मन से भटके हुए इंसान, अपने मन को पुनः स्थिर कैसे करें, जो अपने जीवन को सुगम बना सके.
People who have lost their mind,




NBL,24/07/2022, Lokeshwer Prasad Verma,.. People who have lost their mind, how to restore their mind, which can make their life easy.
जिस इंसान का मन भटक रहा है, तो आप जान ले उस इंसान का नाश निश्चित है, पढ़े विस्तार से...
मन एक ऐसा द्रव्य है, जिसे कंट्रोल कर पाना हर एक मनुष्य की बस की बात नहीं है, और जिस इंसान का मन भटक रहा है, तो आप जान लो वह इंसान न ही अपना हित कर पाएगा न ही अन्य अपने इर्द गिर्द लोगों का हित कर पाएंगे, और इसके मुख्य कारण है, लालच।
जिस इंसान के अंदर लालच का गाढ़ा परत चढ़ा है, उस इंसान के अंदर के मानवीय मानवता स्वभाव मे एकनिष्ठ पन का आभाव हो जाता है, और अपने खुद के स्वार्थ हित में पड़ कर अपने सत्य रूपी दर्पण मे दाग लगा लेता है, और खुद ये जान नहीं पाते की क्या अच्छा है, या क्या बुरा है, बस इनके भटके मन जो कहेगा उसी को अपना निर्णय और सत्य मान बैठता है, और यही इनके दुर्दशा का मुख्य कारण है, और इनके लालची स्वभाव का अंत न होना उनके खुद की नाश का कारण है।
मन से भटके हुए इंसान की नेटवर्क अन्य साधारण व्यक्ति से कही ज्यादा आम लोगों तक फैला हुआ होता है, क्योकि इनके अपने लालच की पूर्ति हेतु इन्ही नेटवर्क के लोगों के द्वारा पुरा करने का मार्ग होता है, अन्य लोगों का सहारा लेकर अपने मंजिल को हासिल करना चाहते हैं, और इन्ही लोगों के बातों में आकर और अपने लालची स्वभाव के कारण इनके मन का विश्वास कमजोर होते हुए असत्य का आवरण अपने मन मस्तिष्क मे चढ़ा लेता है। उनके अपने नेटवर्क के लोगों का सच और झुठ की बातों में आकर अपने आप मे विद्वान होने की अहम के कारण वह खुद अपने अहम का शिकार हो जाते हैं।
आज भारत देश के साथ साथ अन्य देश के लोगों मे भी ये भयंकर रूप मे फैलती हुई आगे बढ़ रही है, जिससे देश दुनिया मे मानवीय मूल्यों का अभाव होते हुए आपको दिखाई दे रहा है। सत्य की सार्थक स्वरूप लुप्त होती जा रही है। और असत्य हावी हो रही है, और लोग आपस मे उलझ रहे हैं, और सत्य और असत्य की सही परिभाषा समझ से परे हो रही हैं और देश दुनिया के लोगों का मन भटक रहा है, अपने निजी स्वार्थ के आपूर्ति के लिए लोग मानवता वाद को भूलती जा रही है। जो बहुत ही बड़ा चिंता का विषय है।
अगर आप इस मन से भटके आभाव से ग्रस्त हैं, और बहुत ही आप अपने आप मे आशांत है, तो आप अपने जीवन के जरूरत के हिसाब से संचय कीजिए, और जो आपके जीवन काल की अवधि है, उनके हिसाब से अपना रास्ता बनाये, ना की आप अतिरिक्त धन संचय करने के उलझन में पड़े रहे, और आप अपने आप मे संतुष्ट रहे, तो ही आप बिना रोग की आरोग जीवन जी सकते है। नहीं तो आप अपने मन की भटके रास्ता मे चलकर अपने सुगम सरल रास्ता से ही भटक जायेंगे। ना ही ईश्वर आपके ऊपर कृपा करेगी, चाहे आप जिस भी धर्म से हो, अशांत व्यक्ति अपने आप मे खुद नर्क की अनुगामी है, इसमें ईश्वर को दोष देना हमारी मूर्खता है। सादा जीवन उच्च विचार के बल पर ही आप अपने जीवन में सुखी आप रहे सकते हैं, हम खाली हाथ आये थे और खाली हाथ हम जायेंगे इसको स्मरण मे सदा रखे, और श्मशान घाट को अपना घर मंदिर माने, और समय समय मे उस मंदिर का दर्शन करें, तो ही आप अपने आप को कंट्रोल कर सकते हैं।