Swati Maliwal: महिला आयोग अध्यक्ष का सनसनीखेज खुलासा... बोलीं- बचपन में मेरे पिता करते थे मेरा यौन शोषण, डरकर बेड के नीचे छिप जाती थी.....
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Delhi Women Commission Chairman Swati Maliwal Said My Father Used To Sexually Abuse Me In Childhood
Delhi Mahila Aayog Chairman: दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने अपने पिता पर यौन शोषण का आरोप लगाया है। स्वाती ने कहा की ये घटना तब की है, जब मैं बहुत छोटी थी। जब मैं कक्षा 4 में पढ़ती थी, तब तक अपने पिता के साथ रही। तब तक ये काफी बार होता रहा। स्वाति ने कहा की जब मैं बच्ची थी तब पिता मेरा यौन शोषण करते थे। वह मुझे पीटते थे, जिससे मैं बिस्तर के नीचे छिप जाती थी। वो घर आते थे तो बहुत डर लगता था। मैं बहुत छोटी थी।
स्वाती ने कहा की मैं कई बार बिस्तर के नीचे छिप जाती थी और सारी रात प्लानिंग करती थी कि महिलाओं को किस तरीके से हक दिलाना है। बच्चियों और महिलाओं को शोषण करने वालों को सबक सिखाऊंगी। मुझे अभी तक याद है। जब वो मुझे मारने पर आते थे तो मेरी चोटी पकड़ते थे और दीवार पर जोर से सिर मार देते थे, जिससे चोट लगती थी और खून बहता रहता था। बहुत तड़प होती थी। लेकिन मेरा ये मानना है कि जब एक इंसान बहुत अत्याचार सहता है तभी वो दूसरों का दर्द समझ पाता है।
स्वाती ने कहा की तभी उसके अंदर एक ऐसी आग जाग्रत होती है, जिसकी वजह से वो पूरा सिस्टम हिला पाता है। शायद मेरे साथ भी यही हुआ और हमारे जितने भी अवॉर्डी है, उनकी भी यही कहानी है। स्वाति मालीवाल दिल्ली महिला आयोग (DCW) की अध्यक्ष हैं। 2021 में स्वाति को लगातार तीसरी बार DCW का जिम्मा सौंपा गया। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली महिला आयोग की मौजूदा टीम को दूसरा टर्म देने के फैसले पर मुहर लगाई थी।
दिल्ली महिला आयोग की ओर से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए स्वाति ने कहा कि मैं चौथी कक्षा तक अपने पिता के साथ रही। जब मेरे पिता जैसे ही घर आते थे मैं डर जाती थी। वह गुस्से में बिना वजह मुझे पीटते थे। डर के कारण मैंने कई रातें तो बिस्तर के नीचे छिपकर बिताई हैं। मैं डरकर सहमती और कांपती रहती थी। तड़प में उस समय मैं केवल यह सोचती थी कि ऐसा क्या किया जाए कि ऐसा शोषण करने वाले और घरेलू हिंसा करने वाले मेरे पिता जैसे आदमियों को सबक सिखा सकूं।
अपने बचपन के संघर्ष को बताते स्वाति ने अपनी बहन, मां और उनके साथ होने वाली मार पिटाई और डर के वातावरण वाली अपनी जिंदगी का कहानी बताई। उन्हें यह पता नहीं चलता था कि कब उनके पिता उनकी पिटाई कर दें। स्वाति ने कहा कि उनका बचपन शराबी पिता के घरेलू हिंसा की पीड़ा को झेलते हुए ही बीता है। वह कहती हैं कि मेरी जिंदगी में मेरी मां, मेरी मौसी, मौसाजी और मेरे नानी-नानाजी न होते तो शायद मैं उस पीड़ा से बाहर नहीं निकल पाती और शायद यहां ना होती जहां मैं आज खड़ी हूं।