सुलोनी,मानिकचौरी,नवागांव,अकोला के उचित मूल्य की दुकान के उपभोक्ताओं को पता ही नहीं की उनको अप्रैल और मई की चांवल मिलना कितना है नहीं की गई जानकारी चस्पा ना ही मिल रहा बिल जाने क्या है इन सबका कारण पढ़े पूरी खबर

सुलोनी,मानिकचौरी,नवागांव,अकोला के उचित मूल्य की दुकान के उपभोक्ताओं को पता ही नहीं की उनको अप्रैल और मई की चांवल मिलना कितना है नहीं की गई जानकारी चस्पा ना ही मिल रहा बिल जाने क्या है इन सबका कारण पढ़े पूरी खबर
सुलोनी,मानिकचौरी,नवागांव,अकोला के उचित मूल्य की दुकान के उपभोक्ताओं को पता ही नहीं की उनको अप्रैल और मई की चांवल मिलना कितना है नहीं की गई जानकारी चस्पा ना ही मिल रहा बिल जाने क्या है इन सबका कारण पढ़े पूरी खबर

बिलासपुर//गरीबों के हक पर राशन दुकानदार मार रहा डंडी,अप्रैल और मई के एक्स्ट्रा चांवल को लेकर ग्रामीणों को जानकारी ही नहीं और जानकारी के आभाव के कारण ग्रामीणों को कही एक महीने का दिया एक्स्ट्रा तो कही 5 किलो जोड़ कर दे दिया जा रहा है इसका पूरा लाभ उचित मूल्य के दुकान संचालक उठा रहे है हमने कई गावो के ग्रामीणों से इस पर बात किया तो उन्होंने बताया की जब हम दो महीने की एक्स्ट्रा चांवल देने की बात बोलते है तो विक्रेता बोलता है एक महीने का ही आबंटित हुआ है इसलिए एक महीने का दे रहे है उसमे भी सिर्फ 5 किलो जोड़ कर बांटा जा रहा है मस्तूरी क्षेत्र में यह हाल हर तीसरे दुकान की है यहाँ दुकान संचालकों को अधिकारियों की भी डर नहीं खुल कर भ्रस्टाचार को अंजाम दे रहे है यहाँ अधिकतर उचित मूल्य की दुकानों में मशीन से बिल तो निकलता ही नहीं ना उपभोक्ताओं को बील दिया जा रहा है ना ही सरकार द्वारा जारी की गई गाइड लाइन का पालन किया जा रहा है ! जब हमने इन सारी समस्याओ को लेकर अधिकारियों से बात की तो उन्होंने बताया की क्षेत्र के सारे राशन दुकान संचालकों को आदेशित किया गया है की किस राशन कार्ड धारी को कितना राशन मिलना है उसकी पूरी जानकारी अपने राशन दुकान के सामने चस्पा करे ताकि सभी उपभोक्ताओं को इसकी जानकारी हो पर विभाग के आदेश को संचालक ठेंगा दिखा कर अपने मंसूबो को अंजाम दे रहे है मस्तूरी के ग्राम सुलोनी,मानिकचौरी नवागांव,अकोला,में उचित मूल्य की दुकान के सामने जानकारी चस्पा नहीं होने पर हमने पूछा की आपने जानकारी क्यू नहीं शेयर किया तो जवाब था लगाए थे किसी ने फाड् दिया कंही न कंही इसमें खाद्य निरीक्षक की लापरवाही भी उजागर होती है जो क्षेत्र के हिटलर शाही पे उतारू उचित मूल्य दुकान के  संचालकों को नहीं संभाल पा रहे है जिससे कंही न कंही सरकार की इमेज  ग्रामीणों के बिच ख़राब हो रही है एक तरफ जहाँ सरकार गरीब ग्रामीणों की नए नए योजनाएँ से जीवन सुधारने की कोशिस कर रही है तो दूसरी तरफ ये सरकार की छवि को मिटटी में मिलाने की कोशिस कर रहे है बहर हाल अब देखना होगा की कब तक अधिकारी इस पर संज्ञान लेते है और गरीबो की हक दिलाते है ?