मतदाताओं को जानकारी देने के लिए अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करें। मतदान केन्द्रों में मतदान हेतु आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करें साथ ही मतदाताओं के लिए पेयजल, शौचालय आदि की व्यवस्था होना चाहिए। सिंह ने कहा कि अपने-अपने क्षेत्रों में मतदान केन्द्रों का भौतिक सत्यापन कर, मतदान केन्द्रों की वार्डवार संख्यात्मक जानकारी, संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतदान केन्द्रों का चिन्हांकन कर लें। सुरक्षा संबंधी छोटी से छोटी बात का ध्यान रखा जाए। 

निर्वाचन आयुक्त ने सभी 15 निकायों में आर.ओ. और ए.आर.ओ. नियुक्ति हेतु अधिकारियों की उपलब्धता की जानकारी ली और कहा कि यदि अधिकारी-कर्मचारी की उपलब्धता में कोई कमी हो तो आयोग को अवगत कराएं, ताकि सामान्य प्रशासन विभाग से इस संबंध में बातचीत की जा सके। उन्होंने कहा कि योग्य एवं एफिशिएंट अधिकारी कर्मचारियों का चयन आर.ओ. और ए.आर.ओ. और सेक्टर ऑफिसर के रूप में करें। निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि निर्वाचन व्यय पर भी पैनी निगाह रखें। निर्वाचन व्यय संपरीक्षक इस कार्य को अंजाम देंगे। सिंह ने मतपत्रों के मुद्रण हेतु  मुद्रणालय में मुद्रण की व्यवस्था  के साथ साथ सुरक्षा व्यवस्था पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्वाचन कार्य में जहां तक संभव हो शासकीय वाहन का ही इस्तेमाल करें बहुत आवश्यक होने पर ही किराए के वाहन का उपयोग किया जाए। उन्होंने कलेक्टरों से जिले में उपलब्ध वाहनों की संख्यात्मक जानकारी भेजने को भी निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि शासकीय वाहनों को यदि मरम्मत की ज़रूरत हो तो यह कार्य प्राथमिकता के आधार पर करवा लें। राज्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि सामग्री वितरण, वापसी केन्द्र, स्ट्रांग रूम एवं मतगणना केंद्र के लिए ऐसे स्थान का चयन करें जहां कोविड 19 के गाइडलाइन का अनुपालन सुनिश्चित हो सके। इसके लिए बड़ी जगह का चयन करें और सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद रहे। उन्होंने नाम निर्देशन पत्र दाखिल करने के लिए ओनो सॉफ्टवेयर का शतप्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करने कहा है। सिंह ने उम्मीदवारों को ओनो के संबंध में सहायता देने सुविधा केन्द्र की स्थापना और सुविधा केन्द्र पर कम्प्यूटर ऑपरेटर एवं कर्मचारियों की नियुक्ति, कम्प्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर आदि के इंतजाम रखने के निर्देश भी दिए।

मतदाताओं को करें अधिक से अधिक जागरूक युवा मतदाताओं की सहभागिता बढ़ाने करें व्यापक प्रचार-प्रसार

निर्वाचन आयुक्त ने मतदान का प्रतिशत बढ़ाये जाने औऱ मतदाताओं को जागरूक एवं प्रशिक्षित करने जाबो कार्यक्रम के द्वारा अधिक से अधिक प्रचार प्रसार के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि युवा मतदाताओं को मतदान के महत्व से अवगत कराने के लिए मतदाता जागरूकता अभियान का व्यापक प्रचार प्रसार करें इसके लिए सभी जिलों में जाबो कार्यक्रम के नोडल नियुक्त करें।

निर्वाचन के दौरान एक ही प्रकार की मत पेटी का करें उपयोग

निर्वाचन आयुक्त ने निर्देश दिए कि निर्वाचन के दौरान एक ही प्रकार की मत पेटी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए उन्होंने बताया कि वर्तमान में दो प्रकार की मत पेटियां गोदरेज टाइप दूसरी एमपी टाइप उपलब्ध है। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि उपलब्ध मत पेटियों को सरलता से उपयोग में लाने योग्य बनाने के लिए यह सुनिश्चित कर लें कि सभी अच्छी वर्किंग कंडीशन में हो, आवश्यक हो तो मत पेटियों की ऑयलिंग  इत्यादि करवा लें। सिंह ने कहा कि हमारे पास पर्याप्त मात्रा में बैलट बॉक्स उपलब्ध है अतः किसी भी स्थिति में डैमेज्ड या जंग लगे बैलट बॉक्स उपयोग में नहीं आने चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का सबसे बड़ा कार्य निर्वाचन है सभी निर्वाचन सामग्रियों की गुणवत्ता चेक कर लें। 

