भाजपा ही एक आदिवासी को देश का उच्च पद दे सकती है-दीपिका

भाजपा ही एक आदिवासी  को देश का उच्च पद दे सकती है-दीपिका
भाजपा ही एक आदिवासी को देश का उच्च पद दे सकती है-दीपिका

सुकमा- एनडीए के द्वारा राष्ट्रपति की उम्मीदवार के नाम पर ओड़िसा की द्रोपदी मुर्मू के नाम की घोषणा के पश्चात सिर्फ ओड़िसा में ही नहीं ओड़िसा से लगे हुए छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में भी खुशी का माहौल है इस विषय पर भाजयुमो की प्रदेश उपाध्यक्ष अधिवक्ता दीपिका शोरी ने बयान जारी करते हुए कहा की देश में भारतीय जनता पार्टी व प्रधानमंत्री नरेंद्रे मोदी की ही सोच ही है जो एक आदिवासी को भारतवर्ष का सबसे उच्च पद राष्ट्रपति हेतु आगे बढ़ाया हैँ दलगत राजनीति को छोड़कर भारतवर्ष के सभी पार्टियों के नेताओं व आदिवासी कर्मचारी अधिकारियों व भारतवर्ष की हर महिला को पीएम मोदी का आभार व्यक्त करना चाहिए उन्होंने जो सम्मान आज आदिवासियों एवं महिलाओं को दिया है आज तक किसी भी पार्टी नें नहीं सोचा था मोदी सरकार लगातार आदिवासी व दलितों व महिलाओं के हित के लिए कार्य कर रही है द्रोपदी मुर्मू को राष्ट्रपति चेहरा बनाकर मोदी सरकार ने महिलाओं को जो सम्मान दिया है उस हेतु मै आभार व्यक्त करती हुँ *पार्षद से राष्ट्रपति का सफर* दीपिका ने कहा की राष्ट्रपति हेतु एन डी ए की ओर से द्रोपदी मुर्मू जी ऐसे ही उम्मीदवार नहीं बनाई गई है उनका पूरा जीवन राजनीति व समाजसेवा को समर्पित रहा है द्रौपदी मुर्मू ने साल 1997 में राइरंगपुर नगर पंचायत के पार्षद चुनाव में जीत दर्ज कर अपने राजनीतिक जीवन का आरंभ किया था। उन्होंने भाजपा के अनुसूचित जनजाति मोर्चा के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया है। साथ ही वह भाजपा की आदिवासी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य भी रहीं है। द्रौपदी मुर्मू ओडिसा के मयूरभंज जिले की रायरंगपुर सीट से 2000 और 2009 में भाजपा के टिकट पर दो बार जीती और विधायक बनीं। ओडिसा में नवीन पटनायक के बीजू जनता दल और भाजपा गठबंधन की सरकार में द्रौपदी मुर्मू को 2000 और 2004 के बीच वाणिज्य, परिवहन और बाद में मत्स्य और पशु संसाधन विभाग में मंत्री बनाया गया था *पहली आदिवासी राज्यपाल बनने का गौरव भी इन्हे प्राप्त है* दीपिका ने बताया कि द्रौपदी मुर्मू मई 2015 में झारखंड की 9वीं राज्यपाल बनाई गई थीं। झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनने का खिताब भी द्रौपदी मुर्मू के नाम रहा। साथ ही वह किसी भी भारतीय राज्य की राज्यपाल बनने वाली पहली आदिवासी भी हैं।