देवउठनी एकादशी २०२४ जानते है वास्तु शास्त्री डॉ सुमित्रा से योग निद्रा के विषय में...

देवउठनी एकादशी २०२४ जानते है वास्तु शास्त्री डॉ सुमित्रा से योग निद्रा के विषय में...
देवउठनी एकादशी २०२४ जानते है वास्तु शास्त्री डॉ सुमित्रा से योग निद्रा के विषय में...

देवउठनी एकादशी २०२४ जानते है वास्तु शास्त्री डॉ सुमित्रा से योग निद्रा के विषय में 

डॉ सुमित्रा अग्रवाल 
वास्तु शास्त्री 
यूट्यूब वास्तु सुमित्रा 

कोलकाता : देवउठनी एकादशी २०२४  को १२  नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा के बाद जागते हैं। इसे प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, और यह विशेष रूप से शुभ मानी जाती है क्योंकि इसके बाद विवाह और अन्य धार्मिक कार्यों की शुरुआत होती है।

तिथि और समय :

एकादशी  तिथि : ११  नवंबर २०२४  को शाम ६ :४६  बजे शुरू होगी और १२  नवंबर २०२४  को शाम ४ :०४  बजे समाप्त होगी​

पूजा मुहूर्त :

सुबह: ६ :५०  से ८ :०९  बजे तक।
शाम: ५ :२५  से ८ :४६  बजे तक​


देवउठनी एकादशी की कथा :

कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। इसे प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं। इस कथा के अनुसार, भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी (योगनिद्रा) से सोने चले जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी पर जागते हैं। इस दिन भगवान विष्णु और तुलसी का विवाह भी मनाया जाता है, जिसे तुलसी विवाह कहते हैं।

देवउठनी एकादशी पर विष्णु भगवान की पूजा और व्रत से सभी प्रकार के पापों का नाश होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।