बैठक में निर्वाचन प्रतिबंधात्मक कार्यवाही (धारा 144 एवं अन्य धारा अन्तर्गत),बल की व्यवस्था, बस्तर संभाग के जिलों के लिए सुरक्षा व्यवस्था आवश्यकतानुसार अस्त्र-शस्त्र लायसेंस जमा करने संबंधी आदेश,सभा जुलूस का नियमन आदि पर भी चर्चा की गई। उन्होंने मतदान के पूर्व शराब पर प्रतिबंध लगाने के सम्बंध में भी चर्चा की। इसके अलावा छत्तीसगढ़ स्थानीय प्राधिकारी (निर्वाचन अपराध) अधिनियम, 1964 छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985, ध्वनि विस्तार यंत्रों पर प्रतिबंध, छत्तीसगढ़ संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम, 1994, आदर्श आचरण संहिता का पालन पर भी चर्चा की गई।

आदर्श आचार संहिता के प्रमुख प्रावधान क्या है ? (What are the key Provisions of the Model Code of Conduct ?)

आदर्श आचार संहिता में सामान्य आचरण, बैठकें, जुलूस, मतदान दिवस, मतदान केंद्र, आब्जर्वर, सत्ता में पार्टी एवं चुनाव घोषणा पत्र आदि के साथ 8 प्रमुख प्रावधान प्रदर्शित किये गये है. इन सभी के आधार पर ही चुनाव आचार संहिता लागू होती है. इसके बारे में जानकारी इस प्रकार है–

    •    सामान्य आचरण :- किसी भी राजनीतिक पार्टी को अपने विपक्षी दल की आलोचना उनकी नीतियों, कार्यक्रमों, पिछले रिकॉर्ड एवं कार्य तक ही सीमित रखना चाहिए. कुछ ऐसी गतिविधियों पर इसमें पूरी तरह से प्रतिबन्ध लगाया गया है जोकि इस प्रकार है –

    1    सुरक्षित वोटों के लिए जातिगत और सांप्रदायिक भावनाओं का उपयोग करना,

    2    असत्यापित रिपोर्ट के आधार पर उम्मीदवारों की आलोचना करना,

    3    मतदाताओं को रिश्वत देना या डराना,

    4    किसी व्यक्ति के घरों के बाहर प्रदर्शन या धरना आयोजित करना.

    •    बैठकें :- सभी राजनीतिक पार्टियों को कार्यक्रम स्थल के बारे में स्थानीय पुलिस अधिकारियों को सूचित करना चाहिए और साथ ही पुलिस को समय पर किसी भी बैठक के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था करने में सक्षम बनना चाहिए.

    •    जुलूस :- यदि दो या दो से अधिक उम्मीदवार एक ही मार्ग से जुलूस निकालने की योजना बनाते हैं, तो आयोजकों को यह सुनिश्चित करने के लिए पहले से ही संपर्क स्थापित करना होगा, कि जुलूस क्लैश न करें. इसके साथ ही राजनीतिक पार्टियों के सदस्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले पुतलों को ले जाने और जलाने की अनुमति भी नहीं दी गई है.

    •    मतदान दिवस :- मतदान केन्द्रों पर सभी अधिकारिक पार्टी कार्यकर्ताओं को पहचान पत्र दिया जाना चाहिए. इनमें पार्टी का नाम, प्रतीक या उम्मीदवार का नाम नहीं होना चाहिए.

    •    मतदान केंद्र :- केवल मतदाता और चुनाव आयोग के लोगों को ही मतदान केन्द्रों में प्रवेश करने की अनुमति होगी. इसके अलावा कोई भी मतदान केंद्र में प्रवेश नहीं कर सकता है.

