Selling Government Company: अब सरकारी कंपनी बेचने के लिए कैबिनेट की मंजूरी जरूरी नहीं. जाने और क्या हुआ बदलाव.

Selling Government Company: Now cabinet approval is not necessary to sell a government company. Know what happened and change. Selling Government Company: अब सरकारी कंपनी बेचने के लिए कैबिनेट की मंजूरी जरूरी नहीं. जाने और क्या हुआ बदलाव.

Selling Government Company: अब सरकारी कंपनी बेचने के लिए कैबिनेट की मंजूरी जरूरी नहीं. जाने और क्या हुआ बदलाव.
Selling Government Company: अब सरकारी कंपनी बेचने के लिए कैबिनेट की मंजूरी जरूरी नहीं. जाने और क्या हुआ बदलाव.

Selling Government Company:

 

अब केंद्रीय सरकारी कंपनी को अपनी अनुषंगी कंपनी में विनिवेश के लिए कैबिनेट की सैद्धांतिक मंजूरी नहीं लेनी होगी। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी की बैठक में यह फैसला किया गया। अब तक किसी भी केंद्रीय सरकारी कंपनी के बोर्ड को अपनी किसी अनुषंगी के विनिवेश के लिए, उसमें हिस्सेदारी बेचने के लिए या बंद करने के लिए कैबिनेट की मंजूरी लेनी पड़ती थी। (Selling Government Company)

बुधवार के फैसले के बाद कंपनी के निदेशक मंडल को कंपनी की सब्सिडियरी को बंद करने, उसमें अपनी हिस्सेदारी बेचने, संयुक्त कंपनियों की यूनिट के विनिवेश संबंधी बिक्री का फैसला लेने का अधिकार दे दिया गया। सिर्फ महारत्न कंपनियों से जुड़ी किसी भी बिक्री या विनिवेश के लिए कैबिनेट की मंजूरी की आवश्यकता होगी। (Selling Government Company)

पीएसई नीति 2021 को ध्यान में रखते हुए किया फैसला:

सरकार ने यह फैसला पीएसई नीति 2021 को ध्यान में रखते हुए किया है। ताकि किसी भी कंपनी के विनिवेश या उनकी सब्सिडियरी में निवेश जैसे फैसले तेजी से किए जा सकें। बिक्री या निवेश के फैसले में देरी से लागत में भी बढ़ोतरी होती है। हालांकि विनिवेश करने या कंपनी बंद करने जैसे किसी भी निर्णय में तय मानकों का पालन सुनिश्चित करना होगा। (Selling Government Company)

गत वित्त वर्ष में विनिवेश लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाई सरकार: 

पीएसई नीति 2021 के मुताबिक सरकार केंद्रीय कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी को कम करना चाहती है या फिर पूरी तरह से उससे बाहर निकलना चाहती है। रणनीतिक क्षेत्रों को छोड़ अन्य सभी क्षेत्रों से जुड़ी कंपनियों को बेचने या विनिवेश का फैसला पहले ही किया जा चुका है। सरकार रणनीतिक क्षेत्रों को छोड़ अन्य किसी भी क्षेत्र में चलने वाली घाटे की कंपनियों को बेचना चाहती है और कई प्रमुख कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी कम करना चाहती है। पिछले वित्त वर्ष 2021-22 में इस काम में सरकार को खास सफलता हाथ नहीं लगी थी। सरकार पिछले वित्त वर्ष 2021-22 और उससे पूर्व के वित्त वर्ष में भी अपने विनिवेश लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाई थी। (Selling Government Company)