काशी ज्ञान व्यापी मामला: भारत देश के मुसलमानों के ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सरियत कानून से नहीं बल्कि देश के संविधान के कानून से देश चलता है।

India is run not by the Shariat law

काशी ज्ञान व्यापी मामला: भारत देश के मुसलमानों के ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सरियत कानून से नहीं बल्कि देश के संविधान के कानून से देश चलता है।
काशी ज्ञान व्यापी मामला: भारत देश के मुसलमानों के ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सरियत कानून से नहीं बल्कि देश के संविधान के कानून से देश चलता है।

NBL, 04/02/2024, Lokeshwar Prasad Verma, Raipur CG: Kashi Gyan Widespread Case: India is run not by the Shariat law of the All India Muslim Personal Law Board but by the law of the Constitution of the country.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के बयान पर काशी के संतों में उबाल,दी नसीहत: भारत के मुसलमान अपने धार्मिक नियमों के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के शरीयत कानूनों का पालन कर सकते हैं, लेकिन वे देश के संविधान के कानूनों में हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं, बल्कि उन्हें उनके कार्यान्वयन का पालन करना होगा, क्योंकि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और इसकी उचित कार्यप्रणाली है . देश का अपना संविधान और कानून है जिसके लिए अदालत सबूतों को आधार मानकर अपना फैसला सुनाती है, चाहे देश के लोग किसी भी जाति, धर्म या समुदाय के हों, सभी के लिए समान कानून है। इस आधार पर काशी ज्ञान व्यापी मुद्दे को लेकर मुस्लिम लॉ बोर्ड का कोर्ट के प्रति आक्रामक होना देश के संवैधानिक कानूनों की अवमानना ​​है, जो भारत की धर्मनिरपेक्षता के हिसाब से देश हित में ठीक नहीं है। 

वाराणसी,02 फरवरी ज्ञानवापी स्थित व्यासजी के तहखाना पर जिला कोर्ट के फैसले को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बयानबाजी पर काशी के संत नाराज हैं। विवादास्पद और भड़काऊ बयान को अखिल भारतीय संत समिति ने गंभीरता से लिया है। समिति के महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने शुक्रवार को बोर्ड के पदाधिकारियों को सीधे चेतावनी देते हुए कहा कि यह देश संविधान से चलेगा,शरीयत के कानून से नहीं चलेगा।

श्री राम जन्म भूमि किसी की कृपा से नहीं, हमने संविधान और कोर्ट से प्राप्त किया है। स्वामी जितेन्द्रानंद ने कहा कि श्री कृष्ण जन्मभूमि और श्री काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी भी हम कोर्ट से ही प्राप्त करेंगे। हमारी आस्था संविधान में है। रही बात है यह कि कोर्ट और प्रशासन हमारा साथ दे रहा है तो वर्ष 2014 से पहले यही आरोप तो आप पर भी लगाए जा सकते थे। हमने तो यह आरोप कभी नहीं लगाए। जन्मभूमि श्रीराम की है और उसको तीन टुकड़े में बांट दिया जाए कि आप लोगों की धमकी का परिणाम था, इसलिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड मुसलमानों को भड़काने से बाज आए अन्यथा परिणाम उन्हीं के लिए विपरीत होंगे।

स्वामी जितेन्द्रांनद ने कहा कि आज ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के बेहद गैर जिम्मेदाराना और असंवैधानिक धमकियों को गंभीरता से लेते हुए काशी के लगभग तीन सौ संतों ने बैठक किया। जिसमें जगदगुरु शंकराचार्य काशी सुमेरु पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती, जगदगुरु अनंताचार्य, डॉक्टर राम कमल दास वेदांती,संत समिति के प्रवक्ता महंत बालक दास ने एक स्वर में निर्णय लिया कि संविधान को बंधक बनाने ,कोर्ट को धमकी देने के अपने रवैए से बाज आए मुस्लिम समाज, जो कहना है कोर्ट में कहें।

गौरतलब हो कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ज्ञानवापी के व्यासजी तहखाना पर कोर्ट के फैसले को लेकर आयोजित प्रेस कांफ्रेस में कहा कि ज्ञानवापी में जो हो रहा है, उससे वे सदमा में है। वे इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। बोर्ड ने सीधे तौर पर कोर्ट पर ही सवाल खड़ा कर दिया। बोर्ड के पदाधिकारियों ने कहा कि कोर्ट का जल्दबाजी में लिया गया फैसला है। आपस में दूरी पैदा करने की कोशिशि क्यों की जा रही है? दलील की बुनियाद पर फैसला हो। छीनी हुई जमीन पर मस्जिद नहीं बन सकती है। लोगों का भरोसा नहीं टूटना चाहिए।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सैफुल्लाह रहमानी ने यहां तक कह दिया कि अदालतें अब ऐसे चल रही हैं, जिस वजह से भरोसा टूट रहा है। कोर्ट ने जो वाकया पेश किया, वह दुख देता है। 20 करोड़ मुसलमानों को इससे गहरा धक्का पहुंचा है। 

* बनारस में मुस्लिमों की दुकानों की बंदी पर नाराजगी

व्यासजी के तहखाने में हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार मिलने पर नाराज मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए बनारस बंद का एलान किया है। इस पर भी काशी के संतों ने नाराजगी जताकर इसे न्यायालय की अवहेलना बताया है । अखिल भारतीय संत समिति ने कहा कि यह देश संविधान से चलेगा। काशी के सम्मान को ठेस पहुंचाने वालों को काशी कभी माफ नहीं करेंगी।

देश के संविधान और कानून का अनादर करने से देश में दो पार्टियों के बीच अस्थिरता पैदा हो सकती है, बल्कि दोनों धर्मों के बुद्धिजीवियों को देश के अंदर सोच-समझकर ही अपने बयान देने चाहिए, ताकि देश में स्थिरता बनी रहे और देश का संविधान उसके कानूनों के अनुसार है। कोर्ट सबूतों के आधार पर अपना फैसला सुनाता है और देश के हर नागरिक को इसका सम्मान करना चाहिए।