    •    निरीक्षक :- चुनाव आयोग द्वारा एक निरीक्षक को भी नियुक्त किया जाता है, उनसे कोई भी उम्मीदवार चुनाव के संचालन के संबंध में किसी भी प्रकार की समस्याओं की रिपोर्ट कर सकता है.

    •    सत्ता में पार्टी :- आदर्श आचार संहिता ने सन 1979 में सत्ता में पार्टी के आचरण को नियमित करने के लिए निम्न प्रतिबन्ध लगाये हैं –

    1    मंत्रियों को चुनाव कार्यों के साथ अधिकारिक यात्राओं को कंबाइन नहीं करना चाहिए या इसके लिए अधिकारिक मशीनरी का उपयोग नहीं करना चाहिए.

    2    चुनावों में जीत की संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए पार्टी को सरकारी खजाने की कीमत पर विज्ञापन देने या प्रचार के लिए अधिकारिक जन माध्यमों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए.

    3    मंत्रियों और अन्य अधिकारीयों को किसी भी वित्तीय अनुदान की घोषणा नहीं करनी चाहिए, या सड़कों के निर्माण, पेयजल की व्यवस्था आदि का वादा भी नहीं करना चाहिए.

    4    अन्य पार्टियों को सार्वजनिक स्थानों और रेस्ट हाउस का उपयोग करने की अनुमति दी जानी चाहिये, और सत्ता में जो पार्टी है उसका एकाधिकार नहीं होना चाहिए.

    •    चुनाव घोषणा पत्र :- इसे सन 2013 में जोड़ा गया है, यह दिशानिर्देश पार्टियों को ऐसे वादे करने से रोकते हैं, जो मतदाताओं पर अनुचित प्रभाव डालते हैं. और उन्हें सुझाव देते है कि घोषणापत्रों में वादों को हासिल करने के साधन भी बताये गये हैं.

आचार संहिता कब लागू होती है ? कुल अवधि (When Model Code of Conduct In forced, Total Duration)

आदर्श आचार संहिता या चुनाव आचार संहिता को मतदान कार्यक्रम की घोषणा वाले दिन से लागू किया जाता है, और अधिसूचना के अनुसार आचार संहिता चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने और उसके बाद परिणाम की घोषणा होने तक जारी रहती है. अर्थात यह कुल मिलाकर लगभग 45 दिन या 2 महीने तक लागू रहती है. यह सभी राजनीतिक पार्टियों और ‘केयरटेकर’ गवर्नमेंट के ऊपर लागू होता है.

आचार संहिता को क्यों और कैसे लागू किया जाता है ? (Why and How Model Code of Conduct Apply ?)

 

जैसा कि पहले ही बताया गया है, कि इसे कानूनी रूप से मान्यता नहीं दी गई है. तो फिर बात आती है, कि यह क्यों और कैसे लागू होता है. आपको बता दें, कि हमारे भारत देश के संविधान के ‘आर्टिकल 324’ के तहत चुनाव आयोग को कुछ अधिकार दिए जाते हैं, ताकि वे देश में केंद्र या राज्य दोनों स्तर पर राजनीतिक पार्टियों के उम्मीदवारों के बीच स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव आयोजित कर सकें. इसके अलावा उन्हें ‘रिप्रजेंटेशन ऑफ़ द पीपल एक्ट’ के तहत भी कुछ अधिकार दिए गये हैं. दरअसल चुनाव को निष्पक्ष तरीके से आयोजित करने के लिए चुनाव आयोग के पास कुछ शक्ति होना जरूरी थी. इसलिए सभी पार्टियों के साथ – साथ चुनाव आयोग ने मिलकर कुछ नियम निर्धारित किये. जिसे आचार संहिता नाम दिया गया.

इसमें यदि कोई राजनीतिक पार्टी द्वारा विभिन्न जातियों और समुदायों, धार्मिक या भाषाओं के बीच आपसी विरोध पैदा होता है या दंगे जैसी गतिविधियां होती है, तो उनके खिलाफ कार्यवाही करने का अधिकार भी चुनाव आयोग को मिल जाता है. इसलिए एवं इस तरह से आचार संहिता लागू की जाती है.