CG:विश्व पर्यावरण दिवस पर ब्रह्माकुमारीज बेमेतरा ने किये पौधारोपण

CG:विश्व पर्यावरण दिवस पर ब्रह्माकुमारीज बेमेतरा ने किये पौधारोपण
CG:विश्व पर्यावरण दिवस पर ब्रह्माकुमारीज बेमेतरा ने किये पौधारोपण

संजू जैन :7000885784
बेमेतरा:ब्रह्माकुमारीज बेमेतरा ने  विश्व पर्यावरण दिवस जल जन अभियान के अंतर्गत कल्पतरुह हमारी पृथ्वी हमारा भविष्य कार्यक्रम में पौधारोपण किया। 
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध साहित्यकार दिनेश गौतम, लिनेश क्लब अध्यक्ष विनोद राघव, सहयोग संस्था सदस्य व्याख्याता प्रभारी प्राचार्य  नलेश्वर साहू रहे तथा आशीर्वचन ब्रह्माकुमारीज बेमेतरा सेवा केंद्र प्रभारी बी के शशि दीदी जी ने किया। शशि दीदी जी ने कहा कि पर्यावरण का सीधा संबंध हमारे अंतःकरण मन से है, आज हम सभी पर्यावरण को सुधारने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं कि पेड़ लगाना, प्लास्टिक का उपयोग नहीं करना ये सब तो हम करते ही हैं, लेकिन  सके पीछे कारण क्या है, पर्यावरण दिवस मनाने की आवश्यकता ही क्यों पड़ी, 1972 में पर्यावरण दिवस मनाने का संकल्प लिया गया, और 1974 से लगातार हर वर्ष हम सभी पर्यावरण दिवस मना रहे हैं। क्योंकि पर्यावरण हैं तो हम हैं, आज हम देखते हैं कि प्रकृति के तत्व जल वायु अग्नि आकाश और पृथ्वी, प्रकृति के ये पांचों तत्व हम सभी की निःस्वार्थ रूप से सेवा कर रहे हैं लेकिन आज प्रकृति का हम सबने दोहन किया है, बड़ी बड़ी इमारतों को खड़ा करके, या बड़ी बड़ी फैक्ट्रियां लगा करके हम सबने प्रकृति के संतुलन को बिगाड़ा है, अभी हम सभी मिलकर के प्रकृति के संतुलन को बनाने का प्रयास करेंगे, तो इन सबके पीछे जो कारण है, कि अंधाधुन पेड़ कटे जा रहे हैं उसका कारण है मनुष्य की अत्याधिक इच्छाएं, लालच, ईर्ष्या ये जो अवगुण हैं ये मनुष्य के अंदर से ही पनपते हैं, तो अगर हम प्रकृति को बचाना चाहते हैं, तो सबसे बड़ा जो प्रदुषण है, वह है मनुष्य के मन का प्रदुषण, अगर मन के अंदर ये विकृतियां आ गई हैं तो प्रदुषण तो बढ़ता ही जायेगा, तो सबसे जरुरी है कि मन में हम इन सबके प्रति एक कृतघ्नता, दया का भाव, रहम का भाव पैदा करें। क्योंकि हम सब इनके बलबूते हैं, ये हैं तो हम सुरक्षित हैं, और ये नहीं तो हमारा भी वजूद नहीं है।  क्योंकि दुनिया चल ही है, इन चीजों से - प्रकृति, पुरुष और परमात्मा। प्रकृति अर्थात हमारा शरीर, पुरुष अर्थात आत्मा, और तीसरा परमात्मा। पर्यावरण और अध्यात्म का बहुत गहरा संबंध है। आध्यात्मिकता हमें वास्तविकता की ओर ले जा कर प्रकृति और पुरूष (आत्मा) के गहरे संबंध का अनुभव कराती है। भारतीय संस्कृति पर्यावरण के साथ बहुत नजदीक से जुड़ी है। हमारी जीवनशैली सदा ही पर्यावरणमित्र शैली रही है। परंतु वर्तमान समय प्रकृति और अध्यात्म का समन्वय विगड़ गया है। हम प्रकृति का उपयोग उसका शोषण करने के लिए नहीं बल्कि विकास की मशाल को जलाकर रखने के लिए करें। ये उद्गार ब्रह्माकुमारी संस्थान रेस्ट हॉउस रोड में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित लिनेश क्लब अध्यक्ष श्रीमति विनोद राघव जी ने दीप प्रज्वलन करने के उपरांत व्यक्त किये। कार्यक्रम में उपस्थित सहयोग संस्था सदस्य व्याख्याता प्रभारी प्राचार्य  नलेश्वर साहू जी ने कहा कि प्रदूषण के फलस्वरूप प्रकृति के पांचों तत्वों का विध्वंसक रूप देखने को मिल रहा है। प्रकृति यह संदेश दे रही है कि अब यह जागने का समय है। अब प्रकृति के साथ जुडक़र उसे देवतुल्य मानने की परंपरा को जीवित रखने की आवश्यकता है। हमें आध्यात्मिक जीवन को अपनाकर अपने हृदय में प्रकृति के प्रति निच्छल प्रेम जगाने की आवश्यकता है। अब हम सभी आदतों को परिवतन करें और प्रकृति की रक्षा के लिए कुछ संकल्प करें। आधुनिक जीवन शैली के कारण बढ़ते प्रदूषण को रोक लगाना आवश्यक है प्रत्येक व्यक्ति यह संकल्प ले कि अपने जीवन काल में कम से कम 10 पेड अवश्य लगाये एवं उसका संरक्षण करें। इससे पर्यावरण संतुलित रहेगा। प्रसिद्ध साहित्यकार दिनेश गौतम जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि पर्यावरण को नजर अन्दाज करना ही मानव जीवन के लिए विपत्तियों का कारण बन गया है। पांचों तत्वों की सुरक्षा के लिए भारत की अहम भूमिका रही है। तभी तो पांचों तत्वों की पूजा की जाती है। आईये इस विश्व पर्यावरण दिवस पर शांति और सदभाव का वातावरण बनाने का लक्ष्य रखें। भौतिक पर्यावरण को बचाते हुए इस बार सूक्ष्म पर्यावरण पर भी नजर डाली जाय। उन्होंने कहा मॉल या मंदिर में एक ही लोग आते हैं। हालांकि हर जगह की ऊर्जा अलग-अलग होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक ही लोग अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग विचार और भावनाएं पैदा करते हैं। एक ही लोग रेस्टोरेंट में खाना खाते हैं और आश्रमों, गुरूद्धवारों में ब्रह्माभोजन व लगंर भी। लेकिन खाना खाते समय उनके मन में उठने वाले विचार अलग अलग होते है। सभी अतिथियों द्वारा पौधा रोपण कर कार्यक्रम संपन्न हुआ।