CBI छापे के बाद FIR : भ्रष्टाचार पर CBI का शिकंजा…दो पूर्व सीएमडी और कार्यकारी निदेशक सहित पांच अधिकारियों पर धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का केस,जल्द हो सकती है गिरफ़्तारी…

Chhattisgarh news FIR after CBI raid: CBI crackdown on corruption... Case of cheating and corruption against five officers including two former CMDs and Executive Director दिल्ली से आई CBI की टीम को भिलाई में छापामार कार्रवाई में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड में हुए धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार के मामले में कई अहम दस्तावेज मिले हैं।

CBI छापे के बाद FIR : भ्रष्टाचार पर CBI का शिकंजा…दो पूर्व सीएमडी और कार्यकारी निदेशक सहित पांच अधिकारियों पर धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का केस,जल्द हो सकती है गिरफ़्तारी…
CBI छापे के बाद FIR : भ्रष्टाचार पर CBI का शिकंजा…दो पूर्व सीएमडी और कार्यकारी निदेशक सहित पांच अधिकारियों पर धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का केस,जल्द हो सकती है गिरफ़्तारी…

Chhattisgarh news FIR after CBI raid: CBI crackdown on corruption


नया भारत डेस्क : दिल्ली से आई CBI की टीम को भिलाई में छापामार कार्रवाई में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड में हुए धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार के मामले में कई अहम दस्तावेज मिले हैं। इसके आधार पर CBI ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के दो पूर्व सीएमडी और कार्यकारी निदेशक सहित हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) के पांच अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

 

जिनके खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है, उनमें तत्कालीन सीएमडी कैलाश धर दीवान और पूर्व कार्यकारी निदेशक (सामग्री और अनुबंध) दिलीप कुमार महाजन, महाप्रबंधक (परियोजना) विनय कुमार सिंह, तत्कालीन निदेशक (संचालन) और पूर्व सीएमडी संतोष शर्मा और तत्कालीन सहायक महाप्रबंधक ( इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग) विवेक गुप्ता आदि शामिल हैं।

 

आईपीसी की धाराओं के तहत आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के अलावा आपराधिक कदाचार से जुड़े भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत दर्ज मामला 2013 से तत्कालीन सीएमडी संतोष शर्मा के कार्यकाल के दौरान कथित अनियमितताओं और कदाचार से जुड़ा है। यह पूरा मामला 2019 में मध्यप्रदेश के मलाजखंड और राजस्थान के खेतड़ी में पीएसयू द्वारा जारी किए गए कई अनुबंध में हुई गड़बड़ी से जुड़ा है।
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि तत्कालीन सीएमडी कैलाश धर दीवान ने तत्कालीन निदेशक (ऑपरेशन) संतोष शर्मा, तत्कालीन एजीएम विवेक गुप्ता के साथ "साजिश" की और एसटीपीएल को खेतड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स में पायलट प्लांट के टेंडर के लिए अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करके "आपराधिक कदाचार" किया।


जांच में आगे पता चला कि सोने, चांदी और सिलिका जैसी धातुओं की वांछित मात्रा पायलट प्लांट से नहीं मिल सकी जिसके कारण प्लांट बंद हो गया।
प्रारंभिक जांच में यह बात भी सामने आई है कि दीवान ने कथित तौर पर संतोष शर्मा, विवेक गुप्ता और विनय कुमार सिंह (तत्कालीन डीजीएम प्रोजेक्ट्स) के साथ मिलकर खेतड़ी में पायलट प्लांट चालू होने से पहले मलाजखंड में एक वाणिज्यिक संयंत्र की स्थापना के लिए साजिश रची थी।


2016 से 2020 की अवधि के दौरान, दीवान ने संतोष शर्मा, दिलीप कुमार महाजन (तत्कालीन कार्यकारी निदेशक), विनय कुमार सिंह, विवेक गुप्ता और अज्ञात लोक सेवकों की मिलीभगत से गड़बड़ी की बात भी प्रारंभिक जांच में सामने आई है, जिसके आधार पर केस दर्ज किया गया है।